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गूगल की खोज करने वाला वो तीसरा इंसान, जिसे फाउंडर्स की सूची में नहीं मिला नाम
वेब सर्विसेज प्रदान करने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी गूगल (Google) का आज जन्मदिन है। आज गूगल 21 साल का हो गया है। इस मौके को सेलिब्रेट करने के लिए गूगल ने खुद अपना डूडल भी बनाया है।
ज्यादातर लोग यही जानते हैं कि गूगल को दो लोगों ने मिलकर शुरू किया था। लेकिन ऐसा नहीं है। गूगल की खोज करने में तीन लोगों का योगदान है। लेकिन उस तीसरे शख्स को फाउंडर्स की सूची में नाम नहीं मिला। कौन है वो तीसरा शख्स? फाउंडर्स में क्यों नहीं है उसका नाम? आगे पढ़ें इन सवालों के जवाब।
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21वें जन्मदिन पर गूगल डूडल
- फोटो : google
आज से करीब 23 साल पहले, जनवरी 1996 में गूगल एक रिसर्च प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू हुआ था। लैरी पेज और सर्गे ब्रिन (Larry Page and Sergey Brin) ने इस प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी। दुनिया इन्हें आज गूगल के फाउंडर के रूप में जानती है। लेकिन इनके साथ उस प्रोजेक्ट में तीसरा शख्स भी था। ये तीनों पीएचडी स्टूडेंट थे।
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स्कॉट हसन
- फोटो : Twitter
उस तीसरे शख्स का नाम है स्कॉट हसन (Scott Hassan)। स्कॉट इस रिसर्च प्रोजोक्ट के ओरिजिनल लीड प्रोग्रामर थे। गूगल सर्च इंजन (Google Search Engine), जो आज दुनिया का सबसे बड़ा सर्च इंजन है, इसके लिए ज्यादातर कोड स्कॉट ने ही लिखे हैं। फिर क्यों नहीं मिला नाम?
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लैरी पेज
- फोटो : Forbes
दरअसल, एक कंपनी के तौर पर गूगल की शुरुआत 1998 में की गई। रिसर्च प्रोजेक्ट पूरा होते ही और एक कंपनी के तौर पर गूगल के शुरू होने से पहले स्कॉट ने इसे छोड़ दिया था। वह आगे रोबोटिक्स में अपना करियर बनाना चाहते थे। बाद में 2006 में स्कॉट ने विलो गैराज नाम की एक कंपनी शुरू की।
गूगल का डोमेन नेम 15 सितंबर 1997 को रजिस्टर किया गया था और कंपनी 1998 में बनी। शुरुआत में लैरी पेज और सर्गे ब्रिन ने कैलिफोर्निया में एक दोस्त के गैरेज में गूगल का काम शुरू किया। इन्होंने स्टैनफोर्ड में पढ़ने वाले एक साथी पीएचडी स्टूडेंट क्रेग सिल्वर्स्टन को अपना पहला कर्मचारी नियुक्त किया था।
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