सपा संस्थापक व यूपी के तीन बार मुख्यमंत्री रहे मुलायम सिंह यादव के दामन पर भले ही राज्य आंदोलनकारियों के साथ ज्यादतियों की छींटें हों, लेकिन अलग राज्य उत्तराखंड और गैरसैंण को राजधानी बनाने को लेकर कदम बढ़ाने वाले सबसे पहले नेता भी वही थे। मुलायम सरकार ने ही जहां उत्तराखंड को बर्फिया लाल ज्वांठा के रूप में पहला कैबिनेट मंत्री दिया तो कैबिनेट मंत्री रमाशंकर कौशिक समिति बनाकर अलग राज्य की अवधारणा को आगे बढ़ाया।
Mulayam Singh Yadav: उत्तराखंड और गैरसैंण राजधानी को सबसे पहले मुलायम ने बढ़ाए थे कदम, जानें ये खास बातें
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कौशिक समिति ने दस माह के भीतर अलग राज्य उत्तराखंड का 13 बिंदुओं का ड्राफ्ट तैयार किया। इसमें पर्वतीय राज्य उत्तराखंड और गैरसैंण राजधानी का जिक्र था। डॉ. सचान के मुताबिक, उत्तराखंड की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए चकबंदी भू-बंदोबस्त और हिमाचल मॉडल की तर्ज पर उत्तराखंड के निर्माण की कल्पना की गई थी।
सपा नेता डॉ. सचान के मुताबिक, मुलायम सिंह यादव चाहते थे कि उत्तराखंड के पर्वतीय अंचलों को आरक्षण मिले, जो जाति नहीं बल्कि आर्थिकी के आधार पर हो। इस आरक्षण के आधार पर 27 फीसदी आरक्षण उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में मिलना था। डॉ. सचान के मुुताबिक, जिसका लाभ केंद्रीय सेवाओं में भी दिया जाना प्रस्तावित था, लेकिन आरक्षण के विरोध में उत्तराखंड में कई लोगों ने अपनी आवाज उठाई, जो राज्य आंदोलन के रूप में तब्दील कर दी गई।
भाजपा के विधायक मुन्ना सिंह चौहान 1996 में सपा के विधायक थे। उनका कहना है कि उन्होंने उत्तराखंड पुलिस फायरिंग की घटनाओं को लेकर ‘नेताजी’ से मतभेद के बाद सपा छोड़ दी थी। उन्होंने बताया कि 1994 से पहले, मुलायम सिंह इस पहाड़ी क्षेत्र में व्यापक रूप से लोकप्रिय नेता थे। उन्होंने उत्तराखंड की अवधारणा रखी और गैरसैंण को राज्य की राजधानी के रूप में चिह्नित किया। राज्य की प्रशासनिक आवश्यकताओं के लिए कार्य किया।
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सूर्यकांत धस्माना ने लंबा समय समाजवादी पार्टी के साथ गुजारा है। उनका कहना है कि यूपी की मुलायम सरकार में लखनऊ अगर यूपी की राजधानी थी तो देहरादून दूसरी अघोषित राजधानी हुआ करती थी। उन्होंने बताया कि विशेष रूप से देहरादून नेताजी का पसंदीदा शहर था। वह अक्सर दून में एक घर बनाना चाहते थे, जो सपना पूरा नहीं हो सका।