भू-धंसाव के चलते असुरक्षित हुए जोशीमठ के दो होटलों के पूरी तरह ध्वस्त होने के बाद सिंहधार वार्ड की तस्वीर ही बदल गई है। अब एक छोर से दूसरी छोर तक आसानी से नजर पहुंच रही है। होटलों को तोड़ने का काम पूरा हो गया है। लोक निर्माण विभाग ने यहां से मशीनें और मजदूर भी हटवा दिए हैं।
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जोशीमठ नगर के प्रवेश द्वार से ही सिंहधार वार्ड मोहल्ला शुरु हो जाता है। यहां बदरीनाथ हाईवे पर छह मंजिला मलारी इन और पांच मंजिला माउंट व्यू होटल खड़े थे। दिसंबर में ही भू-धंसाव से यह होटल तिरछे हो गए थे।
जिनको प्रशासन ने करीब 40 दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद ध्वस्त कर दिया। इन होटलों के डिस्मेंटल कार्य में लगभग एक करोड़ रुपये खर्च हुए। होटलों के टूटने से यह पूरा क्षेत्र काफी खुला-खुला नजर आ रहा है।
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जोशीमठ
- फोटो : अमर उजाला
सिंहधार वार्ड में एक छोर से दूसरी छोर तक आसानी से नजर पहुंच रही है। सामने हिमालय का शानदार नजारा भी दिख रहा है। हालांकि होटलों के आसपास का इलाका भू धंसाव से काफी प्रभावित है, जिससे यहां के अधिकांश लोगों को प्रशासन की ओर से नगर पालिका व अन्य भवनों पर शिफ्ट कराया गया है।
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जोशीमठ
- फोटो : अमर उजाला
जिस जगह पर कभी आलीशान होटल खड़े थे, अब वहां मलबे के अलावा कुछ नजर नहीं आ रहा है। होटलों के टूटने से यहां पर हाईवे भी कुछ चौड़ा हो गया है। जिससे बीआरओ को यहां हाईवे दुरुस्त करने में आसानी होगी।
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जोशीमठ के ठीक सामने हिमालय का नजारा
- फोटो : अमर उजाला
करीब डेढ माह तक चले होटलों का ध्वस्तीकरण का काम सीबीआरआई के दिशा निर्देशन में चला। इसमें लोक निर्माण विभाग के 80 से अधिक मजदूर, एक क्रेन, तीन जेसीबी, 12 आरसीसी ब्रेकर, एक डायमंड आरसीसी कटर, 20 टन छमता के 3 टिप्पर वाहन के साथ ही लोनिवि के 13 और सीबीआरआई के 5 इंजीनियर लगे रहे।
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जोशीमठ में बढ़ा भू-धंसाव का दायरा
- फोटो : अमर उजाला
होटलों के ध्वस्तीकरण में एक करोड़ 20 लाख के लगभग खर्च आया है। होटलों के ध्वस्तीकरण के शुरुआत से अंत तक वीडियोग्राफी भी की गई है।