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सुरक्षित सैनिट्री पैड बनाने के लिए सब कुछ ताख पर रखा इसने
टीम डिजिटल/अमर उजाला
Updated Thu, 10 Mar 2016 05:49 PM IST
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- फोटो : oddity central
इस आदमी को इंडियाज मेनस्ट्रऐशन मैन कहा जाता। आप इसकी कहानी जानेंगे तो हैरत में पड़ जाएंगे कि इतना कोई शख्स कैसे झेल सकता है। अरूनाचलम मुरूगननथनम राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित एक सोशल ऑनटरप्रेन्योर हैं। वो भारत के राज्य तमिलनाडु के कोयंबटोर के रहने वाले हैं। वो बिल्कुल एक आम आदमी ही थे। लेकिन उनके काम ने उन्हें खास बना दिया।
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अरूनाचलम के पिता तब चल बसे थे जब वो 14 साल के थे। इस वजह से घर की आर्थिक जिम्मेदारी उन पर आ गई जिस वजह से उन्हें बचपन में ही स्कूल छोड़ना पड़ा। बड़े होने पर शादी भी हुई। एक दिन उन्होंने अपनी पत्नी को काफी खराब कपड़े को मासिक चक्र में इस्तेमाल किए जाने वाले पैड की तरह काम में लाते देखा। उन्होंने फौरन अपनी पत्नी से इस तरह के गंदे कपड़े को इस्तेमाल करने से मना किया।
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उन्हें तभी ही इस बात का अहसास हुआ कि उनके गांव में इतनी गरीबी और अज्ञानता है कि हर महिला महंगे पैड्स खरीद नहीं सकती। इसलिए वो खराब कपड़े से लेकर बार-बार तक कपड़े को धोकर उसे मासिक धर्म में इस्तेमाल में लाती थीं। उनका पैड कभी लकड़ियों के चूरे से बनता था तो कभी राख से। इस वजह से कई औरतों की इंफेक्शन के कारण मौत भी होती थी या प्रेंगनेंसी के दौराप दिक्कतें आती हैं।
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- फोटो : oddity central
उन्होंने तय किया कि वो एक अच्छा और सस्ता पैड तैयार करेंगे। पहले उन्होंने अपने हिसाब से पैड बनाया और अपनी पत्नी को इसे पहनकर बताने को कहा। लेकिन सही परिणामों के लिए वो हर बार एक-एक महीने का इंतजार नहीं कर सकते थे। फिर उन्होंने एक दूसरे तरह के पैड को तैयार किया और पास के एक इंटर कॉलेज में लड़कियों से बड़ी हिम्मत जुटाकर इसे इस्तेमाल करने और परिणाम बताने को कहा।
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पर कॉलेज की लड़कियां सही जवाब देने में काफी शरमा रही थीं। वो उनपर भी निर्भर नहीं रह सकते थे। ऐसे में उन्होंने अपना एक्सपेरिमेंट बंद नहीं किया। गांव के कुंए या खेत के पास ऐसा काम करने से लोगों ने उन्हें पागल कहना भी शुरू कर दिया। लोगों ने उन्हें गांव से निकालने की भी कोशिश की। लेकिन अच्छा पैड बनाने की लगन उन्हें ऐसी चढ़ी कि इसके बाद लगातार इस काम को करते ही रहे।