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यूं ही नहीं उत्तराखंड है देवभूमि, आज भी यहां मिलती है भगवान ब्रह्मा की 'निशानी'
Tue, 05 Jul 2016 03:21 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
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Updated Tue, 05 Jul 2016 03:21 PM IST
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brahma kamal the lotus of lord brahma
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एक मान्यता के मुताबिक भगवान विष्णु का जन्म ब्रह्म कमल से हुआ था। यह ब्रह्म कमल देवभूमि के पहाड़ों पर आज भी उगता है। यह फूल देवभूमि का स्वर्ग कही जाने वाली फूलों की घाटी में उगता है।
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ब्रह्मकमल ऊंचाई वाले क्षेत्रों का एक दुर्लभ फूल है जो कि सिर्फ हिमालय, उत्तरी बर्मा और दक्षिण-पश्चिम चीन में पाया जाता है। धार्मिक और प्राचीन मान्यता के अनुसार ब्रह्म कमल को इसका नाम उत्पत्ति के देवता ब्रह्मा के नाम पर मिला है।
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इसका वैज्ञानिक नाम साउसिव्यूरिया ओबलावालाटा है। ब्रह्मकमल एस्टेरेसी कुल का पौधा है। इसके नजदीकी रिश्तेदार हैं सूर्यमुखी, गेंदा, गोभी, डहलिया, कुसुम एवं भृंगराज जो इसी कुल के अन्य प्रमुख पौधे।
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ब्रह्मकमल कमल की अन्य प्रजातियों के विपरीत पानी में नहीं वरन धरती पर खिलता है। सामान्य तौर पर ब्रह्मकमल हिमालय की पहाड़ी ढलानों या 3000-5000 मीटर की ऊंचाई में पाया जाता है। इसकी सुंदरता तथा दैवीय गुणों से प्रभावित हो कर ब्रह्मकमल को उत्तराखंड का राज्य पुष्प भी घोषित किया गया है।
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वर्तमान में भारत में इसकी लगभग 60 प्रजातियों की पहचान की गई है जिनमें से 50 से अधिक प्रजातियाँ हिमालय के ऊँचाई वाले क्षेत्रों में ही पाई जाती हैं। उत्तराखंड में यह विशेषतौर पर पिण्डारी से लेकर चिफला, रूपकुंड, हेमकुण्ड, ब्रजगंगा, फूलों की घाटी, केदारनाथ तक पाया जाता है।
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