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गिनीज बुक में दर्ज है 436 लोगों को मारने वाली नरभक्षी बाधिन, इन्होंने किया था शिकार

Wed, 25 Jul 2018 10:00 AM IST
सतीश जोशी ‘सत्तू’, अमर उजाला, चंपावत
सतीश जोशी ‘सत्तू’, अमर उजाला, चंपावत Updated Wed, 25 Jul 2018 10:00 AM IST
people need jim edward corbett again killed man eater tigress who killed 436 human
जिम कॉर्बेट

आयरिश शिकारी और शिकार कथाओं के लेखक जिम एडवर्ड कार्बेट को आज का चंपावत भी खोज रहा है। 436 लोगों की जान लेने वाली नरभक्षी बाघिन का शिकार कर कार्बेट ने उस समय लोगों को इस बाघिन के आतंक से मुक्ति दिलाई थी। वर्तमान में चंपावत जिले के कई इलाके हैं जहां तेंदुओं के आतंक के कारण लोगों का घरों से बाहर निकलना दूभर हो रहा है।


 

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jim corbett
25 जुलाई 1875 को नैनीताल में जन्मे जिम कार्बेट ने चंपावत जिले को अपनी कार्यस्थली बनाया था। उन्होंने 1907 में चंपावत में वर्तमान मुख्यालय के पास अपने जीवन के प्रथम नरभक्षी बाघिन का शिकार कर यहां के निवासियों को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई थी। इस बाघिन ने 436 लोगों की जान ली थी जो कि गिनीज बुक आफ द वर्ल्ड रिकार्ड में भी दर्ज है।  19 वीं सदी का माहौल नेपाल और भारत के उत्तराखंड के कुमाऊं के लोगों के लिए बड़ा खौफनाक था। लोग नरभक्षी बाघ के खौफ से घरों से निकलने में डरते थे। उस समय जिम कार्बेट ने कई नरभक्षी बाघों को मौत के घाट उतार कर उस समय लोगों को काफी राहत पहुंचाई थी।

 
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leopard

वर्तमान समय में जिले के विभिन्न स्थानों में तेंदुए के खौफ के साये में जी रहे लोगों की आंखों को आज भी जिम कार्बेट जैसे जीवट शिकारी की तलाश है। इतिहासकार देवेंद्र ओली बताते हैं कि जिम ने 1905 में देवीधुरा मंदिर के निकट टैंपल टाइगर में एक और नरभक्षी बाघ को मारने का प्रयास किया, लेकिन वह उसे खोज पाने में असफल रहा। 1929 में उन्होंने सीमांत ठूलाकोट में भी नरभक्षी बाघ का सफाया किया था। सीमांत तल्लादेश क्षेत्र के शेर सिंह महर बताते हैं कि 1940 में जिम कार्बेट ने स्थानीय शिकारियों के सहयोग से नरभक्षी बाघिन के आतंक से निजात दिलाई थी। उस दौर में नरभक्षी बन चुकी शेरनी ने नीड़, बोयल, गुरखोली, ठूलाकोट, ल्वारगी, बकोड़ा, सोराई आदि गांवों में करीब तीन दर्जन से अधिक लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। 
 

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इसी रायफल से गुलदार को किया था ढेर।
वन विभाग ने पांच साल पहले जिम कार्बेट से जुड़ी वस्तुओं को सहेजकर सीमांत मंच में स्थित वन विभाग के डाक बंगले को म्यूजियम बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। प्रभागीय वनाधिकारी केएस बिष्ट के अनुसार इस प्रस्ताव को लेकर अब तक शासन से कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। जिम कार्बेट ने अपने जीवन के अंतिम नरभक्षी का शिकार भी चंपावत जिले के लधियाघाटी क्षेत्र में ही किया। उन्होंने 1946 में लधियाघाटी में आंतक का पर्याय बन चुके आदमखोर बाघ को मौत के घाट उतारा था। 
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