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किन कामों के लिए सांपों के जहर हैं रामबाण, राज जानकर आप भी होंगे हैरान
फीचर टीम, अमर उजाला
Updated Fri, 19 Oct 2018 05:44 PM IST
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snake
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जहर जान ले लेता है। हम सब ये बात जानते हैं। इसके खतरों से वाकिफ हैं। पर, अगर हम ये कहें कि जहर से जान बचाई जा सकती है, तो क्या आप यकीन करेंगे ? जहर के जानकार डॉक्टर जोल्टन टकास कहते हैं कि, 'जहर दुनिया में इकलौती क़ुदरती चीज है, जो विकास की प्रक्रिया से उपजी है जान लेने के लिए।'
सांप
दुनिया में सांपों की जितनी नस्लें हैं, उतने ही तरह के जहर। किसी के काटने से तुरंत मौत हो जाती है। तो, किसी का जहर तड़पा कर मारता है। ज्यादातर सांप अपने विषैले दांतों से जहरबुझा हमला करते हैं। जब शिकार के बदन पर सांप के विषैले दांत घुस जाते हैं, तो जहर सीधे शिकार के खून में समा जाता है। कुछेक सांप ऐसे भी होते हैं, जो थूक कर जहर फेंकते हैं। अफ्रीकी देश मोजांबिक में पाया जाने वाला स्पिटिंग कोब्रा ऐसा ही सांप है।
अब सांप के जहर की इतनी वेराइटी है, तो जाहिर है, उनके फायदे भी कई तरह के होंगे। सांप के जहर से ऐसी दवाएं बनाई जाती हैं, जो दिल की बीमारियों से लड़ने में काम आती हैं। टकास कहते हैं कि, 'सांप के जहर का दवाएं बनाने में इस्तेमाल, दूसरे क़ुदरती जहर के इस्तेमाल का रास्ता दिखाता है। खास तौर से हाई ब्लड प्रेशर से लड़ने में सांप के जहर से बनी दवाएं काफी इस्तेमाल हो रही हैं। दिल के दौरे और हार्ट फेल होने की स्थिति में भी सांप के जहर से बनी दवाएं बहुत कारगर हैं।' टकास बताते हैं कि, 'जराराका पिट वाइपर सांप के जहर से बनी दवाओं ने जितने इंसानों की जानें बचाई हैं, उतनी किसी और जानवर ने नहीं।'
दुनिया में सांपों की जितनी नस्लें हैं, उतने ही तरह के जहर। किसी के काटने से तुरंत मौत हो जाती है। तो, किसी का जहर तड़पा कर मारता है। ज्यादातर सांप अपने विषैले दांतों से जहरबुझा हमला करते हैं। जब शिकार के बदन पर सांप के विषैले दांत घुस जाते हैं, तो जहर सीधे शिकार के खून में समा जाता है। कुछेक सांप ऐसे भी होते हैं, जो थूक कर जहर फेंकते हैं। अफ्रीकी देश मोजांबिक में पाया जाने वाला स्पिटिंग कोब्रा ऐसा ही सांप है।
अब सांप के जहर की इतनी वेराइटी है, तो जाहिर है, उनके फायदे भी कई तरह के होंगे। सांप के जहर से ऐसी दवाएं बनाई जाती हैं, जो दिल की बीमारियों से लड़ने में काम आती हैं। टकास कहते हैं कि, 'सांप के जहर का दवाएं बनाने में इस्तेमाल, दूसरे क़ुदरती जहर के इस्तेमाल का रास्ता दिखाता है। खास तौर से हाई ब्लड प्रेशर से लड़ने में सांप के जहर से बनी दवाएं काफी इस्तेमाल हो रही हैं। दिल के दौरे और हार्ट फेल होने की स्थिति में भी सांप के जहर से बनी दवाएं बहुत कारगर हैं।' टकास बताते हैं कि, 'जराराका पिट वाइपर सांप के जहर से बनी दवाओं ने जितने इंसानों की जानें बचाई हैं, उतनी किसी और जानवर ने नहीं।'
Comodo dragon
कोमोडो ड्रैगन
इस ड्रैगन की ज़हर की ग्रंथि, सांप के मुकाबले दूसरी तरह से काम करती है। ये जानवर अपनी तमाम ग्रंथियों से जहर खींचकर अपने दांतों से शिकार के शरीर में घुसा देता है। इसका जहर जब किसी शिकार के खून में मिलता है, तो खून जमता नहीं है। वो पूरे शरीर में फैल जाता है। यही वजह है कि कोमोडो ड्रैगन के शिकार के शरीर से लगातार खून बहता रहता है।
