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धान के दानों से सजेगी भाइयों की कलाई: मुंगेली की महिलाओं ने धान, धनिया और नींबू के बीज से बनाई अनोखी राखियां

Thu, 27 Aug 2026 04:21 PM IST
बिलासपुर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: बिलासपुर ब्यूरो Updated Thu, 27 Aug 2026 04:21 PM IST
सार

मुंगेली की महिलाओं ने धान, धनिया और नींबू के बीज जैसी प्राकृतिक सामग्री से अनोखी राखियां तैयार की हैं। इन राखियों में छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति की झलक के साथ महिलाओं के हुनर और आत्मनिर्भरता की कहानी भी नजर आती है।

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On Rakshabandhan, women of Mungeli made unique Rakhis from paddy, coriander and lemon seeds
महिलाओं ने धान, धनिया और नींबू के बीज से बनाई अनोखी राखियां - फोटो : अमर उजाला
रक्षाबंधन का त्योहार नजदीक आते ही बाजार रंग-बिरंगी राखियों से सज गए हैं। इस बीच मुंगेली जिले के ग्राम फुलवारी की महिलाओं ने अपनी अनोखी कला से सभी का ध्यान खींचा है। यहां जय मां सरस्वती महिला स्व सहायता समूह की महिलाओं ने धान, धनिया बीज, नींबू के बीज और अन्य प्राकृतिक सामग्री से खूबसूरत राखियां तैयार की हैं। इन राखियों में छत्तीसगढ़ की कृषि और ग्रामीण संस्कृति की खास झलक देखने को मिल रही है।
On Rakshabandhan, women of Mungeli made unique Rakhis from paddy, coriander and lemon seeds
राखियों में कृषि और ग्रामीण संस्कृति की खास झलक देखने को मिल रही है। - फोटो : अमर उजाला

बिहान योजना से जुड़ी इन महिलाओं ने पारंपरिक सोच से हटकर स्थानीय संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए राखियों के साथ हार और दूसरे आकर्षक आभूषण भी बनाए हैं। धान से तैयार राखियां देखने में बेहद खूबसूरत होने के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की पहचान से भी जुड़ी हुई हैं। यही वजह है कि बाजार में पहुंचते ही इन राखियों ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचना शुरू कर दिया है।

On Rakshabandhan, women of Mungeli made unique Rakhis from paddy, coriander and lemon seeds
जय मां सरस्वती महिला स्व सहायता समूह की महिलाएं बना रही राखियां - फोटो : अमर उजाला
महिलाओं के मुताबिक, बिहान योजना ने उन्हें अपने हुनर को पहचान दिलाने और उसे रोजगार से जोड़ने का अवसर दिया है। घर और गांव में आसानी से उपलब्ध प्राकृतिक सामग्री का इस्तेमाल कर वे ऐसे उत्पाद तैयार कर रही हैं, जिन्हें लोग पसंद कर रहे हैं। इससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी भी हो रही है और आत्मनिर्भर बनने का रास्ता मजबूत हो रहा है।
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बिहान योजना ने उन्हें अपने हुनर को पहचान दिलाने और उसे रोजगार से जोड़ने का अवसर दिया है। - फोटो : अमर उजाला
धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में धान अब सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रह गया है। मुंगेली की महिलाओं ने धान के दानों को रचनात्मक रूप देकर इसे भाई-बहन के प्रेम के त्योहार से जोड़ दिया है। इन राखियों में सिर्फ प्राकृतिक सुंदरता ही नहीं, बल्कि महिलाओं की मेहनत, हुनर और आत्मनिर्भरता की कहानी भी दिखाई देती है। रक्षाबंधन पर ये अनोखी राखियां छत्तीसगढ़ की मिट्टी और संस्कृति की खुशबू को भी लोगों तक पहुंचा रही हैं।
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