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आत्मिक सुख को भी मापा जा सकता है, नहीं जानते होंगे ये बात
बीबीसी हिंदी
Updated Wed, 05 Sep 2018 10:29 AM IST
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इस दुनिया में मानव ही एकमात्र ऐसा जीव है जिसके लिए यौन संबंध का मक़सद महज़ प्रजनन नहीं बल्की इसके जरिए वह एक तरह के आत्मिक सुख की प्राप्ति भी करता है। इटली के वैज्ञानिक और रोम टोर वर्गेटा यूनिवर्सिटी में मेडिकल सेक्सोलॉजी के प्रोफ़ेसर इमैनुएल जनीनी इस बात पर जोर देते हुए कहते हैं कि इंसानों के बीच बनने वाले संबंधों में प्रजनन के साथ-साथ यौन सुख भी काफी महत्व रखता है।
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जनीनी ने बीबीसी को बताया कि पहली बार महिलाओं के ऑर्गेज्म के बारे में इस तरह की कोई स्टडी की गई है। इस स्टडी में महिलाओं में ऑर्गेज्म मापने के लिए साइकोमीट्रिक टूल का इस्तेमाल किया गया। प्रोफेसर जनीनी बताते हैं, ''हमारा मकसद था कि हम सेक्स से जुड़ी अलग-अलग क्रियाओं जैसे इंटरकोर्स, मास्टरबेशन और अन्य सेक्सुअल तरीकों से महिलाओं में यौन सुख की मात्रा मापना।''
क्या है ऑर्गेज्मोमीटर?
जनीनी बताते हैं कि ऑर्गेज्मोमीटर कोई उपकरण या मशीन नहीं है। ऑर्गेज्मोमीटर का मतलब है ऑर्गेज्म को मापना। वे अपनी बात को स्पष्ट करते हुए कहते हैं, ''जिस तरह दर्द को मापने के लिए उपकरण नहीं है, वैसे ही ऑर्गेज्म को मापने के लिए भी कोई मशीन या उपकरण नहीं है।'' ऑर्गेज्म या दर्द हर किसी के लिए अलग-अलग होता है। यह इंसान के निजी अनुभव पर निर्भर करता है। यही वजह है कि इसे मापने के लिए एक स्केल का इस्तेमाल ही सबसे बेहतर होगा।
जनीनी बताते हैं, ''दुनिया भर में दर्दनिवारक दवाइयों को एनालॉग स्केल के तहत मापकर ही बेचा जाता है। दर्द और आनंद दोनों एक ही सिक्के के अलग-अलग पहलू हैं। इसीलिए इन्हें मापने के लिए किसी मशीन की जगह स्केल का इस्तेमाल किया जा सकता है।''
क्या है ऑर्गेज्मोमीटर?
जनीनी बताते हैं कि ऑर्गेज्मोमीटर कोई उपकरण या मशीन नहीं है। ऑर्गेज्मोमीटर का मतलब है ऑर्गेज्म को मापना। वे अपनी बात को स्पष्ट करते हुए कहते हैं, ''जिस तरह दर्द को मापने के लिए उपकरण नहीं है, वैसे ही ऑर्गेज्म को मापने के लिए भी कोई मशीन या उपकरण नहीं है।'' ऑर्गेज्म या दर्द हर किसी के लिए अलग-अलग होता है। यह इंसान के निजी अनुभव पर निर्भर करता है। यही वजह है कि इसे मापने के लिए एक स्केल का इस्तेमाल ही सबसे बेहतर होगा।
जनीनी बताते हैं, ''दुनिया भर में दर्दनिवारक दवाइयों को एनालॉग स्केल के तहत मापकर ही बेचा जाता है। दर्द और आनंद दोनों एक ही सिक्के के अलग-अलग पहलू हैं। इसीलिए इन्हें मापने के लिए किसी मशीन की जगह स्केल का इस्तेमाल किया जा सकता है।''
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''जिस तरह के स्केल से दर्द की मात्रा का पता लगाया जाता है हमने उसी स्केल के जरिए ऑर्गेज्म की मात्रा मापी क्योंकि इन दोनों एहसासों का संबंध दिमाग के एक ही हिस्से से होता है। कोई एक चीज किसी इंसान के लिए दर्दनाक हो सकती है जबकि दूसरे के लिए उसमें सुख छिपा हो सकता है।'' जनीनी अपनी इस बात को एक उदाहरण देकर समझाते हैं, ''मान लीजिए आपने कोई बेहद मसालेदार खाना खाया, वह खाना आपके लिए बहुत बेस्वाद-दर्दनाक हो सकता है जबकि किसी दूसरे व्यक्ति को उसी खाने में बहुत अधिक स्वाद और सुख मिल सकता है।''
जनीनी सेक्स के बारे में भी ऐसा ही एक उदाहरण देते हैं, ''महिलाओं में यौन सुख के लिए क्लिटोरिस सबसे अहम हिस्सा होता है, लेकिन जरूरी नहीं कि हमेशा इससे आनंद ही मिले। बलात्कार जैसे मामलों में भी यौन संबंध ही बनाए जाते हैं, क्लिटोरिस के जरिए उत्तेजना पैदा करने की कोशिश होती है, लेकिन इस तरह के यौन संबंध में दर्द होता है। हमारा दिमाग हमें संदेश भेज देता है कि इस यौन संबंध में दर्द है आनंद नहीं।''
कैसे हुई यह स्टडी?
