पता है इन्सान और जानवर में क्या अंतर है? इन्सान में फीलिंग्स होती है लेकिन यहां ये भी नहीं कहा जा सकता कि जानवर में फीलिंग्स ही नहीं होती। उनमें भी हमारी ही तरह फीलिंग्स पैदा होती होती है…पर वे जाहिर नहीं कर पातें। मानव अपनी भावनाओं के साथ एक लंबा रिश्ता होता है। भावनाओं को व्यक्त करना इतना मुश्किल नहीं है, लेकिन कैमरे में वो ताकत है जहां ये तस्वीरों के माध्यम से जाहिर की जा सकती है लेकिन इस मूवमेंट को पूरी तरह से कैप्चर करना कहीं ज्यादा कठिन लगता है। यह एक कारण हो सकता है कि ‘एक तस्वीर हजारों शब्दों के लायक क्यों है’।
एक फायर फाइटर जंगल में आग बुझाने के दौरान एक भालू के बच्चे को पानी पिलाते हुए।
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Malnourished child's hand
युगांडा में एक मिशनरी एक बच्चे का हाथ थमाते हुए।
बिल्ली के सामने एक बच्चा बांसुरी बजाते हुए।
23 घंटे लगातार हार्ट ट्रांस्पलांट करने के बाद पेशेंट की देखबाल करता डॉक्टर...