कैशलेस और डिजिटल लेनदेन से चेक से होने वाले भुगतान में कमी आई है। लेकिन इन सबके बीच चेक बाउंस के मामलों में कमी देखने को नहीं मिली है। चेक बाउंस के अपराध में सजा के प्रावधान को और कड़ा किया गया है। इसमें खाता बंद करने के साथ ही चेक बुक को नहीं जारी करना शामिल है।
बार-बार बाउंस होने पर यह है नया नियम
आरबीआई ने बैंकों से उन ग्राहकों से सख्ती से पेश आने को कहा है जिनके चेक लगातार बाउंस होते रहते हैं। अब ऐसे ग्राहकों को बैंक नई चेक बुक जारी नहीं करेगा। वहीं चालू खाताधारकों का खाता बंद कर दिया जाएगा। आरबीआई ने बैंकों से कहा है कि एक वित्तीय वर्ष में चार बार चेक बाउंस होने पर ऐसा प्रावधान किया जाए।
तीन महीने के लिए होता है वैध
चेक जारी होने के बाद तीन महीने तक के लिए वैध होता है। अगर तीन महीने से ज्यादा पुराना चेक बैंक के पास जाता है तो फिर उसका भुगतान नहीं होगा।
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कचहरी में आयोजित लोक अदालत
लोक अदालत में निबटेगा मुकदमा
चेक बाउंस का मुकदमा लोक अदालत में लाने के लिए सरकार कानून में बदलाव करने की सोच रही है। हालांकि इसका फैसला अब 23 मई के बाद लिया जाएगा, जब नई सरकार सत्ता में आएगी। इसके साथ ही मुकदमें का खर्चा भी डिफॉल्टर के ऊपर लगाया जाएगा।
चेक बाउंस पर देना पड़ता है भारी जुर्माना
जिस गलती का जिक्र हम कर रहे हैं वो है चेक का बाउंस होना। इस गलती पर बैंक 800 रुपये तक की राशि आपके खाते से काट लेते हैं। चेक बाउंस दो तरीके से होता है। पहला खाते में राशि का कम होना और दूसरा, किसी तरह की तकनीकी गलती का होना जैसे हस्ताक्षर में बदलाव, शब्दों में गलती होना आदि।