क्रिकेट के मैदान पर कामयाबी के झंडे गाड़ चुके टीम इंडिया के पूर्व कप्तान एमएस धोनी ने 39 साल की उम्र में अचानक से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया है। उन्होंने शनिवार को एक भावुक पोस्ट के जरिए इस बात की जानकारी दी। धोनी ने अपने इंस्ट्राग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया जिसमें उनकी कई सारी यादें शामिल हैं। जिस तरह से धोनी ने आज अचानक से संन्यास का फैसला लेकर सभी को चौंका दिया है, कुछ इसी तरह से उन्होंने क्रिकेट के मैदान में भी हैरान करने वाले फैसले लिए हैं। आइए धोनी के ऐसे ही कुछ फैसलों को जानते हैं जिसने भारतीय क्रिकेट को बदल दिया।
धोनी ने सबसे पहले 2011 वर्ल्ड कप में अपने फैसले से सभी को चौंकाया था। वे उस वर्ल्ड कप के दौरान लय में नहीं थे, लेकिन फाइनल मुकाबले में वो युवराज सिंह से पहले पांचवें नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे। जबकि युवराज ने पूरे टूर्नामेंट के दौरान बेहतरीन खेल दिखाया था। हालांकि धोनी का यह फैसला सही साबित हुआ। भारतीय कप्तान ने 79 गेंदों पर नाबाद 91 रन बनाए, जिसमें आठ चौके और दो छक्के शामिल थे। धोनी ने दबाव में बेहतरीन पारी खेली और भारतीय टीम को 275 रन के लक्ष्य तक पहुंचाकर विश्व चैंपियन बनाया।
धोनी ने दूसरा सबसे हैरान करने वाला फैसला पहले टी-20 क्रिकेट वर्ल्डकप के फाइनल में लिया था। भारत ने 2007 विश्व टी-20 के फाइनल में पाकिस्तान को 158 रनों का लक्ष्य दिया था। पाकिस्तान को आखिरी ओवर में जीत के लिए 13 रनों की दकरकार थी और धोनी ने जोगिंदर शर्मा के हाथों में गेंद सौंप दी। जोगिंदर शर्मा ने कमाल दिखाते हुए मिस्बाह-उल-हक का विकेट चटकाकर लक्ष्य का बचाव किया। भारत पांच रन से फाइनल जीत टी-20 का पहला विश्व चैंपियन बना था। अनुभवहीन शर्मा पर भरोसा करने का धोनी का निर्णय एक मास्टरस्ट्रोक था।
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रोहित धोनी
- फोटो : social media
टीम इंडिया के मौजूदा स्टार सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा एकदिवसीय में मध्यक्रम में खेलते हुए लगातार असफल हो रहे थे। धोनी ने उन्हें सलामी बल्लेबाज के रूप में उतारा और उसके बाद तो रोहित ने बतौर ओपनर तूफान ही मचा दिया। रोहित ने अपने एकदिवसीय करियर में तीन दोहरे शतक लगाए हैं और यह उपलब्धि हासिल करने वाले एकमात्र क्रिकेटर हैं।
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महेंद्र सिंह धोनी और सुरेश रैना
- फोटो : सोशल मीडिया
मुरली विजय, रविंद्र जडेजा और सुरेश रैना के शुरुआती दिनों में खराब प्रदर्शन के बावजूद भी धोनी ने इन खिलाड़ियों को बैक किया और भरोसा जताया। तीनों ही खिलाड़ियों ने धोनी की उम्मीद पर पानी नहीं फेरा। विजय ने टेस्ट क्रिकेट में सलामी बल्लेबाज के रूप में खुद को साबित किया और रैना काफी समय तक भारतीय मध्यक्रम का अहम हिस्सा रहे। जडेजा अब तीनों प्रारूपों में भारतीय टीम का एक अहम हिस्सा हैं।