इस स्टडी में 526 महिलाओं को शामिल किया गया। इनमें से 112 महिलाएं सेक्सुएलिटी क्लीनिक में मरीज थीं जिन्हें सेक्स संबंधी कोई न कोई समस्या थी। इसके अलावा बाकी 414 महिलाओं को सेक्स संबंधी कोई समस्या नहीं थी। इन महिलाओं को एक ऑनलाइन माध्यम के जरिए चुना गया। रिसर्चरों की टीम ने एक वेबसाइट बनाई, जिसमें कुछ सवालों के जवाब इन महिलाओं को देने थे।
जनीनी सेक्स के बारे में भी ऐसा ही एक उदाहरण देते हैं, ''महिलाओं में यौन सुख के लिए क्लिटोरिस सबसे अहम हिस्सा होता है, लेकिन जरूरी नहीं कि हमेशा इससे आनंद ही मिले। बलात्कार जैसे मामलों में भी यौन संबंध ही बनाए जाते हैं, क्लिटोरिस के जरिए उत्तेजना पैदा करने की कोशिश होती है, लेकिन इस तरह के यौन संबंध में दर्द होता है। हमारा दिमाग हमें संदेश भेज देता है कि इस यौन संबंध में दर्द है आनंद नहीं।''
कैसे हुई यह स्टडी?
इस स्टडी में 526 महिलाओं को शामिल किया गया। इनमें से 112 महिलाएं सेक्सुएलिटी क्लीनिक में मरीज थीं जिन्हें सेक्स संबंधी कोई न कोई समस्या थी। इसके अलावा बाकी 414 महिलाओं को सेक्स संबंधी कोई समस्या नहीं थी। इन महिलाओं को एक ऑनलाइन माध्यम के जरिए चुना गया। रिसर्चरों की टीम ने एक वेबसाइट बनाई, जिसमें कुछ सवालों के जवाब इन महिलाओं को देने थे।
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जनीनी बताते हैं, ''यह एक स्मार्ट वेबसाइट है जिसके जरिए महिलाओं के व्यवहार को समझने में मदद मिली। जैसे कि अगर कोई महिला बाइसेक्सुअल है तो उससे पूछा गया कि पुरुष और महिला के साथ उसके अलग-अलग अनुभव कैसे रहे।'' इसी तरह के कई और सवालों में से एक सवाल ऑर्गेज्मोमीटर से जुड़ा भी था। इस सवाल के जरिए महिलाओं से उनके ऑर्गेज्म सुख को 0 से 10 के बीच एक उचित नंबर देने को कहा गया। इसमें 0 का मतलब था कोई ऑर्गेज्म नहीं जबकि 10 का मतलब पूरी तरह से संतुष्टि।
जनीनी ने बीबीसी को बताया कि महिलाओं पर इस बात का जोर नहीं था कि वे जल्दी से जल्दी ऑर्गेज्म का नंबर उन्हें दें। वे अपनी यौन क्रिया के तुरंत बाद या कुछ हफ्तों या फिर महीने भर बाद तक भी जवाब दे सकती थीं। जनीनी कहते हैं, ''मान लीजिए आप अलग-अलग डेंटिस्ट के पास गए, तो हम पूछ सकते हैं कि किस डेंटिस्ट ने आपको कम दर्द दिया। आप कुछ वक्त बाद भी याद करके बता देंगे कि आपको कितना दर्द हुआ और किसने कम दर्द दिया।'' हालांकि सेक्स के संबंध में जनीनी कहते हैं कि कोई भी व्यक्ति यह बता सकता है कि उसे मास्टरबेशन, इंटरकोर्स, ओरल सेक्स या किसी अन्य तरह की सेक्स क्रिया में से किसमें सबसे अधिक आनंद मिला।
'पुरुष-महिला' किसका कितना महत्व?
