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Success Story: आईआईटीयन से आईपीएस और फिर आईएएस बनीं, जानिए गरिमा अग्रवाल ने कैसे पाई यूपीएससी में सफलता

Fri, 29 Oct 2021 05:03 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: देवेश शर्मा Updated Fri, 29 Oct 2021 05:03 PM IST
सार

Success Story of IAS Garima Agrawal: गरिमा ने यूपीएससी के अपने पहले ही प्रयास में आईपीएस की रैंक पाकर सफलता हासिल कर ली थी, लेकिन उनका लक्ष्य कुछ और था। उन्होंने फिर से तैयारी की और दूसरे ही प्रयास में आईएएस बनने का अपना ख्वाब पूरा किया। आइए जानते हैं आईएएस गरिमा की सफलता की कहानी ...

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Success Story of IAS Garima Agrawal success tips form her journey IIT to UPSC, IPS Women Cop who became IAS Officer
आईएएस गरिमा अग्रवाल - फोटो : सोशल मीडिया

Success Story of IAS Garima Agrawal: देश की ब्यूरोक्रेसी में भारतीय प्रशासनिक सेवा विभाग सबसे ज्यादा प्रभावशाली माना जाता है। इसमें उम्मीदवार विभिन्न मंत्रालय और विभाग में सचिव स्तरीय पद प्राप्त करते हैं तो वहीं जिलास्तर पर जिलाधिकारी और विभिन्न प्राधिकरणों में आयुक्त पद पर काबिज होते हैं। यही कारण है कि प्रत्यके वर्ष लाखों युवा संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी की ओर से आयोजित की जाने वाली सिविल सेवा परीक्षा यानी सीएसई में अपनी किस्मत आजमाते हैं। 


हालांकि, सभी को सफलता नसीब नहीं हो पाती है। लेकिन कुछ होनहार ऐसे भी होते हैं, जो अपने पहले ही प्रयास में इस परीक्षा को क्लीयर कर लेते हैं। ऐसी ही एक होनहार हैं भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी आईएएस अधिकारी गरिमा अग्रवाल। मध्यप्रदेश के खरगोन की 29 वर्षीय गरिमा ने यूपीएससी के अपने पहले ही प्रयास में आईपीएस की रैंक पाकर सफलता हासिल कर ली थी, लेकिन उनका लक्ष्य कुछ और था। उन्होंने फिर से तैयारी की और दूसरे ही प्रयास में आईएएस बनने का अपना ख्वाब पूरा किया। आइए जानते हैं आईएएस गरिमा की सफलता की कहानी ...  

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आईएएस गरिमा अग्रवाल - फोटो : सोशल मीडिया

इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस में पैसा, शोहरत, रूतबा और दबदबा सब कुछ है। लेकिन पहली बात तो यह कि सिविल सेवा परीक्षा को क्लीयर कर पाना सबके बस की बात नहीं है। दूसरा आपने क्लीयर भी कर लिया तो अच्छी रैंक पाकर आईएएस बनना बड़ा मुश्किल काम है। 
हाल ही में एक साक्षात्कार के दौरान गरिमा ने यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए कई अहम टिप्स दिए हैं। गरिमा अग्रवाल अभी तेलंगाना में प्रशिक्षण के लिए सहायक जिलाधिकारी के पद पर तैनात हैं। यूपीएसपी की सिविल सेवा परीक्षा देने के पहले गरिमा आईआईटी हैदराबाद से ग्रेजुएशन कर चुकी हैं। गरिमा ने दिल्ली नॉलेज ट्रेक को दिए एक साक्षात्कार में अपने आईआईटी से लेकर आईपीएस और फिर आईएएस बनने के सफर की कहानी साझा की।  

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आईपीएस गरिमा अग्रवाल - फोटो : सोशल मीडिया

बचपन से ही मेधावी 
खरगोन के सरस्वती विद्या मंदिर से शुरुआती पढ़ाई करने वाली गरिमा शुरू से ही पढ़ाई में मेधावी रही हैं। उनकी बड़ी बहन प्रीति अग्रवाल ने भी 2013 में भारतीय डाक सेवा की परीक्षा पास की थी। गरिमा ने स्कूल लाइफ से लेकर यूपीएससी सिविल सेवा तक जिस क्षेत्र में भी कदम रखा, वहां सफलता जरूर पाई है।
गरिमा यूपीएससी सीएसई एग्जाम में पहली बार 240वीं रैंक पाकर आईपीएस अधिकारी बनी थीं, लेकिन अगले ही प्रयास सीएसई एग्जाम में 2018 में उन्होंने अपनी अधिक मेहनत के बलबूते न केवल 40वीं रैंक हासिल की बल्कि अपने आईएएस ऑफिसर बनने का ख्वाब भी पूरा किया।  इसके बाद उन्होंने 2019-2020 में एलबीएस अकादमी, मसूरी में अपना प्रशिक्षण पूरा किया। 
 

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आईपीएस गरिमा अग्रवाल - फोटो : सोशल मीडिया

संसाधन कम, रिवीजन ज्यादा 
गरिमा ने अपनी सफलता के मंत्र बताते हुए यूपीएससी सिविल सेवा की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों को कई अमूल्य सुझाव दिए। गरिमा के अनुसार, सबसे पहले तो इस बात को दिमाग में रख लें कि प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार की तैयारी अलग-अलग न करके संयुक्त तौर पर करनी चाहिए।
गरिमा के अनुसार, यूपीएससी प्री परीक्षा में आने वाले प्रश्न भी कई बार मुख्य परीक्षा में आ जाते हैं। इसीलिए रिवीजन करना जरूरी है। सिर्फ बहुत सारा स्टडी मटैरियल जुटाने से ही सफलता नहीं मिलती, उसे पढ़ना होता है। याद करना होता है। मॉक टेस्ट देने चाहिए। साथ ही साथ आंसर राइटिंग की प्रैक्टिस कर स्पीड भी बढ़ाएं।    
 

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आईएएस गरिमा अग्रवाल - फोटो : सोशल मीडिया

पहले प्री को टारगेट बनाएं
गरिमा के अनुसार, सबसे पहले प्री की परीक्षा को टारगेट बनाना चाहिए। अगर यही बाधा पार नहीं हुई तो आगे की सारी तैयारी बेकार हो जाएगी। दोनों परीक्षाओं की साथ-साथ तैयारी करनी चाहिए। क्योंकि बाद में मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए समय नहीं मिल पाएगा। लेकिन फोकस प्री पर जरूर रहे। 
मॉक टेस्ट के माध्यम से अपने रिवीजन को जांचते रहें। पाठ्यसामग्री इंटरनेट पर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। बकौल गरिमा, मैं खुद जिन विषयों में नंबर कम आते थे, उनकी अलग से प्रैक्टिस करती थी। उन्हें रिवाइज करती थी। 

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