आज कल पढ़ाई पूरी होते ही नौकरी तो हर कोई करता है, लेकिन अपने सपनों को साकार कुछ ही लोग कर पाते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि देश में कई लोग आर्थिक बीमारियों के शिकार हैं। लोगों का खर्चा पूरा नहीं हो पाता है। इसलिए अगर आप बिना किसी आर्थिक विपदा के जीवन व्यतीत करना चाहते हैं, तो आपको ये जानना होगा कि ज्यादा पैसे कमाने के बावजूद क्यों आप पैसे नहीं बचा पाते हैं। बीते सालों के मुकाबले अब युवा निवेश कम करते हैं और खर्च ज्यादा। ऐसे में फाइनेंशियल प्लानिंग बेहद अहम है।
कोरोना वायरस महामारी ने लोगों को बहुत परेशान और चिंतित रखा है। इसकी वजह से सभी क्षेत्रों में नुकसान हुआ है। निवेशक भी मुनाफे को लेकर परेशान हैं। मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए बचत करना आसान नहीं है। कब उनकी सारी सैलरी खर्च हो जाती है पता ही नहीं चलता। कम पैसे खर्च करने की पूरी कोशिश के बावजूद मध्यमवर्गीय परिवार पैसा नहीं बचा पाते। आइए जानते हैं फाइनेंशियल प्लानिंग से जुड़ी कुछ खास बातें।
पैसे का सही इस्तेमाल न करना आर्थिक चिंता की निशानी
अपने पैसे का सही इस्तेमाल न करना आर्थिक चिंता की निशानी हो सकता है। उदाहरण के तौर पर, आजकर क्रेडिट कार्ड लगभग हर किसी के पास है, लेकिन वो उसका बिल आसानी से नहीं भरते। पैसे होने के बावजूद वे क्रेडिट कार्ड का बिल भरने में देरी करते हैं। यह 'फाइनेंशियल डिनाइल' की निशानी है। यानी पैसा होने के बाद भी उसे सही जगह पर खर्च ना करना। क्रेडिट कार्ड के बिल की ही तरह कई लोग टैक्स जैसे अन्य जरूरी भुगतान करने में भी हिचकिचाते हैं। इतना ही नहीं, पैसे होने के बावजूद कहीं निवेश ना करना और बैंक में पैसा जमा करके रखना भी फाइनेंशियल डिनाइल की ही निशानी है। इसलिए यदि आप फाइनेंशियल प्लानिंग करेंगे, तो आपको सही समय पर पैसे खर्च करने में मदद मिलेगी। इससे आप भविष्य में आने वाले आर्थिक संकट से भी बच जाएंगे।
जरूरी खर्चे को फिजूल मानना सही नहीं
आजकल के युवा या तो फिजूल खर्ची करते हैं, या पैसे को खर्च करना ही फिजूल मानते हैं। बहुत कम युवा ऐसे हैं जो अपने पैसे को सही जगह खर्च कर पाते हैं। अंडरस्पेंडिंग, यानी बिलकुल भी पैसा खर्च ना करना भी आपके लिए संकट खड़ा कर सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि अगर आप अपने या अपने परिवार पर बिल्कुल खर्च नहीं करते हैं, तो इसका मतलब आप बेहद खराब तरीके से जिंदगी जी रहे हैं। इसलिए परिवार की जरूरतों के लिए प्लानिंग के साथ खर्च करना ही समझदारी है।
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रुपये (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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सैलरी का 80 फीसदी ही करें खर्च
फाइनेंशियल प्लानर्स के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को अपनी सैलरी का 80 फीसदी ही खर्च करना चाहिए और 20 फीसदी बचा के रखना चाहिए। जो पैसा आपने जमा किया हुआ है, उसको आप एक लिमिट में निकालकर अपने खर्च को बिगड़ने से बचा सकते हैं। रिटायरमेंट के बाद के लिए आपके पास सेहत के अतिरिक्त अन्य खर्चों को पूरा करने के लिए भी पैसे जुड़े होने चाहिए।
ज्यादा रिटर्न देने वाले विकल्पों में लगाएं पैसा
अगर आप सिर्फ एफडी या पीपीएफ जैसे पारंपरिक निवेश विकल्पों में निवेश करते हैं, तो आपको रिटर्न भी एक ही तरह का मिलता है। लेकिन आपको सिर्फ एक तरीके के निवेश विकल्पों से हटकर तेजी से रिटर्न देने वाले विकल्पों में पैसा लगाना चाहिए। म्यूचुअल फंड में एसआईपी के जरिए पैसा लगाते हैं, तो आपको काफी फायदा होगा।