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धार्मिक कर्मकांड के लिए ‘पंडित जी’ अपना रहे नया ट्रेंड, अब घरों में ऐसे करेंगे पूजा-पाठ

Fri, 08 Feb 2019 10:18 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: अलका त्यागी Updated Fri, 08 Feb 2019 10:18 AM IST
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Pandit doing Religious ritual on salary base now in haridwar
धार्मिक अनुष्ठान करते हरिद्वार के पंडित उज्जवल पंडित

घर में पूजा-पाठ तो आप सभी कराते होंगे। यह खबर आपके बहुत काम आएगी। धर्मनगरी में ‘पंडित जी’ भी अब ‘तनख्वाह’ पर घरों और प्रतिष्ठानों पर पहुंचकर धार्मिक कर्मकांड कर रहे हैं। भले ही ये बात सुनने में अजीब हो, लेकिन धर्मनगरी में ये ट्रेंड जोर पकड़ता जा रहा है। पंडित जी मासिक शुल्क तय करके अपने यजमान से बुलावे पर महीने में एक या यजमान की आवश्यकता के अनुसार हर दिन जाकर पूजा-पाठ करेंगे। मासिक शुल्क यजमान की आर्थिक स्थिति देखकर तय होता है। ये नया ट्रेंड यजमान भी हाथों-हाथ ले रहे हैं।

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उज्जवल पंडित

अध्यात्मिक नगरी हरिद्वार में पूजा अर्चना का भी नई परंपरा सामने आ रही है। अभी तक आमजन घर से लेकर व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में खुद ही पूजा अर्चना करते थे। कई बार बड़ी पूजा करानी होती है या घर-प्रतिष्ठानों में प्रवेश व अन्य कर्मकांड के दौरान पंडित जी की जरूरत पड़ती है। ऐसे में अक्सर पंडित जी समय पर उपलब्ध नहीं हो पाते। वहीं लोगों के पास समय का अभाव भी होता जा रहा है। ऐसे में पूजा-पाठ कराने की नई परंपरा सामने आ रही है। 

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pujan

अब यजमान घरों और प्रतिष्ठानों में पूजा-अर्चना के लिए पंडित जी को वेतन पर रखने लगे हैं। पंडित जी अपने यजमान के यहां पर उनकी जरूरत के हिसाब से महीने में चार-छह बार स्वयं पूजा करेंगे। यजमान चाहे तो नित्य होने वाली पूजा भी पंडित जी स्वयं उनके घर-प्रतिष्ठानों पर जाकर करेंगे। पंडित जी इस काम के वेतन के रूप में प्रतिमाह 1100 रुपये और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में 2100 रुपये लेंगे। हालांकि वेतन की रकम यजमान की आर्थिक स्थिति पर भी निर्भर करती है।

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अनुष्ठान करते पंडित

पंडित जी घर या व्यवसायिक प्रतिष्ठान में प्रतिदिन या साप्ताहिक धूप-बत्ती करते हैं। इसके अलावा गणेश वंदना से लेकर भगवती या शंकर भगवान की आरती करते हैं। संस्कृत के श्लोकों का उच्चारण भी किया जाता है। बकायदा शंखनाद भी पंडित जी करेंगे।अध्यात्मिक नगरी हरिद्वार में पूजा अर्चना से जुड़ी चीजों का विस्तृत बाजार है। शंख, पूजन सामग्री से लेकर दीप, थाल, ईष्टों के वस्त, मूर्तियां धातु और पत्थर, पूजा पात्र अलग अलग वैरायटी में उपलब्ध है।  

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उज्जवल पंडित

यह परंपरा पुरानी है, लेकिन तब चंद पंडित ही घर में इस तरह जाकर पूजा करते थे। मौजूदा दौर में हर किसी के पास समय कम है लिहाजा अब पंडितों की मांग अधिक है। ऐसे में तनख्वाह पर पूजा अर्चना करने का कार्य किया जा रहा है। 
-उज्जवल पंडित, अध्यक्ष, अखिल भारतीय युवा तीर्थ पुरोहित महासभा

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