वैसे तो ये खतरनाक शिकारी है। मगर, इसके जहर में जो खून को न जमने देने वाला गुण है, उसका फायदा दवाएं बनाने में लिया जाता है। जब दिल के दौरे पड़ते हैं या फेफड़ों में ऐंठन होती है, तो हमारे शरीर में खून रुकने लगता है। कोमोडो ड्रैगन के जहर की मदद से इससे राहत देने वाली दवा तैयार होती है, ताकि खून के थक्के न बनें।
इस ड्रैगन की ज़हर की ग्रंथि, सांप के मुकाबले दूसरी तरह से काम करती है। ये जानवर अपनी तमाम ग्रंथियों से जहर खींचकर अपने दांतों से शिकार के शरीर में घुसा देता है। इसका जहर जब किसी शिकार के खून में मिलता है, तो खून जमता नहीं है। वो पूरे शरीर में फैल जाता है। यही वजह है कि कोमोडो ड्रैगन के शिकार के शरीर से लगातार खून बहता रहता है।
वैसे तो ये खतरनाक शिकारी है। मगर, इसके जहर में जो खून को न जमने देने वाला गुण है, उसका फायदा दवाएं बनाने में लिया जाता है। जब दिल के दौरे पड़ते हैं या फेफड़ों में ऐंठन होती है, तो हमारे शरीर में खून रुकने लगता है। कोमोडो ड्रैगन के जहर की मदद से इससे राहत देने वाली दवा तैयार होती है, ताकि खून के थक्के न बनें।
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Scorpion
- फोटो : Wildlife & Nature Plaza
बिच्छू
दुनिया में हर साल कम से कम 12 लाख लोग बिच्छू के डंक के शिकार होते हैं। बिच्छू के डंक मारने से हर साल तीन हजार से ज्यादा लोगों की मौत होती है। सबसे खतरनाक बिच्छू डेथस्टाकर स्कॉर्पियन कहा जाता है। लेकिन, ये कैंसर के इलाज में अहम रोल निभा सकता है। इसके खतरनाक जहर में क्लोरोटॉक्सिन नाम के जहरीला तत्व होता है। इससे कैंसर का पता लगाया जा सकता है और इससे कैंसर के ट्यूमर ठीक किए जा सकते हैं।
दुनिया में हर साल कम से कम 12 लाख लोग बिच्छू के डंक के शिकार होते हैं। बिच्छू के डंक मारने से हर साल तीन हजार से ज्यादा लोगों की मौत होती है। सबसे खतरनाक बिच्छू डेथस्टाकर स्कॉर्पियन कहा जाता है। लेकिन, ये कैंसर के इलाज में अहम रोल निभा सकता है। इसके खतरनाक जहर में क्लोरोटॉक्सिन नाम के जहरीला तत्व होता है। इससे कैंसर का पता लगाया जा सकता है और इससे कैंसर के ट्यूमर ठीक किए जा सकते हैं।
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Mole rat
छछूंदर
यूं तो स्तनधारी जानवर जहरीले नहीं होते, लेकिन छछूंदर की कुछ नस्लों में जहर होता है। वैसे, ये जहर भी बहुत खतरनाक नहीं होता। इससे कोई इंसान मरता तो नहीं। मगर, छछूंदर के जहर से दर्द और सूजन आ जाती है। भले ही इसके जहर की बहुत चर्चा नहीं होती। मगर, वैज्ञानिकों ने छछूंदर के जहर में दिलचस्पी दिखाई है। इस बात की पड़ताल की जा रही है कि छछूंदर के जहर से कैंसर का इलाज किया जा सकता है क्या?
जानकार कहते हैं कि जहर, इंसान के शरीर में जिन केमिकल को निशाना बनाता है, वो ट्यूमर में पाये जाते हैं। इसलिए जहर की इस खूबी का फायदा उठाकर ट्यूमर को खत्म करने वाली दवाएं बनाने में करने की कोशिश हो रही है। ऐसा हुआ, तो जहर से जान नहीं जाएगी। तब जहर जीवनदान देगा।
यूं तो स्तनधारी जानवर जहरीले नहीं होते, लेकिन छछूंदर की कुछ नस्लों में जहर होता है। वैसे, ये जहर भी बहुत खतरनाक नहीं होता। इससे कोई इंसान मरता तो नहीं। मगर, छछूंदर के जहर से दर्द और सूजन आ जाती है। भले ही इसके जहर की बहुत चर्चा नहीं होती। मगर, वैज्ञानिकों ने छछूंदर के जहर में दिलचस्पी दिखाई है। इस बात की पड़ताल की जा रही है कि छछूंदर के जहर से कैंसर का इलाज किया जा सकता है क्या?
जानकार कहते हैं कि जहर, इंसान के शरीर में जिन केमिकल को निशाना बनाता है, वो ट्यूमर में पाये जाते हैं। इसलिए जहर की इस खूबी का फायदा उठाकर ट्यूमर को खत्म करने वाली दवाएं बनाने में करने की कोशिश हो रही है। ऐसा हुआ, तो जहर से जान नहीं जाएगी। तब जहर जीवनदान देगा।