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मोर्चरी में चलने लगी 'मुर्दे' की सांस, पोस्टमार्टम करते वक्त पकड़ लिया डॉक्टर का हाथ

Mon, 05 Mar 2018 03:30 PM IST
फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला Updated Mon, 05 Mar 2018 03:30 PM IST
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dead person come Alive at the time of Postmortem in chhindwara madhya pradesh

सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों की बड़ी लापरवाही एक बार फिर सामने आई है। घटना मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा के जिला अस्पताल की है। जहां डॉक्टर ने एक व्यक्ति को मृत घोषित कर उसका शव पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में रखवा दिया। अचानक पोस्टमार्टम के वक्त व्यक्ति जिंदा हो गया और डॉक्टर का हाथ पकड़ लिया।

dead person come Alive at the time of Postmortem in chhindwara madhya pradesh

पोस्टमार्टम करने पहुंचे डॉक्टर के होश उस समय उड़ गए जब मरीज की पल्स चलने लगी। इसके बाद डॉक्टर ने तत्काल मरीज को सर्जिकल ओटी में शिफ्ट किया और सर्जन को इमरजेंसी कॉल पर बुलाया। फिर डॉक्टरों ने प्राइमरी इलाज के बाद उसे नागपुर रेफर कर दिया। जानकारी के मुताबिक छिंदवाड़ा के प्रोफेसर कॉलोनी निवासी हिमांशु को रोड एक्सीडेंट के बाद इलाज के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया था जहां से डॉक्टर ने उसे नागपुर रेफर कर दिया। परिजन ने बताया कि घायल हिमांशु को नागपुर के न्यूरॉन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। जहां से डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर वापस छिंदवाड़ा भेज दिया था।

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ड्यूटी पर तैनात डॉ. दिनेश ठाकुर ने पल्स जांच किया, उस समय मरीज की पल्स नहीं चलने के कारण उसे मृत घोषित कर शव मोर्चरी में रखने के निर्देश दे दिए। जब पोस्टमार्टम की तैयारी कर रहे स्वीपर को मरीज के शरीर में हरकत महसूस हुई तो उसने तुरंत डॉक्टर को बताया। इसके बाद मरीज का इलाज शुरू हुआ। मरीज के परिजन ने बताया कि घायल हिमांशु को करीब चार घंटे तक मोर्चरी में रखा गया था।

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बता दें कि घटना के बाद गंभीर हालत में हिमांशु को छिंदवाड़ा के एक निजी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था जहां से उसे जिला अस्पताल भेज दिया गया था। प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. सीएम गेडाम ने बताया कि मरीज का रेशप्रेरेशन और प्लस नहीं चलने के कारण ब्रेन डेड मानकर मृत घोषित किया गया। उन्होंने बताया कि इस स्थिति में मरीज का हार्ट और ब्रेन काम नहीं करता है इसलिए डॉक्टर ने मरीज को मृत घोषित किया था। चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिनेश ठाकुर ने बताया कि, परिजन के कहने पर गाड़ी में ही मरीज की पल्स जांच की गई, उस समय पल्स रेशप्रेरेशन नहीं चलने पर मरीज को मृत घोषित किया गया था। हलांकि कई बार एकाध मरीज की पल्स लौट आती है, इस मरीज के साथ ऐसा ही हुआ है।

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