साल 2014 में बनी 'मोदी लहर' इस वर्ष 2019 में आंधी का रूप ले चुकी है। इस आंधी का प्रभाव इतना प्रचंड था कि कांग्रेस का 21 राज्यों में खाता ही नहीं खुला, कांग्रेस के कई दिग्गज अपनी परंपरागत सीट भी नहीं बचा पाए, इस आंधी में खुद कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी अपनी पारंपरिक और गांधी परिवार की विरासत रहीं सीट भी गवां बैठे।
लहर बीजेपी की हो या आंधी मोदी की, इस 36 साल के युवा को कोई नहीं हरा पाया आज तक
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लेकिन कहते है न जब तेज आंधी आती है तो पेड़ अपनी जड़ के साथ मजबूती से जुड़ जाते हैं और आंधी उन्हें उखाड़ नहीं पाती है। देश में जब मोदी नाम की आंधी ईवीएम से निकल रहीं थी तो झारखंड के विजय हांसदा भी अपनी सीट पर मजबूती से डटे रहे और मोदी नाम की आंधी विजय हांसदा जैसे पेड़ को उखाड़ नहीं पाई।
36 वर्षीय विजय हांसदा ने यह कारनामा पहली बार नहीं किया, 2014 में भी देश में जब मोदी लहर चल रही थी तब भी इस शख्स ने अपने क्षेत्र में जीत हसिल की थी। उन्हें इस बार 507830 वोट मिले जबकि भाजपा के हेमलाल मुर्मू को 408635 वोट मिले उन्होंने अपनी संसदीय सीट तकरीबन 99 हजार वोटों से जीती है।
विजय हांसदा राजमहल लोकसभा के पूर्व कांग्रेसी सांसद व लोकप्रिय नेता थॉमस हांसदा के बेटे हैं। राजनीति के मैदान में इस योद्धा ने साल 2009 में कदम रखा था। 36 साल के इस युवा ने मोदी लहर के बीच अनुभवी व राजनीति के धुरंधर हेमलाल मुर्मू को मात दे दी।
राजमहल लोकसभा क्षेत्र में दूसरी बार सांसद बने विजय हांसदा के बारे में कहा जाता है कि वे क्षेत्र के आदिवासी और मुस्लिम वोटरों के ध्रुवीकरण में माहिर हैं। इसी ध्रुवीकरण का नतीजा है कि इस बार पाकुड़, बरहेट, बोरियो, महेशपुर और लिट्टीपाड़ा विधानसभा में झामुमो को अप्रत्याशित बढ़त मिली है