केदारनाथ में लगातार तीसरे दिन भी बर्फबारी होती रही। धाम में कुल 11 फीट से अधिक बर्फ जम चुकी है। केदारपुरी सहित पैदल मार्ग पर आवाजाही पूरी तरह से ठप हो चुकी है। मौसम के बिगड़े मिजाज से पुनर्निर्माण कार्य बंद पड़े हैं। यहां सिर्फ 29 लोग रह रहे हैं।
शुक्रवार को तड़के से ही केदारनाथ सहित पैदल मार्ग पर मध्यम बर्फबारी का क्रम बना रहा। मंदिर परिसर सहित समूची केदारपुरी में पैदल मार्ग बर्फ से ढक चुके हैं, जिससे यहां रह रहे लोगों को आवाजाही में खासी दिक्कतें हो रही हैं। धाम में मौजूद वुड स्टोन कंपनी के टीम प्रभारी कैप्टन सोबन सिंह बिष्ट ने बताया कि बर्फबारी से पुनर्निर्माण कार्य सहित जरूरी सुविधाएं पूरी तरह से ठप हो चुकी हैं।
बर्फबारी के कारण जनपद में गुप्तकाशी-कालीमठ-चौमासी मार्ग बंद पड़ा है, जिससे चौमासी, चिलौंड, जाल तल्ला, मल्ला के ग्रामीणों को मीलों पैदल नापना पड़ रहा है। वहीं, कुंड-ऊखीमठ-मंडल-गोपेश्वर हाईवे भी दस दिन से बंद होने से ऊखीमठ सहित निकटवर्ती क्षेत्र के लोगों को गंतव्य तक पहुंचने के लिए मीलों अतिरिक्त सफर तय करना पड़ रहा है। इधर, अन्य संपर्क मोटर मार्गों की स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं है।
मुनस्यारी में मौसम खराब होने से शुक्रवार को हंसलिंग, राजरंभा, पंचाचूली, छिपलाकेदार, नाग्निधुरा, कालामुनि, बेटुलीधार आदि जगहों पर फिर से हिमपात हुआ। इसके चलते शनिवार को यहां शिक्षण संस्थाओं में अवकाश घोषित किया गया है। ठंड के चलते निजी विद्यालयों ने शनिवार के लिए अवकाश घोषित किया गया है।
गैरसैंण में दो दिनों से लगातार हो रही बारिश और बर्फबारी से पर्यटन स्थल रूपकुंड, वेदनी, आली, बगजी, भींकलताल, ब्रह्मताल बुग्याल बर्फ से ढक गए हैं। वहीं ऊंचाई वाले गांव वाण, कुलिंग, घेस, हिमनी, बलाड़ बांक, पिनांउ में लगातार बर्फबारी हो रही है। वाण के हीरा बुग्याली, पान सिंह, कुलिंग के भुवन बिष्ट आदि ने बताया कि लगातार बर्फबारी और शीतलहर से ग्रामीण घरों में ही दुबके हुए हैं। वहीं गैरसैंण के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी बर्फबारी हुई।