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अद्भुत है ये मंदिर, यहां कदम रखते ही पालतू कुत्ते जैसा बर्ताव करने लगता है ये खूंखार जानवर
फीचर टीम, अमर उजाला
Updated Mon, 17 Sep 2018 10:04 AM IST
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सुनने में अजीब जरूर लगे लेकिन यह सच है। थाईलैंड में एक ऐसा मंदिर है जहां आते ही खूंखार जानवर भी पालतू बन जाता है। यकीन नहीं होता तो खुद देख लीजिए। बता दें, यह एक बौद्ध मंदिर है जहां पिछले कई साल से जंगल के सबसे शक्तिशाली और खूंखार जानवर पल रहे हैं। इनकी देखरेख बौद्ध अनुयायी करते हैं। ये उनके साथ ऐसे रहते हैं जैसे उनका पालतू कुत्ता हो।
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जी हां, थाईलैंड के इस बौद्ध मंदिर में लोगों के साथ बहुत से टाइगर खुशी-खुशी रहते हैं। उनका उठना-बैठना खाना-पीना यहां के लोगों के साथ ही होता है। वैसे तो शेर, बाघ और चीते को जंगल के सबसे खतरनाक जानवरों की श्रेणी में रखा जाता है लेकिन यहां का नजारा देखकर आप चौंक जाएंगे।
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जी हां, यहां बाघ इंसानी दोस्त बनकर रहता हैं। इस टाइगर टेंपल को यहां 'Wat Pa Luang Ta Bua' के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर म्यांमार और थाइलैंड के बीच में है। विदेशी पर्यटक अक्सर यहां ये चमत्कार देखने चले आते हैं। इस टेंपल के बनने की भी बड़ी अजब कहानी है। कहते हैं कि 1994 तक यह सिर्फ एक बौद्ध धर्म मंदिर हुआ करता था। लेकिन आज इसकी पहचान 'टाइगर टेंपल' के रूप में की जाती है।
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दरअसल, थाईलैंड में बहुत ज्यादा जानवरों की तस्करी होने लगी थी। तब इस मंदिर ने वन्य जीवों के संरक्षण के लिए यहां जीव जन्तुओं को पालना शुरू कर दिया। 1999 में एक ग्रामीण ने इन्हें एक बाघ का छोटा बच्चा लाकर दिया जिसकी मां का शिकार कुछ व्यक्तियों ने कर दिया था। धीरे-धीरे ऐसे ही बहुत सारे बाघों के बच्चे यहा गांव वालों द्वारा लाये जाने लगे। इस तरह यह मंदिर बाघों का घर बनता चला गया। इन सभी बाघों को बौद्ध भिक्षुओं द्वारा शिक्षण दिया जाता है।
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टूरिस्ट भी करते है टाइगर के साथ मस्ती
यहां आने वाले देशी और विदेशी टूरिस्ट भी बाघों के साथ मस्ती करते हैं। वे उनके साथ खेलते हैं, फोटो खिचवाते हैं। कहा यह भी जाता है कि यहां बाघों को कम और बेकार खाना दिया जाता है व बोद्ध भिक्षु इन बाघों की तस्करी में भी शामिल है। लेकिन ऐसा कोई सबूत सामने नहीं आया है।
यहां आने वाले देशी और विदेशी टूरिस्ट भी बाघों के साथ मस्ती करते हैं। वे उनके साथ खेलते हैं, फोटो खिचवाते हैं। कहा यह भी जाता है कि यहां बाघों को कम और बेकार खाना दिया जाता है व बोद्ध भिक्षु इन बाघों की तस्करी में भी शामिल है। लेकिन ऐसा कोई सबूत सामने नहीं आया है।