आयरिश शिकारी और शिकार कथाओं के लेखक जिम एडवर्ड कार्बेट को आज का चंपावत भी खोज रहा है। 436 लोगों की जान लेने वाली नरभक्षी बाघिन का शिकार कर कार्बेट ने उस समय लोगों को इस बाघिन के आतंक से मुक्ति दिलाई थी। वर्तमान में चंपावत जिले के कई इलाके हैं जहां तेंदुओं के आतंक के कारण लोगों का घरों से बाहर निकलना दूभर हो रहा है।
गिनीज बुक में दर्ज है 436 लोगों को मारने वाली नरभक्षी बाधिन, इन्होंने किया था शिकार
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वर्तमान समय में जिले के विभिन्न स्थानों में तेंदुए के खौफ के साये में जी रहे लोगों की आंखों को आज भी जिम कार्बेट जैसे जीवट शिकारी की तलाश है। इतिहासकार देवेंद्र ओली बताते हैं कि जिम ने 1905 में देवीधुरा मंदिर के निकट टैंपल टाइगर में एक और नरभक्षी बाघ को मारने का प्रयास किया, लेकिन वह उसे खोज पाने में असफल रहा। 1929 में उन्होंने सीमांत ठूलाकोट में भी नरभक्षी बाघ का सफाया किया था। सीमांत तल्लादेश क्षेत्र के शेर सिंह महर बताते हैं कि 1940 में जिम कार्बेट ने स्थानीय शिकारियों के सहयोग से नरभक्षी बाघिन के आतंक से निजात दिलाई थी। उस दौर में नरभक्षी बन चुकी शेरनी ने नीड़, बोयल, गुरखोली, ठूलाकोट, ल्वारगी, बकोड़ा, सोराई आदि गांवों में करीब तीन दर्जन से अधिक लोगों को मौत के घाट उतार दिया था।