भू धंसाव का पता लगाने के लिए सोमवार को जल शक्ति मंत्रालय की टीम जोशीमठ रवाना होगी। रविवार देर शाम यह टीम देहरादून पहुंच गई, जिसमें जल शक्ति मंत्रालय के अलावा वन एवं पर्यावरण मंत्रालय सहित विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिक शामिल हैं।
Joshimath Sinking: जोशीमठ में लगातार क्यों हो रहा भू-धंसाव? अध्ययन के लिए दिल्ली से पहुंची वैज्ञानिकों की टीम
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केंद्र से मदद का रास्ता देखेगी एनडीएमए की टीम
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के चार अधिकारी सोमवार को देहरादून पहुंचेंगे। यह अधिकारी आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। सचिव आपदा प्रबंधन डॉ. रंजीत सिन्हा ने बताया कि बैठक में यह तय होगा कि केंद्र किस तरह से जोशीमठ भू धंसाव में सहयोग करेगा।
सीबीआरआई की टीम सीएम के सामने देगी प्रस्तुतिकरण
जोशीमठ में रेट्रोफिटिंग को लेकर सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई) की टीम सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मिलेगी। यहां के वैज्ञानिकों की टीम जोशीमठ में रेट्रोफीटिंग के रास्ते सुझाएगी।
ग्राउंड जीरो पर पहुंचे सीएस
वहीं, आज जोशीमठ के भू धंसाव क्षेत्रों की भयावह तस्वीर देखने के बाद मुख्य सचिव डॉ. सुखवीर सिंह संधु ने प्रभावितों से कहा कि वे किसी भी दशा में कोई जोखिम न लें। ऐसी स्थिति में कभी भी ज्यादा नुकसान हो सकता है। मुख्य सचिव के साथ सचिव मुख्यमंत्री आर मीनाक्षी सुंदरम भी वहां पहुंचे थे। उन्हें गढ़वाल आयुक्त के साथ जोशीमठ में कैंप करने को कहा गया है। सुंदरम ने रविवार से वहां कैंप करना शुरू कर दिया है।
क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया
इस दौरान मुख्य सचिव ने जोशीमठ पहुंचकर भू-धंसाव क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया और जर्जर भवनों का देखा। उनके साथ डीजीपी पुलिस अशोक कुमार व जिलाधिकारी हिमांशु खुराना भी थे। वह मनोहर बाग, सिंग्धार, मारवाडी स्थित जेपी कंपनी प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे और वहां के हाल देखे। मुख्य सचिव ने कहा कि देश के विशेषज्ञ वैज्ञानिकों की टीम द्वारा भू धंसाव कारणों का पता लगाया जा रहा है। इसके कारणों का पता लगने पर जो भी ट्रीटमेंट्स आवश्यक होगा वो यहां पर किया जाएगा। जिलाधिकारी ने मुख्य सचिव को आपदा की स्थिति के बारे में ताजा जानकारी दी।