इतिहास के काले पन्नों के निर्दयी और सनकी तानाशाहों का जिक्र है। जिन्होंने इंसानियत को झकझोर देने वाली हरकतें की। कुछ ने अपनी सनक से लोगों की जिंदगी को नरक में बदल दिया तो कुछ तानाशाह ऐसे थे जिन्होंने अपनी जिद्द के लिए लाखों लोगों की जान को आफत में डाल दिया। इतिहास के ऐसे ही कुछ सनकी तानाशाहों की कुछ अजीबो-गरीब आदतों के बारे में बताने जा रहे हैं। जिसे जानने के बाद आपका दिमाग घूम जाएगा।
ये हैं वो 5 क्रूर तानाशाह, जिनकी अजीबो-गरीब हरकतें जानने के बाद आपका सिर चकराने लगेगा
किम जोंग उन के सनकीपन के कई किस्से दुनिया के सामने आ चुके हैं। उत्तर कोरिया की जनता पर अत्याचार करने वाले इस सनकी तानाशाह के पिता, किम जोंग इल अपने बेटे से भी बड़ा क्रूर तानाशाह रहा। इल को हॉलीवुड की फिल्मों का काफी शौक था। उसके शासन काल में सभी देशों में मौजूद उत्तर कोरिया के राजनायिकों को आदेश थे कि वो हॉलीवुड फिल्मों की कॉपी अपने पास रखें। इस तरह उसके पास 20 हजार से ज्यादा फिल्मों का कलेक्शन हो गया था।
अपने देश की फिल्म इंडस्ट्री से किम जोंग इल बहुत नाराज था, वो चाहता था कि उसके यहां ऐसी फिल्में बनें जो पूरी दुनिया में मशहूर हो लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। आखिर में उसने 1978 में साउथ कोरिया के डायरेक्टर सिन सांग आउक, चोई उन हुन को अगवा कर लिया और अपने यहां फिल्में बनवानी शुरू की। दोनों पति पत्नी ने मिलकर 8 साल तक काम किया और कई फिल्में बनाई लेकिन कोई भी फिल्म कामयाब नहीं हो पाई। जिसके बाद किसी तरह वो अपनी जान बचाकर भागने में कामयाब रहे और किम जोंग इल की सच्चाई पूरी दुनिया को बताई।
किम जोंग इल की एक और खराब आदत थी, उसे जवान दिखने का शौक था। इसके लिए वो 20-22 साल के लड़के लड़कियों का खून चढ़वाया करता था।
तुर्कमेनिस्तान के भूतपूर्व राष्ट्रपति सपरमुरात नियोजव खुद को ऐसे पेश करता था जैसे हॉलीवुड फिल्म 'डिक्टेटर' में दिखाया गया था। इसने अपना नाम तुर्कमैन बाशी रख लिया था। इस तानाशाह ने अपनी खुद की 15 मीटर ऊंची सोने की पर्त चढ़ी मूर्ति बनवा ली थी जिसका मुंह सूरज की तरफ घूमता रहता था। ये वो दौर था जब तुर्कमेनिस्तान भयंकर गरीबी की मार झेल रहा था लेकिन सपरमुरात को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। इस सिरफिरे शासक ने अपनी राजधानी में एक बर्फ का महल बनवाया और रेत के रेगिस्तान के बीचो बीच एक झील बनाने का फरमान सुना दिया।
सपरमुरात पूरे तुर्केमेनिस्तान को अपनी जागीर समझता था। पूरे देश में उसके नाम के पार्क, महल और शहर मिल जाएंगे। और तो और उसने सिक्कों पर अपने नाम गुदवा दिए। शराब की बोतलों को अपना नाम दे दिया। यहां तक की जनवरी महीने का नाम बदलकर भी अपने नाम पर कर दिया था। हद तो तब हो गई जब नियाजोव ने अपने नाम से एक किताब लिखी, उसके बच्चों को पढ़ना अनिवार्य कर दिया। और कुछ कॉपियां अंतरिक्ष में भी भेज दी ताकि अंतरिक्षवासियों को पता चले कि धरती पर सपरमुरात नियाजोव नाम का कोई महान शख्स रहता है।
फर्डिनानेंड एंड इमेल्डा मार्कोस फिलीपींस के शासक रह चुके हैं। इनकी तानाशाही के किस्से भी दुनिया में याद किए जाते हैं। फर्डिनानेंड और उनकी पत्नी इमेल्डा मार्कोस उन दिनों म्यूजिक ग्रुप बीटल्स ग्रुप के बहुत बड़े फैन हुए करते थे। एक बार उन्होंने 1966 में बीटल्स को अपने देश आमंत्रित किया। बीटल्स ने आमंत्रण स्वीकार किया और किसी देश से शो करने के बाद फिलीपींस आने का वादा किया। वादे के अनुसार वो फिलिपींल पहुंचे भी, लेकिन वहां पहुंचते ही वो अस्पताल में आराम करने के लिए चले गए। थोड़ी देर बाद जब उन्हें बताया गया कि मार्कोस दंपत्ति आपसे मिलना चाहते हैं तो उन्होंने थकान का हवाला देकर आने से मना कर दिया। इस बात का इतना बतंगड़ बना कि बीटल्स को अपनी जान बचाकर दिल्ली भागना पड़ा।
उनके मना करने से मार्कोस इतने नाराज हुए कि उन्होंने पूरे देश में फैला दिया कि फिलीपींस के राष्ट्रपति दंपत्ति का अपमान किया। पूरे देश में उनके खिलाफ आक्रोश फैल गया। लोगों ने उनको घेर लिया और उन्हें मारने लगे। उनके ऊपर थूका जाने लगा। फिर वो भागकर दिल्ली आए और लोगों को बताया कि वहां क्या हुआ था।
युगांडा का तानाशाह इदी आमी को क्रूर तानाशाह के रूप में याद किया जाता है। इस शख्स ने अपने पूरे शासनकाल में 6 लाख लोगों को मौत के घाट उतार दिया। ये शख्स इतना क्रूर था कि ये इंसानों का मांस खा जाया करता था। यहां तक कि उसके फ्रिज में लोगों के कटे हुए सिर अन्य अंग मिले थे। हालांकि इसकी कभी पुष्टि नहीं हुई। इसने गद्दाफी के कहने पर युगांडा में रहने वाले 80 हजार एशियाई नागरिकों को देश छोड़ने के लिए कह दिया था और उनकी संपत्ति हड़प ली थी। जिसकी वजह से भारत ने युगांडा के साथ अपने संबंध खत्म कर लिए थे। इसी घटना के बाद उसके कार्यकाल का अंत हुआ। जब अमीन को राजगद्दी हासिल हुई थी तो उसने चार यूरोपियन नागरिकों के कंधे पर अपनी सवारी करवाई थी। और कहा था कि पहले हम इन्हें ढोते थे अब ये हमें ढोएंगे।