भारतीय क्रिकेट के इतिहास में बतौर विकेटकीपर टेस्ट मैच में शतक लगाने वाले पहले बल्लेबाज बन चुके रुड़की के ऋषभ पंत के घर और मौहल्ले में खुशियों का माहौल है। स्कूल संचालित करने वाले ऋषभ की मां को बधाई देने के लिए आसपड़ोस के लोग उनके घर पहुंचे। फोन पर भी लोगों ने बधाई दी।
बता दें कि, ऋषभ पंत ने अपने टेस्ट करियर का पहला शतक जड़ा है। ऋषभ पंत ने इस मामले में धोनी को भी पीछे छोड़ दिया है। पंत ने आदिल राशिद की गेंद पर छक्का लगाकर अपना शतक पूरा किया। सूत्रों की मानें तो इसके साथ ही ऋषभ पंत बतौर विकेटकीपर इंग्लैंड में शतक लगाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बन गए। जानकारी के अनुसार, इससे पहले धोनी ने इंग्लैंड में सबसे ज्यादा 92 रनों की पारी खेली थी।
इस खुशी के मौके पर ऋषभ पंत की मां सरोज पंत ने कहा कि उनके लिए यह सबसे बड़ी खुशी का पल है। वहीं बहन साक्षी पंत ने भी इस उपलब्धि पर अपने भाई को बधाई दी। रुड़की से सटे ढंडेरा निवासी ऋषभ पंत ने क्रिकेट जगत में नया मुकाम हासिल कर क्षेत्रवासियों की झोली में खुशियां भर दी है। उनके घर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। पड़ोसियों में भी ऋषभ की उपलब्धियों को लेकर खासा उत्साह है। यहां रहने वाले ऋषभ के परिवार के नजदीकी एवं भाजपा मंडल उपाध्यक्ष सतीश नेगी ने बताया कि जैसे ही ऋषभ ने टेस्ट मैच में शतक जड़ा तो वे तुरंत ऋषभ के घर की ओर दौड़े और उनकी मां को बधाई दी।
इस दौरान मोहल्ले के कई लोग भी उनके घर पहुंचे। साथ ही कईयों ने फोन कर इसकी बधाई दी। ऋषभ की मां सरोज पंत पास ही में न्यू मार्डन नाम से एक स्कूल भी चलाती है। उन्होंने कहा कि बेटे की उपलब्धि पर उन्हें नाज है। ऋषभ ने न केवल परिवार का बल्कि राज्य और देश का नाम रोशन किया है। वहीं बहन साक्षी भी खुशियों से लबरेज हैं। मोहल्लेवासी राजन भार्गव, आनंद रावत, राजेंद्र रावत, वार्ड सदस्य बीना नेगी, प्रदीप बुड़ाकोटी, विरेंद्र बिष्ट, हेमंत बर्थवाल ने कहा कि ऋषभ पंत पर नाज है। उसकी वजह से देश में क्षेत्र का नाम रोशन हो रहा है।
राज्य क्रिकेट संचालन समिति के सदस्य महिम वर्मा ने कहा कि, इससे उत्तराखंड के युवा क्रिकेटरों को भी प्रेरणा मिलेगी। हाल ही में रुड़की के युवा विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत ने सैयद मुश्ताक अली टी-20 ट्रॉफी टूर्नामेंट में हिमाचल प्रदेश के खिलाफ मुकाबले में महज 32 गेंदों में शतक जड़कर तहलका मचा दिया था। यह टी-20 फॉर्मेट में किसी भी बल्लेबाज द्वारा लगाया गया दूसरा सबसे तेज शतक था।