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कम बच्चे पैदा करने के नुकसान भी होते हैं? हैरान कर देगी ये जानकारी
Sun, 11 Nov 2018 01:30 PM IST
बीबीसी, हिन्दी
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Updated Sun, 11 Nov 2018 01:30 PM IST
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कहते हैं कि बच्चे देश का भविष्य होते हैं लेकिन अगर बच्चे न हों तो किसी भी देश का भविष्य खतरे में पड़ सकता है। इसी खतरे की ओर इशारा करता एक शोध सामने आया है, जिसके मुताबिक महिलाओं की प्रजनन दर में कमी आई है। शोधकर्ताओं के मुताबिक इस शोध के नतीजे हैरान करने वाले हैं और इसके समाज पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं, जहां बच्चों से ज्यादा दादा-दादी होने वाले हैं।
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शोध पर आधारित रिपोर्ट कहती है कि प्रजनन दर कम होने का मतलब है कि आधे से ज्यादा देशों में जन्म दर का अस्थायी तौर पर कम होना। इसका मतलब होगा कि इन देशों में उनकी आबादी का विस्तार बनाए रखने के लिए पर्याप्त बच्चे नहीं हैं।
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'द लांसेट' में छपे इस अध्ययन में हर देश में साल 1950 से 2017 के बीच ट्रेंड पर नजर रखी गई। साल 1950 में महिलाएं अपने पूरे जीवन में औसतन 4.7 बच्चों को जन्म देती थीं। लेकिन, पिछले साल तक यह प्रजनन दर आधी होकर 2.4 बच्चों पर आ गई।
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हालांकि, अलग-अलग देशों के मुताबिक इसमें काफी अंतर देखने को मिलता है। नाइजर और पश्चिमी अफ़्रीका में प्रजनन दर 7.1 है, लेकिन साइप्रस के भूमध्य द्वीप पर महिलाएं औसतन एक ही बच्चे को जन्म देती हैं। जब भी किसी देश में प्रजनन दर 2.1 से नीचे आती है तो जनसंख्या सिकुड़नी शुरू हो जाती है। ख़ास तौर से उन देशों में जहां बाल मृत्यु दर ज्यादा है।
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1950 में जब ये अध्ययन शुरू हुआ तो कोई भी देश इस श्रेणी में नहीं था। यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन में इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन के डायरेक्टर प्रोफेसर क्रिस्टफर मुरै ने कहा, 'हम उस स्थिति में पहुंच गए हैं जब प्रजनन दर रिप्लेसमेंट लेवल के नीचे है। इसलिए अगर कुछ नहीं किया गया तो उन देशों में जनसंख्या कम हो जाएगी। यह बड़ा बदलाव है।'
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