केदारनाथ यात्रा मार्ग पर 15 दिन में 16 घोड़ा-खच्चरों की मौत हो चुकी है। पशु चिकित्सकों के अनुसार घोड़ा-खच्चरों को आराम और गर्म पानी नहीं दिया जा रहा है जिससे उनके पेट में गैस बन रही है। बर्फ और पैदल मार्ग पर फिसलकर भी कुछ घोड़ा-खच्चरों की मौत हुई है।
Chardham Yatra: केदारनाथ मार्ग पर 15 दिन में 16 घोड़े-खच्चरों की मौत, टिटनेस संक्रमण से गर्दन हो रही टेढ़ी
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ऐसे में भूसा, गुड़ व चना खाते ही जानवरों के पेट में गैस बन रही है और असहनीय दर्द के कारण उनकी मौत हो रही है। अभी तक ऐसे 10 मामले हो चुके हैं। वहीं, छह घोड़ा-खच्चरों की मौत ढलान पर फिसलने से हुई है। चिकित्सकों के अनुसार, पशुओं का प्रबंधन भी उचित तरीके से नहीं हो रहा है।
टिटनेस संक्रमण से गर्दन हो रही टेढ़ी
घोड़ा-खच्चरों के पैरों में नाल लगाते समय घाव होने से टिटनेस हो रहा है। इस संक्रमण से उनकी गर्दन टेढ़ी हो रही है। अभी तीन घोड़ा-खच्चरों में यह देखा गया है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आशीष रावत ने बताया कि जानवरों में थकान से दर्द और बुखार होने पर पशु चिकित्सक इलाज कर रहे हैं। अलग-अलग कारणों से 70 पशुओं को यात्रा से बाहर कर दिया गया है। वहीं, 95 पशु यात्रा के लिए अयोग्य घोषित किए गए हैं।
पशु क्रूरता में तीन के खिलाफ तहरीर
पशुओं का उचित प्रबंधन नहीं करने, वजन से अधिक बोझ ढोने व बीमार जानवर से काम करवाने पर पशुपालन विभाग ने अभी तक 123 पशुपालकों का चालान कर अर्थदंड वसूला है। वहीं, पशु क्रूरता के तहत तीन पशुपालकों के खिलाफ पुलिस चौकी गौरीकुंड में तहरीर दी जा चुकी है।
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केदारनाथ यात्रा में अभी तक 16 घोड़ा-खच्चरों की मौत हो चुकी है। मौत का प्रमुख कारण पेट में गैस होना व दुर्घटना रहा है। पशुपालकों को नियमित रूप से जानवरों के बेहतर रख-रखाव के लिए प्रेरित किया जा रहा है। - डॉ. आशीष रावत, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी रुद्रप्रयाग।