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12 साल बाद इस शिवलिंग पर गिरती है बिजली, टूटने के बाद होता है ये चमत्कार
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Published by: मोना नारंग
Updated Sat, 06 Jul 2019 09:10 AM IST
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हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में एक रहस्यमयी शिव मंदिर है, जिसकी गुत्थी आज तक कोई नहीं सुलझा पाया। ऊंची पहाड़ियों पर स्थित इस मंदिर पर पार्वती और व्यास पार्वती और व्यास नदी का संगम भी है। इस मंदिर पर हर 12 साल में आकाशीय बिजली गिरती है, लेकिन इसके बाद भी मंदिर को किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता। सदियों से चले आ रहे इस रहस्य के बारे में जानते हैं कुछ रोचक बाते...
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पौराणिक कथा के अनुसार यहां की विशालकाय घाटी सांप के रुप में है, जिसका वध महादेव के द्वारा किया गया था। बताया जाता है कि हर 12 साल में भगवान इंद्र भोलेनाथ की आज्ञा लेकर बिजली गिराते हैं। बिजली के गिरने से मंदिर का शिवलिंग खंडित हो जाता है। इसके बाद मंदिर के पूजारी खंडित शिवलिंग पर मरहम के तौर पर मक्खन लगाते हैं, जिससे की महादेव को दर्द से राहत मिले।
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इस शिवलिंग को स्थानीय लोग मक्खन महादेव कहते हैं तो कुछ लोग इसे बिजली महादेव का शिवालय भी कहते हैं। भोलेनाथ का यह शिवलिंग कुल्लू से 18 किलोमीटर की दूरी पर मथान नामक स्थान पर स्थित है।
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पौराणिक कथा में बताया गया है कि इस मंदिर में कुलान्त नाम का एक दैत्य रहा करता था। एक बार उसने सारे जीवों को मारने के लिए व्यास नदी का पानी रोक दिया था। यह देख महादेव क्रोधित हो गए। इसके बाद महादेव ने एक माया रची। भगवान शिव दैत्य के पास गए और उसे कहा कि उसकी पूंछ में आग लगी है।
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महादेव की बात को सुनकर दैत्य ने जैसे ही पीछे मूड़कर देखा तो शिवजी ने त्रिशुल से कुलान्त के सिर पर वार किया और वह वही मर गया। कहा जाता है दैत्य का विशालकाय शरीर पहाड़ में तब्दील हो गया, जिसे आज हम कुल्लू के पहाड़ कहते हैं।
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