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इस रेलवे ट्रैक पर ब्रिटिश सरकार का है कब्जा, भारत सरकार आज भी चुका रही इसकी कीमत

Sat, 08 Sep 2018 12:32 PM IST
फीचर टीम, अमर उजाला
फीचर टीम, अमर उजाला Updated Sat, 08 Sep 2018 12:32 PM IST
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Railway track still under british government in Maharashtra
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आजादी के 71 साल बाद भी देश का एक हिस्सा ऐसा है जिस पर ब्रिटिशों का राज चलता है। ये जगह आज भी ब्रिटिश सरकार के कब्जे में हैं। क्या आप ये बात जानते थे..? शायद आपको इस बारे में खबर ही न हो। आपको भी यह समझना थोड़ा मुश्किल हो पा रहा होगा कि आखिर यह कहानी आपसे कैसे छुपी रह गई..? तो चलिए जानते हैं इसके बारे में...

 
Railway track still under british government in Maharashtra
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दरअसल, हम बात कर रहे हैं देश में स्थित एक ऐसे रेलवे ट्रैक की जिसके जरिए हर साल ब्रिटिश सरकार आज भी 1.20 करोड़ की रॉयल्टी खा रहा है। आप भी सोच में पड़ गए न कि ट्रैक पर मालिकाना हक भारतीय रेलवे की क्यों नहीं है..? सबसे बड़ा सवाल तो दिमाग में यह आ रहा होगा कि देश आजाद होने के बाद तो ब्रिटिश सरकार को कोई मतलब ही नहीं रह जाता यहां तो फिर इस रेलवे ट्रैक पर उनका कब्जा कैसे... 
Railway track still under british government in Maharashtra
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दरअसल, कहानी कुछ ऐसी है कि भारतीय रेलवे ब्रिटिश सरकार की रॉयल्टी वाली चीज इस्तेमाल कर रही है। जी हां, यहां नैरो गेज ट्रैक का इस्तेमाल किया जाता है। इसी की रॉयल्टी का पैसे ब्रिटेन की एक प्राइवेट कंपनी को जाता है। हालांकि इस ट्रैक से केवल एक ही ट्रेन गुजरती है। महाराष्ट्र के अमरावती से मुर्तजापुर के बीच चलने वाली यह ट्रेन 189 किमी का सफर 20 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तय कर लेती है।
 
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Railway track still under british government in Maharashtra
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ऐसा नहीं है कि भारत सरकार ने ब्रिटिश हुकूमत से ये ट्रैक खरीदने के प्रयास नहीं किए लेकिन लाख कोशिशों के बाद भी इसका स्वामित्व ब्रिटिश सरकार के पास ही है। किन्हीं तकनीकी कारणों से ऐसा संभव नहीं हो सका। इसी वजह से आज भी इस पर ब्रिटेन की कंपनी का कब्जा है। ब्रिटेन की कंपनी ही इसकी देखरेख का पूरा काम संभालती है।

 
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Railway track still under british government in Maharashtra
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लेकिन हकीकत यह है कि ये ट्रैक हर साल पैसा देने के बावजूद बहुत तेजी से जर्जर होता जा रहा है। बताया जाता है कि पिछले 60 साल से इस ट्रैक की मरम्मत तक नहीं हुई है। यह बहुत ही जोखिम भरा है। जानकारी के लिए बता दें कि अंग्रेजों ने इस ट्रैक का निर्माण अमरावती से कपास मुंबई पोर्ट तक पहुंचाने के लिए करवाया था।

 
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