दो दिनों से हो रही बारिश से पहाड़ से लेकर तराई भाबर तक जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। मलबे और नालों के उफान में आने से भवाली-अल्मोड़ा, टनकपुर-चंपावत और थल-मुनस्यारी हाईवे समेत कई ग्रामीण मार्ग जहां-तहां बंद हो गए हैं। टनकपुर-चंपावत हाईवे पर कीचड़ में फंसा सब्जी लदा कैंटर पहाड़ी से आए मलबे की चपेट में आकर करीब सौ मीटर खाई में जा गिरा। कैंटर चालक बनबसा निवासी रवि कुमार ने कूदकर अपनी जान बचाई।
उत्तराखंड: आफत बनी बारिश, मलबा आने से टनकपुर-चंपावत और मुनस्यारी हाईवे बंद
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उधर, बस्तिया और सूखीढांग के बीच चार स्थानों पर मलबा आने से टनकपुर-चंपावत हाईवे शनिवार सुबह से बंद है। दोपहर में स्वांला के पास भी मलबा आ गया। इसके चलते चंपावत से टनकपुर को आ रहे दर्जनों वाहन और यात्री सूखीढांग में फंसे हैं।
पहाड़ी से मलबा, पत्थर और पेड़ों के गिरने का खतरा बना हुआ है। इसे देखते हुए प्रशासन ने पिथौरागढ़ से आने वाले वाहनों को लोहाघाट से वाया देवीधुरा-हल्द्वानी डायवर्ट किया। जबकि, टनकपुर से पहाड़ की ओर जाने वाले वाहनों को भी वाया हल्द्वानी भेजा गया। खबर लिखे जाने तक सड़क नहीं खुल पाई थी। इधर टनकपुर में किरोड़ा नाले के उफान में आने और बाटनागाड़ में भारी मात्रा में मलबा आने से पूर्णागिरि मार्ग सात घंटे बंद रहा। बाटनागाड़ में भारी मात्रा में मलबा आने से पूर्णागिरि मार्ग सात घंटे बंद रहा। इसी तरह किरोड़ा नाले के उफनाने से भी लोग कई गांवों का संपर्क करीब तीन घंटे कटा रहा।
पहाड़ों पर बारिश से शारदा का जलस्तर भी बढ़ गया है। शारदा हेडवर्क्स प्रशासन ने बनबसा में शारदा बैराज पर रेड अलर्ट कर वाहनों के संचालन पर रोक लगा दी। नाचनी में थल-मुनस्यारी मार्ग पर स्थित हरड़िया बैली ब्रिज खतरे की जद में आ गया है। पुल की दयनीय हालत को देखते हुए लोनिवि और पुलिस ने इस पर वाहनों के संचालन पर रोक लगा दी है। वहीं, थल-मुनस्यारी मार्ग तीन दिन से रातीगाड़ के पास बंद है। यहां पर 200 मीटर सड़क मलबे और बोल्डरों से पट गई है। डीडीहाट, बेड़ीनाग, अस्कोट आदि स्थानों पर भी बारिश के चलते जनजीवन अस्त व्यस्त है।