फ्रेंच भाषा का एक बेहद प्रचलित मुआवरा है- ''महिलाएं उदासीन या निष्क्रिय नहीं होतीं, बल्कि पुरुष नाकाबिल होते हैं।'' यह मुहावरा एक तरह से बताता है कि सेक्स के दौरान पुरुष की क्षमता ही यौन सुख के लिए सबसे अहम होती है, लेकिन प्रोफेसर जनीनी इस बात से पूरी तरह इत्तेफाक नहीं रखते। वे कहते हैं, ''इस तरह की बातें पुरुषवादी सोच का परिणाम हैं जिसमें महिलाओं को बस एक उपभोग की वस्तु की तरह पेश किया जाता था। पुरुष उनका किस तरह भोग करें यह पुरुषों पर ही निर्भर करेगा।''
जनीनी ने बीबीसी को बताया कि महिलाओं पर इस बात का जोर नहीं था कि वे जल्दी से जल्दी ऑर्गेज्म का नंबर उन्हें दें। वे अपनी यौन क्रिया के तुरंत बाद या कुछ हफ्तों या फिर महीने भर बाद तक भी जवाब दे सकती थीं। जनीनी कहते हैं, ''मान लीजिए आप अलग-अलग डेंटिस्ट के पास गए, तो हम पूछ सकते हैं कि किस डेंटिस्ट ने आपको कम दर्द दिया। आप कुछ वक्त बाद भी याद करके बता देंगे कि आपको कितना दर्द हुआ और किसने कम दर्द दिया।'' हालांकि सेक्स के संबंध में जनीनी कहते हैं कि कोई भी व्यक्ति यह बता सकता है कि उसे मास्टरबेशन, इंटरकोर्स, ओरल सेक्स या किसी अन्य तरह की सेक्स क्रिया में से किसमें सबसे अधिक आनंद मिला।
'पुरुष-महिला' किसका कितना महत्व?
फ्रेंच भाषा का एक बेहद प्रचलित मुआवरा है- ''महिलाएं उदासीन या निष्क्रिय नहीं होतीं, बल्कि पुरुष नाकाबिल होते हैं।'' यह मुहावरा एक तरह से बताता है कि सेक्स के दौरान पुरुष की क्षमता ही यौन सुख के लिए सबसे अहम होती है, लेकिन प्रोफेसर जनीनी इस बात से पूरी तरह इत्तेफाक नहीं रखते। वे कहते हैं, ''इस तरह की बातें पुरुषवादी सोच का परिणाम हैं जिसमें महिलाओं को बस एक उपभोग की वस्तु की तरह पेश किया जाता था। पुरुष उनका किस तरह भोग करें यह पुरुषों पर ही निर्भर करेगा।''
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जनीनी कहते हैं, ''यह बड़ी ही दकियानुसी सोच है कि यौन सुख के लिए पुरुष के हाथ, उनका लिंग या जीभ ही सबसे अहम होते हैं। मैं इसका पूरी तरह से विरोध करता हूं। मेरी स्टडी में पता चला है कि यौन सुख की आधी जिम्मेदारी महिलाओं की भी होती है।'' ''जिस तरह पुरुष में कभी-कभी शीघ्रपतन हो जाता है वैसे ही महिलाओं को भी ऑर्गेज्म प्राप्त करने में कम या ज्यादा वक्त लग जाता है। यौन संबंध का आनंद महिलाओं के लिए बदलता रहता है।''
प्रोफेसर जनीनी की इस स्टडी में जिन महिलाओं ने हिस्सा लिया उनकी उम्र 19 से 35 के बीच थी। स्टडी में यह भी पता चला कि ऑर्गेज्म की मात्रा उम्र के साथ बढ़ती जाती है। हालांकि प्रोफेसर जनीनी एक बात साफ करते हैं, ''हम यह नहीं कह रहे कि ऑर्गेज्म का सीधा संबंध उम्र से है, जब महिलाओं में पीरियड्स होने लगते हैं तो उनके ऑर्गेज्म में भी बदलाव होता है।
वैसे जब महिला 30 से 35 साल की उम्र के बीच में होती है तो वह ऑर्गेज्म के उच्च स्तर पर होती है।'' प्रोफेसर जनीनी यह भी कहते हैं कि ऑर्गेज्म को समझने के लिए मास्टरबेशन सबसे बेहतर तरीका है। इसके अलावा महिलाओं में ऑर्गेज्म का अंतर बहुत अधिक है जबकि पुरुषों में यह काफी हद तक समान रहता है।
प्रोफेसर जनीनी की इस स्टडी में जिन महिलाओं ने हिस्सा लिया उनकी उम्र 19 से 35 के बीच थी। स्टडी में यह भी पता चला कि ऑर्गेज्म की मात्रा उम्र के साथ बढ़ती जाती है। हालांकि प्रोफेसर जनीनी एक बात साफ करते हैं, ''हम यह नहीं कह रहे कि ऑर्गेज्म का सीधा संबंध उम्र से है, जब महिलाओं में पीरियड्स होने लगते हैं तो उनके ऑर्गेज्म में भी बदलाव होता है।
वैसे जब महिला 30 से 35 साल की उम्र के बीच में होती है तो वह ऑर्गेज्म के उच्च स्तर पर होती है।'' प्रोफेसर जनीनी यह भी कहते हैं कि ऑर्गेज्म को समझने के लिए मास्टरबेशन सबसे बेहतर तरीका है। इसके अलावा महिलाओं में ऑर्गेज्म का अंतर बहुत अधिक है जबकि पुरुषों में यह काफी हद तक समान रहता है।