युग में परिवर्तन लाने का दायित्व हम सभी का है। यह जिम्मेदारी हम सबको लेनी चाहिए। पॉजिटिव चेंज से हम स्वर्णिम युग ला सकते हैं। राम राज्य ला सकते हैं। रामराज्य लाने के लिए भी हमें राम बनना पड़ेगा, सीता बनना पड़ेगा। विश्व गुरु बनने के लिए इस दिशा में कदम रखना पड़ेगा। ये बातें रायपुर के शांति सरोवर स्थित प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के पॉजिटिव चेंज ईयर 2023 कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कही।
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का सम्मान करते सीएम भूपेश बघेल
- फोटो : सोशल मीडिया
'कुछ समय इलेक्ट्रॉनिक गैजेट से दूर रहकर बिताएं'
आज कल सब टेक्नोलॉजी के युग में जी रहे हैं और बच्चे भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बात करते हैं, लेकिन यह भी जरूरी है कि हम दिन का कुछ समय इलेक्ट्रॉनिक गैजेट से दूर रहकर बिता सकते हैं। साइंस, टेक्नोलॉजी के साथ-साथ हम अध्यात्म को भी जोड़ें तो जिंदगी आसान हो जाएगी। इस मकसद से परमपिता परमात्मा धरती पर हमें भेजे हैं। केवल रोटी, कपड़ा, मकान, ज्यादा से ज्यादा इनकम करना यह जिंदगी का लक्ष्य नहीं है। जिंदगी को कैसे, किस तरीके से जिए, यह महत्वपूर्ण है। आनंद प्रेम से जिए। हमारे यह रास्ता उतना कठिन नहीं है, स्वस्थ जीने के लिए यह बहुत जरूरी है। सबकी जिंदगी में थोड़ी कठिनाई है, लेकिन जिंदगी कठिन रास्तों पर चलकर समझ हो जाती है।
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की अगवानी करते राज्यपाल, सीएम भूपेश बघेल और मेयर ढेबर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
'हमेशा पॉजिटिव सोच के बीच रहें'
राष्ट्रपित द्रौपदी मुर्म ने कहा कि लोगों के बीच में रहिए जो आपको सही चलने की प्रेरणा दे सकें और आगे बढ़ाने में भी आपका साथ दे सके। जीवन को सही-सही ढंग से जिए तो हर पल खूबसूरत और यादगार बना सकते हैं। बदलाव लाना आसान नहीं होता, लेकिन प्रबल शक्ति से किए गए कार्य से इसे आसान बनाया जा सकता है।
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राजभन में पौधरोपण करते 'राष्ट्रपित द्रौपदी मुर्म और राज्यपाल
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
राष्ट्रपति की अपील
मेरी भावी पीढ़ी के लोगों, दोस्तों, अध्यापकों और समाजसेवकों से अपील है कि वह इन बच्चों के मानसिकता को समझ कर उनकी सहायता करें। मैं सभी सभी से कहना चाहूंगी अगर बच्चों को पढ़ाई का कंपटीशन का प्रेशर है, तो पॉजिटिव थिंकिंग से दूर किया जा सकता है। उनके इस आत्मविश्वास बढ़ाया जा सकता है। उनका ऐसे कार्य में उनकी मदद करें, जितना उनका करियर जरूरी है, उतना ही जरूरी है कि जीवन की चुनौतियों का डटकर उसका सामना करें। इसीलिए उनके तैयारी करने में सहयोग करना बहुत जरूरी होता है। दे
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महंत घासीदास संग्रहालय का अवलोकन करतीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
देश के भावी पीढ़ी बच्चे हैं। इन बच्चे की आधे अधूरी जिंदगी को बचा सकते हैं। दूसरों से प्रेरणा लेनी चाहिए, अच्छी बात है। अपनी रुचि, अपने-अपने शक्ति को पहचान कर सही दिशा का चुनाव करना जरूरी है। इसके लिए खुद से निरीक्षण करना जरूरी है। क्या करूं क्या ना करूं, क्या पॉजिटिव क्या निगेटिव है। क्योंकि आज का युग कंप्यूटर का युग है। साइंटिफिक युग है। अभी के बच्चे सार्फ मन के होते हैं। इसलिए उन पर ध्यान देना जरूरी है।