एक फरवरी को पेश हुए आम बजट से करदाताओं को काफी उम्मीदें थीं। करदाता की मांग थी कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण टैक्स छूट की सीमा बढ़ा सकती है। कोरोना की मार झेल रहे नौकरीपेशा लोगों को भी आम बजट से काफी उम्मीदें थीं। लेकिन उन्हें कई सौगात नहीं मिली। भले ही इस बार नौकरीपेशा को मोदी सरकार ने कुछ नहीं दिया, लेकिन हम आपको कुछ ऐसे तरीके बताने जा रहे हैं, जिससे आपको टैक्स में बचत होगी।
बजट में नौकरीपेशा को नहीं मिली कोई राहत, लेकिन इस तरह कर सकते हैं टैक्स में बचत
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सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड
निवेशक सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना के तहत बाजार मूल्य से काफी कम दाम में सोना खरीदकर टैक्स की बचत कर सकते हैं। गोल्ड बॉन्ड की परिपक्वता अवधि आठ साल की होती है और इस पर सालाना 2.5 फीसदी का ब्याज मिलता है। स्वर्ण बॉन्ड बैंकों, स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एसएचसीआईएल), नामित डाकघरों और मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों (एनएसई और बीएसई) के माध्यम से बेचा जाएगा।
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना नवंबर 2015 में शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य सोने की हाजिर मांग को कम करना था और सोने की खरीद के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले घरेलू बचत के एक हिस्से को वित्तीय बचत में तब्दील करने के लिए किया गया था। बॉन्ड पर मिलने वाला ब्याज निवेशक के टैक्स स्लैब के अनुरूप कर योग्य होता है, लेकिन इस पर स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) नहीं होती है। जब आप बाजार में सोना बेचते हैं, तो उसपर कैपिटल गेन्स टैक्स लगता है, लेकिन सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में इसकी छूट मिलती है।
चिकित्सा बीमा के तहत मिलेगी कटौती
चिकित्सा बीमा के तहत आप अपने और अपने परिवार के लिए धारा 80डी के तहत 25,000 रुपये तक की कटौती का दावा कर सकते हैं। वहीं वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सीमा 50,000 रुपये है। यदि आप अपने माता-पिता का बीमा करते हैं, तो आपको 25,000 रुपये तक की अतिरिक्त कटौती मिलती है और यदि उनकी उम्र 60 साल से ज्यादा है तो यह सीमा 50 हजार रुपये है। अभी तक सास-ससुर के लिए इस तरह की कटौती की अनुमति नहीं है। यदि आपने एक वर्ष से अधिक समय तक कवर प्रदान करने वाली अपनी पॉलिसी के प्रीमियम का भुगतान किया है, तो कटौती निर्दिष्ट मौद्रिक सीमा के अधीन आनुपातिक आधार पर की जाएगी।
ईपीएफ एडवांस
महामारी से निपटने के लिए जनता की धन की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने घोषणा की थी कि ईपीएफ का कोई भी सदस्य अपनी तीन महीने की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते के बराबर या फिर फंड में जमा राशि का 75 फीसदी निकाल सकता है। इसमें में जो राशि कम होगी वही राशि सदस्य को मिलेगी। यह नॉन-रिफंडेबल एडवांस है और इसपर टैक्स की छूट भी मिलती है।