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लॉक डाउन के 21 दिन: पलायन कर रहे मजदूरों का रखना होगा ध्यान, करनी होगी निगरानी

Tue, 31 Mar 2020 11:58 AM IST
मोहम्मद तौहिद आलम मोहम्मद तौहिद आलम।
मोहम्मद तौहिद आलम। Published by: मोहम्मद तौहिद आलम Updated Tue, 31 Mar 2020 11:58 AM IST
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coronavirus covid 19 government failed to lock down chaos and hunger amid situation
आनंद विहार, नोएडा, गाजियाबाद में शनिवार की रात जो दृश्य देखने को मिला वह काफी भयावक है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देशभर में लॉक डाउन की घोषणा के बाद आनंद विहार, नोएडा, गाजियाबाद में शनिवार की रात जो दृश्य देखने को मिला वह काफी भयावक है। इसके पीछे सिस्टम की विफलता के साथ-साथ लोगों की मजबूरी, डर, हताशा और लापरवाही भी है। अगर समय रहते सरकार ने उचित कदम उठा लिया होता तो आज यह भयावक स्थिति देखने को नहीं मिलती।

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देश के विभिन्न हिस्सों से अपने गृह राज्य के लिए पैदल सैकड़ों किलोमीटर की सफर पर निकले लोगों की तस्वीर देख कर दिल दहल उठता है। किसी के सिर पर पोटली है तो किसी पर बोरे। किसी के पीठ पर बैग लटके हैं तो किसी के गोद में कोई मासूम। इन्हें कोरोना का भय नहीं है। ये बस चाहते हैं किसी तरह अपने घर पहुंच जाएं।
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इनको देख कर एक बार के लिए कोई इन्हें कोस तो सकता है, लेकिन इनकी हकीकत जानने के बाद हर किसी के दिल से आह निकल पड़ेगी। ऐसे ही कोई अपने सिर पर कफ़न बांध कर नहीं निकल जाता। ऐसा करने से पहले हालात ने उसे 100 बार मार दी होती है।
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रास्ते में पूछने पर इनके मुंह से यहीं निकलता है कि अगर हम कोरोना से बच भी गए तो हमारी हालात हमें मार डालेेंगे।  सब चाहते हैं मौत भी हो तो अपनी दर पर। सैकड़ों, हजारों किलोमीटर दूर पैदल पूरे परिवार के साथ गांव की ओर निकल पड़े ये लोग कुछ दिन पहले तक जिस शहर की जान हुआ करते थे आज उसी शहर ने उन्हें ठुकरा दिया। किसी को मकान मालिक ने घर से निकाल दिया है तो किसी के पास इतने पैसे नहीं है कि वह 14 अप्रैल तक गुज़र-बसर कर सके।

24 मार्च को जैसे ही पता चला कि प्रधानमंत्री...

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प्रधानमंत्री द्वारा 21 दिन के लिए पूरे देश में लॉक डाउन की घोषणा करते ही जो जहां था वहीं से अपनी मंजिल के लिए निकल पड़ा

24 मार्च को जैसे ही पता चला कि प्रधानमंत्री आज फिर से रात आठ बजे कोरोना पर देश को संबोधित करेंगे लोगों की धड़कने तेज हो गई। सबको इस बात का आभास हो गया कि अब कुछ बड़ा होने वाला है। हुआ भी वहीं। 

जो जहां था वहीं बेचैन हो गया। प्रधानमंत्री द्वारा 21 दिन के लिए पूरे देश में लॉक डाउन की घोषणा करते ही जो जहां था वहीं से अपनी मंजिल के लिए निकल पड़ा तो जो अपने गांव कस्बे में था राशन स्टॉक करने में जुट गया। मैं उस वक्त ऑफिस में था और प्रधानमंत्री का संबोधन मोबाइल फोन पर ही सुन रहा था।

