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विकास की साझा राह पर चल पड़े हैं भारत-बांग्लादेश

Fri, 25 Oct 2019 02:10 PM IST
Ravishankar Ravi रविशंकर रवि
Updated Fri, 25 Oct 2019 02:10 PM IST
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India and Bangladesh are on the sodality path of development
पूर्वोत्तर के विकास में बांग्लादेश से बेहतर रिश्ते का दूरगामी असर हो सकता है। पूर्वोत्तर राज्यों को बांग्लादेश के बंदरगाहों का लाभ मिल सकता है। - फोटो : पीटीआई

बांग्लादेश से होने वाली अवैध घुसपैठ को लेकर दशकों तक भारत और बांग्लादेश के बीच नफरत की स्थिति रही और अवैध नागरिकों को वापस बांग्लादेश भेजने के लिए लंबे समय तक आंदोलन चला तथा अवैध नागरिकों की पहचान के लिए राष्ट्रीय नागरिक सूची के अद्यतन का काम पूरा हुआ। लेकिन दूसरी तरफ से साझा विकास के लिए भारत और बागंलादेश के बीच नजदीकियां भी बढ़ी हैं। यह माना जा रहा है कि भारत-बांग्लादेश के बीच बढ़ते व्यापारिक संबंध का सबसे अधिक लाभ पूर्वोत्तर को मिलेगा। पूर्वोत्तर के आर्थिक विकास में बांग्लादेश बेहतर भूमिका निभा सकता है। उस दिशा में 22 और 23 अक्टूबर को गुवाहाटी में संपन्न दोनों राज्यों के हितधारकों का सम्मेलन महत्वपूर्ण है।

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पूर्वोत्तर के विकास में बांग्लादेश से बेहतर रिश्ते का दूरगामी असर
पूर्वोत्तर के विकास में बांग्लादेश से बेहतर रिश्ते का दूरगामी असर हो सकता है। पूर्वोत्तर राज्यों को बांग्लादेश के बंदरगाहों का लाभ मिल सकता है। वे समुद्री मार्ग से बांग्लादेश के बंदरगाहों तक माल मंगा सकते हैं और वहां से सड़क के रास्ते माल ला सकते हैं। ब्रह्मपुत्र के नदी मार्ग का भी व्यापार के लिए बेहतर उपयोग हो सकता है। यह सड़क परिवहन की तुलना में सस्ता भी है।
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पूर्वोत्तर को रेल मार्ग के माध्यम से भी बांग्लादेश से जोड़ने पर सहमति बन रही है। यदि भारत बांग्लादेश के बंदरगाहों तक रेल नेटवर्क का विस्तार कर देता है तो पूर्वोत्तर के लिए बहुत अच्छा होगा। आजादी के बाद पूर्वोत्तर भारत और शेष भारत के बीच भौगोलिक दूरी बढ़ गई है। देश के अन्य हिस्से से पूर्वोत्तर तक माल लाना महंगा होता है। लेकिन बांग्लादेश के माध्यम से पूर्वोत्तर की भौगोलिक दूरी कम हो जाएगी।
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अच्छी बात है कि पूर्वोत्तर राज्यों और बांग्लादेश के बीच व्यापारिक संबंध पर नए सिरे से पहल आरंभ हो गई है। इसी संभावना को देखते हुए बांग्लादेश ने गुवाहाटी में अपना उच्चायुक्त कार्यालय स्थापित किया है। इसी संभावना को देखते हुए गत 22-23 अक्टूबर को भारत और बांग्लादेश के हितधारकों का सम्मेलन हुआ और उसमें कई संभावनाओं को रेखांकित किया गया। उनमें  ब्रह्मपुत्र का उपयोग परिवहन के रूप करना शामिल है। ब्रह्मपुत्र का उपयोग दोनों देश के व्यापार के लिए फायदेमंद है। सम्मेलन में दोनों देशों ने व्यावसायिक गतिविधयों को बढ़ाने और इससे जुड़ी समस्याओं को निपटाने के लिए एक टास्क फोर्स का गठन का फैसला लिया है।

 

India and Bangladesh are on the sodality path of development
भारत और बांग्लादेश के बीच अवैध घुसपैठ के सवाल पर लंबे समय तक संबंध खराब रहे। जबकि असम के विकास में बांग्लादेश मददगार हो सकता है। - फोटो : ANI

भारत और बांग्लादेश के बीच अवैध घुसपैठ के सवाल पर लंबे समय तक संबंध खराब रहे। जबकि असम के विकास में बांग्लादेश मददगार हो सकता है। भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध बेहतर होने के बाद व्यापार और संपर्क सुधरे हैं। इसका लाभ असम को उठाना चाहिए।  हितधारकों के सम्मेलन में पर्वोत्तर के राज्यों और बांग्लादेश के बीच आवागमन के बेहतर साधन और व्यावसायिक संबंधों को प्रगाढ़ बनाते हुए विकास की नई बुलंदियों को छूने पर दोनों देशों के नेताओं और अधिकारियों के बीच विचार-विमर्श हुआ।

असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल मानते हैं कि बांग्लादेश के साथ असम रिश्ता साझा संस्कृति, विरासत, साहित्य और भाषा पर आधारित है। बांग्लादेश और भारत के लोगोें के बीच जो रिश्ता है वह गर्मजोशी और स्नेह से भरा है। महान गायक डॉ. भूपेन हजारिका का गीत ‘‘गंगा आमार मां, पद्मा आमार मां’’ पूरी तरह से भारत के पूर्वोत्तर सीमा पर रहने वाले लोगों की पहचान और सांस्कृतिक बंधन के अविभाज्य रिश्तों का प्रतीक है। डॉ. हजारिका का गीत ‘जॉय जॉय नबजातो बांग्लादेश’ जो उन्होंने बांग्लादेश के एक संप्रभु गणराज्य के रूप में उभरने पर लिखा था। यह गीत बांग्लादेश के प्रति असम के लोगों की भावनाओं की गहनता के बारे में संकेत देता है।

इसी तरह, कला और संस्कृति के क्षेत्र में बांग्लादेश की कई दिग्गज हस्तियों के बीच, जो नाम तुरंत हमारे दिमाग में आते हैं, वे कवि काजी नजरूल इस्लाम और प्रसिद्ध गायक रूना लैला हैं। उनके गीत और कविताएं हमारे संबंध को मजबूत करते हैं और अधिक से अधिक सद्भावना उत्पन्न करते हैं। कई महान असमियां हस्तियों ने ढाका विश्वविद्यालय और सिलहट के मुरारी चंद कॉलेज में भी अध्ययन किया। असमिया कलागुरु बिष्णु प्रसाद राभा ढाका में पैदा हुए थे।

बांग्लादेश के साथ बेहतर व्यापारिक संबंध का उपयोग करने का वक्त आ गया है। पूर्वोत्तर राज्यों के लिए यह एक अवसर है। इसके लिए भारत-बांग्लादेश सीमा पर बुनियाद सुविधाओं के साथ बेहतर सड़क संपर्क भी जरूरी है। सीमा हाट का विस्तार इन दो देशों के सीमावर्ती इलाके के लोगों की आर्थिक हालत को सुधारने में मदद कर सकते हैं।

(लेखक दैनिक पूर्वोदय के संपादक और पूर्वोत्तर मामले के जानकार हैं।)

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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