बहुत पहले महिलाओं के लिए ब्रा पहनना कोई आसान काम नहीं था। प्राचीन मिस्र के दिनों से ही महिलाओं को ब्रा पहनने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती थी। लेकिन वक्त और फैशन ने ब्रा को नया रूप दिया। एक नज़र डालिए तब से अब तक कितने बदल गए आपके अंडरगारमेंट।
कभी 'ब्रा' पहनने से डरती थी महिलाएं, तस्वीरें देख उड़ जाएंगे आपके होश
प्राचीन मिस्र के दिनों में ब्रा चमड़े की बनी होती थी। इसे पहनने में अच्छी खासी मशकत करनी पड़ती थी।
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17 वीं और 18 वीं शताब्दी में सफेद रंग के मलमल के अंडरगारमेंट का चलन चला। यह किसी क़मीज़ की तरह दिखती थी।
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1890-1895 के दौरान महिलाएं कोर्सेट पहनती थीं, जो एक तरह की जैकेट होती थी। कोर्सेट के पीछे डोरियां होती थीं, जिसे बहुत ज्यादा कसा जाता था। लंदन के विज्ञान संग्रहालय में जो पुश अप ब्रा रखी हुई है। इस ब्रा को पहनने से इतना नुकसान होता था कि डॉक्टरों ने महिलाओं को इसे न पहनने की सलाह तक दे दी थी, क्योंकि इसके कसे होने के कारण जी घबराना, पेट में गड़बड़ी, सांस फूलने जैसी परेशानी होती थी।
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1889 में आधुनिक ब्रा का अविष्कार हुआ था। फ्रांस की हरमिनी काडोले ने टू पीस अंडरगारमेंट बनाया था। जिसे कोर्सेलेट जॉर्ज नाम दिया गया। इस ब्रा के आने के बाद महिलाओं का ब्रा के प्रति नज़किया बदल गया। ये जितना पहनने में आसान थी, उतना ही इसे पहनने में समय बचता था।