अभी उनका संबोधन खत्म भी नहीं हुआ था कि मेरा मोबाइल फोन बज उठा। मैं कॉल कट कर फिर से भाषण सुनने लगा। तभी दोबारा से फ़ोन बज उठा। मैंने जैसे ही फोन उठाया उधर से मेरे मामा के लड़के ने पूछा "क्या अब 21 दिन तक कोई दुकान नहीं खुलेगी? यहां राशन खरीदने के लिए दुकानों पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। घर वाले भी सामान स्टॉक करने के लिए कह रहे हैं"।

मैंने उसे तत्काल समझाया कि ऐसा कुछ नहीं है, जरूरी के सारे सामान मिलते रहेंगे। राशन, सब्जी, दवा वगैरह लेने जाने पर कोई रोक नहीं होगा। लॉक डाउन जीवन बचाने के लिए है तो सरकार किसी को भूखा क्यों मरने देगी? इतना कह कर मैंने फ़ोन रख दिया और फिर से प्रधानमंत्री का संबोधन सुनने लगा।

रास्ते में ये लोग बिस्किट और केला खाकर जैसे तैसे अपने सफर को पूरा करने लगे...

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एक दो दिन तक तो लॉक डाउन काफी हद तक सफल रहा

संबोधन खत्म होते ही मुझे बिहार के किशनगंज जिला निवासी शकील जमाली अंकल का फोन आया। वे फ़िलहाल बिहार के सुपौल जिले में सरकारी सेवा में तैनात हैं। उन्होंने कहा "तौहिद मैं यहां अकेले फंस गया हूं, सभी लोग जा चुके हैं, ऑफिस भी बंद हो गया, क्या मेरे यहां से निकलने का कोई बंदोबस्त हो पाएगा"? उनकी आवाज में घबराहट थी।

मुझे एक पल के लिए चिंता हुई कि 55 साल के उम्र में घर पर खुद से पानी तक नहीं पीने वाला आदमी एक कमरे में जहां खाने पीने का भी कोई इंतजाम नहीं है कैसे रह पाएगा? मैंने कहा ठीक है अंकल मैं देखता हूं अगर कोई रास्ता निकला तो बताऊंगा। उस वक़्त वो पहली समस्या थी जिसे सुनकर मैं भी घबरा गया। लेकिन वो समस्या की सिर्फ एक बानगी भर थी।

एक दो दिन तक तो लॉक डाउन काफी हद तक सफल रहा। इक्का-दुक्का लोग सड़क पर बहुत जरूरी होने पर निकलते दिखे। लेकिन जैसे-जैसे दिन बीतता गया देशभर से लोगों के पैदल कूच करने की खबरें आने लगी। कोई गुजरात से तो कोई दिल्ली से तो कोई नोएडा-गाजियाबाद से पैदल ही अपने गंतव्य के लिए निकल पड़ा।

रास्ते में ये लोग बिस्किट और केला खाकर जैसे तैसे अपने सफर को पूरा करने लगे। मीडिया में खबरें आते ही लोग इनकी मदद को आगे आने लगे और रास्ते में इन्हें खाने पीने से लेकर थोड़ी-थोड़ी दूरी पर वाहन भी मिलने लगे जिससे इनका सफर थोड़ा आसान हुआ। लेकिन शुक्रवार को अचानक से लोगों का धैर्य जवाब दे गया।

शनिवार को एक दिन में पहली बार देश में 200 मामले सामने आए...

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लोग अचानक घरों से निकल पड़े

महज एक सप्ताह पहले प्रधानमंत्री की एक अपील पर सुबह सात बजे से रात नौ बजे तक खुद को घरों में कैद कर लेने वाले लोगों में अनिश्चितता और भय घर कर गया। लोग अचानक घरों से निकल पड़े। नोएडा, गाज़ियाबाद, आंनद विहार में इस कद्र भीड़ उमड़ पड़ी कि आनन फानन में सरकार को इनके लिए वाहनों के इंतजाम करने पड़ गए। अब इस भीड़ की तस्वीर लोगों को डराने लगी है।

