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आपके घर में लगा AC कब हो जाता है जानलेवा, अगर जान लेंगे तो चकराने लगेगा सिर

विकास त्रिवेदी, बीबीसी संवाददाता Updated Fri, 05 Oct 2018 10:14 AM IST
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एक अक्टूबर की रात पति, पत्नी और आठ साल का बच्चा एसी ऑन कर सोते हैं। चेन्नई का ये परिवार दो अक्टूबर की सुबह नहीं देख पाया। दरवाजा तोड़कर भीतर घुसी पुलिस को इन तीनों लोगों की लाश मिली। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, पुलिस को जांच में पता चला कि इन तीनों की मौत की वजह एयरकंडीशनर से लीक हुई जहरीली गैस बनी।

पुलिस ने बताया कि रात को ये परिवार बिजली जाने पर इनवर्टर ऑन करके सोया था, लेकिन रात में बिजली आ गई और एसी से लीक हुई गैस से परिवार के तीनों सदस्यों की मौत हो गई। एसी की वजह से जान को खतरे का ये पहला मामला नहीं है।

इससे पहले एसी का कंप्रेशर फटने की वजह से लोगों की जान जा चुकी है। ऐसी भी रिपोर्ट्स हैं जिसमें घरों और दफ्तरों में एसी से लोगों को सिर दर्द, सांस लेने में दिक्कतें हुई हैं। ऐसे में सवाल ये कि इसकी वजह क्या है जिससे ठंडक पहुंचाने वाला एसी जानलेवा बन जाता है और घर या दफ्तर में एसी लगा हो तो किन बातों का जरूर ख्याल रखा जाना चाहिए।
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जब AC बन जाता है सेहत के लिए खतरनाक

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (CSE) में प्रोग्राम मैनेजर अविकल सोमवंशी ने बीबीसी हिंदी से इस बारे में बात की। अविकल सोमवंशी बताते हैं, ''अभी जो मॉर्डन एसी हैं उसमें पहले के मुकाबले कम जहरीली गैस इस्तेमाल की जाती है। ये R-290 गैस होती है, इसके अलावा भी कई और गैस हैं।

पहले क्लोरो फ्लोरोकार्बन का इस्तेमाल किया जाता था। ये वही गैस है जिसे ओजोन लेयर में सुराख के लिए जिम्मेदार माना जाता रहा है। बीते करीब 15 सालों से इस गैस के इस्तेमाल को खत्म करने की बात की जा रही है। फिर हाइड्रो क्लोरो फ्लोरो कार्बन का इस्तेमाल हुआ। अब इसे भी हटाया जा रहा है।''

आपके मन में ये सवाल आ रहा होगा कि आपके घर में जो एसी है, उसमें कौन सी गैस होनी चाहिए। इसका जवाब अविकल सोमवंशी देते हैं, ''अभी भारत में जिस गैस का ज्यादातर इस्तेमाल हो रहा है, वो हाइड्रो फ्लोरो कार्बन है।
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कुछ कंपनियों ने प्योर हाइड्रो कार्बन के साथ एसी बनानी शुरू की है। पूरी दुनिया में इसी गैस के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। ये गैस बाकियों से बेहतर होती हैं। इसके अलावा कोशिश ये भी की जा रही है कि नैचुरल गैसों का इस्तेमाल किया जा सके।''

दिल्ली में प्राइवेट अस्पताल में प्रैक्टिस कर रहे डॉक्टर कौशल के मुताबिक, 'क्लोरो फ्लोरो से सीधे हमारे शरीर पर कोई असर नहीं होता है, लेकिन अगर ये गैस लीक होकर वातावरण में मिल जाए तो नुकसानदायक हो सकती है।' CSE के मुताबिक, एसी से निकली गैस से सिर दर्द की शिकायतें तो होती हैं, लेकिन मौत कम ही मामलों में होती है।

