{"_id":"5bb1b1f5867a55013270fdb2","slug":"snakes-have-attacks-on-humans-at-andhra-pradesh-people-worship-in-temples","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"यहां विषधारी सांपों का फैला ऐसा आतंक, हरकदम पर लोगों को नजर आने लगती है मौत","category":{"title":"Weird Stories","title_hn":"अजब गजब","slug":"weird-stories"}}
यहां विषधारी सांपों का फैला ऐसा आतंक, हरकदम पर लोगों को नजर आने लगती है मौत
फीचर टीम, अमर उजाला
Updated Mon, 01 Oct 2018 12:26 PM IST
विज्ञापन
aa
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आंध्र प्रदेश में एक हैरतअंगेज घटना सामने आई है। यहां एक छोटे से द्वीप पर अचानक सांपों ने हमला बोल दिया है। सांपों की तादात इतनी ज्यादा हो गई है कि इंसान का जीवन इस द्वीप पर मुश्किल हो गया है। जहां भी कदम रखो मौत बनकर ये जहरीले सांप सामने टकरा जाते हैं। इस चिंता में लोग अपने घरों में चैन से नींद तक नहीं ले पा रहे। सांपों के आतंक से बचने के यहां के लोगों ने मंदिरों में पूजा-अर्चना शुरू कर दी है।
aa
आंध्र प्रदेश के इस छोटे से द्वीप पर जब सांपों के काटने की संख्या तेजी से बढ़ने लगी तो कृष्णा नदी के किनारे मोपी देवी में बने भगवान सु्ब्रमन्यम मंदिर में पुजारियों ने पूजा अर्चना की। इसके लिए 17 पंडितों ने सांपों को शांत करने के लिए यज्ञ किया। इस दौरान कृष्णा जिले में डिविसेमा के छोटे द्वीप पर लोगों ने सांपों से बचने के लिए क्षमा याचना भी की। आए दिन कोई न कोई इनका शिकार बन रहा है। द्वीप पर सांपों की संख्या अचानक क्यों बढ़ गई, इसका कारण जानने की कोशिश की जा रही है।
aa
माना जा रहा है कि मेंढक की कमी के चलते सांपों ने पास खेतों और मैदानों को छोड़ द्वीप पर बने घरों की और रुख करना शुरू कर दिया है। इंसानी बस्तियों में इनके प्रवेश से हाहाकार मचा है। हालात बेहद नाजुक बन गए हैं। मीडिया रिपोर्टों की मानें तो इलाके में मेंढ़कों की कमी इसलिए हुई क्योंकि लोगों ने उनका शिकार करना शुरू कर दिया था और उन्हें अवैध रूप से चीन भेजना शुरू कर दिया था। इस चलते सांपों ने बस्तियों की ओर रुख कर लिया। इस कारण सांपों के काटने की संख्या बढ़ गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
aa
कहा जाता है कि यहां पिछले चार दशक से मनुष्य और सांपों की लड़ाई चली आ रही रही है। यह द्वीप एक दुर्लभ पारिस्थितिक क्षेत्र है। कृष्णा नदी और बंगाल की खाड़ी से घिरा यह इलाका जंगली जानवरों का बसेरा है। यह तकरीबन 708.80 वर्ग किलोमीटर में फैला है। इसके अन्तर्गत तीन मंडल आते हैं जिनका नाम कोडुरु, अविनीगड्डा और नागायालंका है।
विज्ञापन
aa
इस द्वीप पर अचानक सांपों के यूं आक्रमक होने के पीछे का कारण मेंढ़कों का अवैध व्यापार ही है। इस बाबत एक विशेषज्ञ ने कहा है कि द्वीप पर लगभग एक दशक तक अवैध मेंढक व्यापार होता रहा है। यह 2010 की शुरुआत तक खत्म हो गया क्योंकि मेंढक काफी कम हो गए। उसके बाद से लेकर अब तक यहां आमतौर पर मानसून के दौरान सांपों के काटने का मामले बढ़े हैं।