उत्तराखंड में ऋषि गंगा में आई जल प्रलय के बाद मची तबाही में अभी भी 174 लोग नहीं मिल सके हैं। मलबे से अभी तक 32 शव निकाले जा चुके हैं, जबकि अलग-अलग जगहों पर मलबे से सात मानव अंग भी बरामद हुए हैं। ऐसे में लापता हुए लोगों को बचाने के लिए आसमान से जमीन तक टीमें राहत एवं बचाव कार्य में लगी हैं।
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चमोली में राहत बचाव कार्य जारी
- फोटो : अमर उजाला
आपदा के तीसरे दिन भी बचाव दल सुरंग में फंसे हुए करीब 35 मजदूरों तक नहीं पहुंच पाया है। आईटीबीपी के 50 जवान मलारी क्षेत्र के 13 गांवों में रसद पहुंचाने के काम में जुटे हैं। जिला प्रशासन की ओर से राशन किट बनाए जा रहे हैं। जबकि आईटीबीपी के जवानों द्वारा गांव-गांव में इनका वितरण किया जा रहा है।
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चमोली में राहत बचाव कार्य जारी
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जवान कई किलोमीटर पैदल चलकर गांवों में पहुंच रहे हैं। जवानों द्वारा जुग्जु, रैणी, सुराईथोटा, लाता, पैंग, मुरंडा आदि गांवों में रसद बांटी गई। प्रभावित गांवों के लोगों को इधर-उधर ले जाने और राशन पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर की व्यवस्था भी की गई है।
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चमोली में राहत बचाव कार्य जारी
- फोटो : अमर उजाला
ऋषि गंगा में आए सैलाब से भंग्यूल गांव को जोड़ने वाला पैदल पुल भी बह गया था। जिससे ग्रामीण अपने घरों में ही कैद होकर रह गए हैं। लोक निर्माण विभाग ने गांव तक जाने के लिए ट्रॉली निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। लोनिवि के ईई धन सिंह रावत ने बताया कि भंग्यूल गांव के लिए धौली गंगा पर ट्रॉली लगाई जा रही है। ट्रॉली स्थापित करने के लिए मौके पर ट्रॉली वायर व अन्य उपकरण पहुंचाए जा रहे हैं।
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चमोली में सुरंग में जाने का रास्ता बनाते जवान
- फोटो : अमर उजाला
प्रभावित क्षेत्र तपोवन में रेस्क्यू टीमें जी जान से राहत-बचाव कार्य में लगी हुई हैं। सोमवार रात को तपोवन सुरंग में मलबा हटाने के दौरान सुरंग के दोनों ओर सरिया बाहर निकल गए थे, जिससे मलबा हटाने का कार्य प्रभावित हुआ। बाद में रेस्क्यू टीमों ने कटर मशीन से सरिया काटे।