जज बनना किसी पहाड़ तोड़ने से कम नहीं है। इसकी पढ़ाई बेहद कठिन होती है। उत्तर प्रदेश के अकबरपुर के रहने वाले जैनेंद्र पांडे ने लगभग 8 साल तक संघर्ष किया और अंततः उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा में चयनित होकर यह सिद्ध कर दिया कि निरंतर प्रयास से सफलता पाई जा सकती है। आइए इनसे जानते हैं कि आखिर कैसे की इन्होंने अपनी तैयारी और कौन-कौन सी मुश्किलों का करना पड़ा सामना। पढ़ते हैं आगे...
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जज बनने के लिए अपनाई थी ये रणनीति, इंटरव्यू में भी पूछे गए कड़े सवाल
Tue, 03 Dec 2019 03:20 PM IST
Garima Garg
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: Garima Garg
Updated Tue, 03 Dec 2019 03:20 PM IST
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जैनेंद्र पांडे
- फोटो : Facebook
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जैनेंद्र पांडे
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कई बार हम देखते हैं कि एक या दो बार असफसलता मिलने पर लोग अपना लक्ष्य बदल देते हैं। जब हमने इस विषय पर जैनेंद्र से बात की तो इन्होंने बताया कि परीक्षा पास करने और सफलता पाने के लिए इन्होंने जी तोड़ मेहनत की और अपने लक्ष्य पर डटे रहे। निराश न होकर इन्होंने 8 वर्षों के लंबे अंतराल के पश्चात इस परीक्षा में सफल पाई। इन्हें पूरा यकीन था कि भले कितना समय लग जाए, परंतु अंततः सफलता इनके कदम चूमेगी।
चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय
- फोटो : file photo
इन्हें सफलता पाने में 8 वर्षों का लंबा समय लगा। ऐसे में इनके सामने सबसे बड़ी चुनौती थी अपना संयम बनाए रखना। कई बार इन्हें असफलता भी मिली लेकिन इन्होंने हार नहीं मानी। इन्होंने तब तक प्रयास किया, जब तक परीक्षा पास नहीं कर ली। इसके अलावा इन्हें सही स्टडी मैटेरियल का चुनाव करने में भी दिक्कत आती रही। अपने शिक्षकों से इस बारे में मदद ली और उनके सही मार्गदर्शन के कारण जैंनेद्र इस मुकाम को हासिल कर पाएं।
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इंटरव्यू का अनुभव इनका बेहद खास रहा। इन्होंने बताया कि बोर्ड का रवैया इनके प्रति बहुत ही सहयोगात्मक था, जिसकी वजह से खुद को सहज महसूस कर रहे थे। इनका साक्षात्कार काफी लंबे समय तक चला, प्रश्न कठिन थे। साक्षात्कार के बाद बाहर आने पर इन्हें यकीन था कि इनका चयन हो जाएगा।
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जैनेंद्र ने बताया कि जज बनने के पीछे दो वजहें थी। पहला यह मेरे परिवार का सपना था कि ये अधिकारी का पद हासिल करें और दूसरा यह कि भारत की न्यायिक प्रक्रिया से जुड़कर उसमें अपना पूरा योगदान देना चाहते थे। इसके अलावा इन्होंने बताया कि उद्देश्य के साथ उ.प्र.उच्चतर न्यायिक सेवा परीक्षा की तैयारी की और न्यायिक सेवा का पद हासिल किया।
परीक्षा की रणनीति में सबसे जरूरी होता है परीक्षा का सारगर्भित अध्ययन और परीक्षा संबंधी नोट्स तैयार करना। इसके अलावा परीक्षार्थियों को ध्यान रखना चाहिए कि वे परीक्षा के दौरान अपने द्वारा बनाए गए नोट्स का रिवीजन करते रहें एवं लोगों से चर्चा और परिचर्चा कर अपनी समझ विकसित करते रहें। प्रतिदिन अखबार पढ़ने को दिनचर्या में सम्मलित करना बेहद जरूरी है।
जैनेंद्र पांडे (ADJ- अपर जिला जज)
ये भी पढ़ें- सबसे लंबे समय तक सत्ता में रहे ये 10 मुख्यमंत्री, एक ने तो 24 सालों तक किया राज
परीक्षा की रणनीति में सबसे जरूरी होता है परीक्षा का सारगर्भित अध्ययन और परीक्षा संबंधी नोट्स तैयार करना। इसके अलावा परीक्षार्थियों को ध्यान रखना चाहिए कि वे परीक्षा के दौरान अपने द्वारा बनाए गए नोट्स का रिवीजन करते रहें एवं लोगों से चर्चा और परिचर्चा कर अपनी समझ विकसित करते रहें। प्रतिदिन अखबार पढ़ने को दिनचर्या में सम्मलित करना बेहद जरूरी है।
जैनेंद्र पांडे (ADJ- अपर जिला जज)
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