सभी का यहीं कहना है कि अगर इसमें से किसी एक को भी कोरोना हो गया तो इसका खामियाजा पूरे देश को भुगतना पड़ सकता है। इस डर के पीछे की एक वजह यह भी है कि हमारे यहां स्वास्थ्य व्यवस्था बहुत लचर है ख़ासकर यूपी और बिहार की। ऊपर से तुर्रा ये है कि इस भीड़ में सबसे ज्यादा लोग यूपी बिहार के ही है।

शनिवार को एक दिन में पहली बार देश में 200 मामले सामने आए। उसके बावजूद भारत के लिए राहत की बात यह है कि अभी भी कोरोना वायरस यहां थर्ड स्टेज में नहीं पहुंचा है। लोगों में डर इसलिए भी घर कर गया है कि स्वास्थ्य सुविधा के मामले में हमसे काफी बेहतर होने के बावजूद इटली, अमेरिका, स्पेन इस वैश्विक महामारी के आगे नतमस्तक है।

कई सर्वे और रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि अगर भारत में कोरोना थर्ड स्टेज में पहुंचा तो यहां स्थिति और भी ज़्यादा भयावक हो सकती है। अगर ऐसा हुआ तो इसके लिए इन लोगों के साथ-साथ काफी हद तक केंद्र सरकार भी जिम्मेदार होगी। सरकार ने अगर समय रहते कड़ा रुख अपनाया होता तो आज यह स्थिति नहीं होती।

विदेश से लौटने वाले ये लोग जहां गए रास्ते में अपने साथ कई लोगों को संक्रमित करते गए

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बॉलीवुड सिंगर कनिका कपूर विदेश से लौटने के बाद लखनऊ में हाई प्रोफाइल पार्टी में गई

भारत में कोरोना का पहला मामला 30 जनवरी को सामने आया। इसके पहले यह चीन और अन्य देशों में तबाही मचा चुका था, उसके बावजूद सरकार खतरे से अंजान बनी रही। कोरोना से संक्रमित देशों से प्रवासी भारतीयों का आना जारी रहा। एयरपोर्ट पर थर्मल स्क्रीनिंग में ढील बरती गई।

इसी का नतीजा है कि बॉलीवुड सिंगर कनिका कपूर विदेश से लौटने के बाद लखनऊ में हाई प्रोफाइल पार्टी में गई जिसके कारण कई नेताओं व मंत्रियों को सेल्फ क्वारन्टीन होना पड़ा। विदेश से लौटने वाले लोगों को आइसोलेट करने की व्यवस्था भी सरकार नहीं कर सकी। ना ही टेस्ट के लिए वृहत पैमाने पर सैंपल लिए गए।

विदेश से लौटने वाले ये लोग जहां गए रास्ते में अपने साथ कई लोगों को संक्रमित करते गए। चूंकि कोरोना की पुष्टि होने में लगभग हफ्ते भर का समय लगता है और एक आदमी औसतन ढाई से तीन लोगों को संक्रमित कर सकता है इस आधार पर हम कह सकते हैं कि आने वाले दिनों में भारत में और भी ज्यादा मामले सामने आ सकते हैं।

इससे इतर सरकार पहला मामला आने के लगभग 50 दिन बाद तक वेंटिलेटर और मास्क का निर्यात करती रही यह जानते हुए भी की कोरोना से लड़ने में ये दोनों काफी अहम हथियार साबित हैं। अब इन हालात से निपटने के लिए सरकार को चाहिए कि 14 अप्रैल से पहले तक सभी संक्रमितों को चिन्हित कर उनका सैंपल लेकर इन्हें क्वारन्टीन या आइसोलेट करे। अगर सरकार ऐसा करने में विफल होती है तो देशवासियों को न सिर्फ लंबी अवधि के लिए लॉक डाउन झेलना पड़ सकता है बल्कि भारत में स्थिति अमेरिका, इटली चीन और ईरान से भी बद्दतर हो जाएगी।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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