अगर आपके घर का एसी लीक हो रहा है तो ये पता करना मुश्किल होता है। CSE के मुताबिक, एसी की गैस की कोई गंध नहीं होती है, लेकिन इसके बावजूद भी गैस लीक इन कुछ वजहों से होती है, जिस पर ध्यान रखकर इसका पता लगाया जा सकता है।
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-अगर आपका एसी सही से फिट नहीं है
-जिन पाइपों में गैस दौड़ती है, वो सही से काम करें
-पुराने एसी की ट्यूब में लगी जंग
-अगर एसी अच्छे से ठंडा नहीं कर रहा हो

घर में AC, इन बातों का रखें खयाल
-हर साल सर्विस करवाएं
-दिन में एक बार कमरे की खिड़कियां-दरवाजें खोल दें
-सर्विस किसी भरोसेमंद, सर्टिफाइड मैकेनिक से करवाएं
-स्प्लिट एसी विंडो एसी के मुकाबले ज्यादा बेहतर
-गैस की क्वालिटी का ध्यान रखें
-गलत गैस डालने से भी दिक्कत होती है
-सारे वक्त कमरे, खिड़कियों को बंद न रखें ताकि प्रदूषित हवा निकल सके

अवकिल सोमवंशी जोड़ते हैं, ''जब आप कमरे की खिड़कियां या दरवाजें खोलें तो एसी बंद करना न भूलें। ऐसा करने से आपके बिजली का बिल ज्यादा नहीं बढ़ेगा। सुबह जब आप एसी बंद कर देते हैं, तब अपने खिड़कियां- दरवाजे खोल दें।''
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एसी का तापमान कितना रखें?
पलंग या सोफे पर बैठकर टीवी देखते हुए अक्सर आप एसी का रिमोट उठाकर तापमान 16 या 18 तक ले आते हैं। CSE की मानें तो ऐसा करना आपकी सेहत पर असर डाल सकता है। घरों या दफ्तरों में एसी का तापमान 25-26 डिग्री सेल्सियस ही रखना चाहिए। दिन के मुकाबले रात में तापमान कम रखा जा सकता है। ऐसा करने से सेहत भी ठीक रहेगी और बिजली का बिल भी कम आएगा। लेकिन अगर आप एसी का तापमान इससे कम रखेंगे तो एलर्जी या सिरदर्द शुरू हो सकता है। बुजुर्गों और बच्चों की इम्युनिटी सिस्टम कमजोर होता है, ऐसे में एसी का तापमान सेट करते वक्त इसका खयाल रखना होगा।

एसी कितने घंटे चलाना चाहिए?
इसके जवाब में CSE के प्रोग्राम मैनेजर कहते हैं, ''अगर आपके घर अच्छे से बने हैं, बाहर की गर्मी अंदर नहीं आ रही है तो आप एक बार एसी चालू करके ठंडा होने पर बंद कर सकते हैं। एक बात कही जाती है कि अगर आप 24 घंटे एसी में रहेंगे तो आपकी इम्युनिटी कम हो सकती है। आपका कमरा अगर पूरी तरह बंद है तो एक वक्त के बाद उसमें ऑक्सीजन की कमी हो जाएगी। ये जरूरी है कि कहीं न कहीं से ताजा हवा अंदर आए।'' एसी सिर्फ घरों में ही नहीं रहता। शीशे की बड़ी खिड़कियों वाले दफ्तरों में भी एसी होता है। अगर आपके दफ्तर में एसी होगा तो शायद आपने भी कई बार कांपते हुए काम किया हो।

दफ्तरों में एसी का तापमान कम क्यों?
अविकल सोमवंशी कहते हैं, ''दफ्तरों में एसी का तापमान कम रखने की आदत विदेशों से आई है। वहां लोग ठंडे में रहते हैं, लेकिन भारत में लोगों को गर्म में रहने की आदत होती है। ऐसे में जब इतने कम तापमान में लोग रहते हैं तो छींक आना और सिर दर्द जैसी दिक्कतें शुरू होती हैं। दफतरों में एसी कम रखने से सेहत, बिजली बिल और आपके काम की गुणवत्ता पर असर होता है।''
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