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देखा है कभी ऐसा अनोखा मेला, जहां लाखों में बिकते हैं गधे, यहां देख लीजिए

Tue, 24 Oct 2017 09:46 AM IST
amarujala.com- Presented by: राजेश सैनी
amarujala.com- Presented by: राजेश सैनी Updated Tue, 24 Oct 2017 09:46 AM IST
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historical importance of donkeys fair organised in chitrakoot
पशु मेला
शहरों से दूर गांव-देहात के इलाकों में 'पशु मेलों' का कल्चर आज भी जिंदा है। ऐसे ही एक बेहद अनोखा पशु मेला धर्मनगरी 'चित्रकूट' में लगता है। यहां मंदाकनी नदी के तट पर लगने वाले इस ऐतिहासिक मेले का विशेष महत्व है। 

 
historical importance of donkeys fair organised in chitrakoot
गधा मेला
इस बार इस मेले की सबसे खास 'गधा' हो गया है। सुनकर अजीब लगा होगा नं... दरअसल, बात ही कुछ ऐसी है। इस मेले में इस बार 15 हजार अलग-अलग नस्ल के गधे लाए गए हैं। जो विशेष आकर्षण का केंद्र बन गए हैं। 

टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक इन गधों की बोली लाखों तक लगाई जा रही है। यही वजह है कि गधा इस मेले में सबसे खास हो गया है। इस मेले में उत्‍तर प्रदेश, मध्‍यप्रदेश, छत्‍तीसगढ़ और बिहार के विभिन्‍न जिलों के व्‍यापारी और जरूरतमंद गधों की खरीद-बिक्री करने आते हैं। जहां इन गधों के कद काठी के हिसाब से उनकी बोली 5 हजार से शुरू होकर लाखों तक पहुंच जाती है।

 
historical importance of donkeys fair organised in chitrakoot
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फिल्मी कलाकारों के नाम पर गधों के नाम
सबसे दिलचस्प बात ये है कि मेले में आए गधा मालिक गोरेलाल बताते हैं गधों के नाम बकायादा फिल्मी दुनिया के कलाकारों और नेताओं के नाम पर भी रखे हुए है, जिसे की उस गधें की कीमत ज्यादा लग सके। वहीं तीन दिनों में करोड़ों रूपए का व्यापार इस मेले में होता है।
 
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करोड़ों का होता हैं कारोबार
गधा व्यापारी गोरे लाल ने बताया कि इस मेले में तकरीबन 10 करोड़ रुपयों का कारोबार होता है। वहीं गधों की यहां पर अच्छी खाशी कीमत लगती है और चित्रकूट का मेला सब्से अच्छा माना जाता है। यहां काफी दूर-दूर से गधा व्यापारी आते हैं। गधा मेला आयोजक समिति के अध्यक्ष मुन्ना लाल मिश्र ने बताया कि सदियों से चले आ रहे इस मेले में इस बार महंगाई का असर भी नजर आया। अच्छी नस्ल के ऊंची कीमत वाले गधों को खरीददार नहीं मिल रहे है।

 
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क्या हैं मेले का इतिहास
मुन्ना लाल की मानें तो चित्रकूट में गधों का यह ऐतिहासिक मेला है। मुगल शासक औरंगजेब ने मेले का आयोजन करके उसमें आए सबसे शक्तिशाली गधों को अपनी फौज में शामिल किया था तब से लेकर आज तक गधों का मेला चला रहा है। बताया जाता है कि यह मेला दुनिया का सबसे बड़ा गधा मेले होता है।
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