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बांग्लादेश का कसाई: कहानी एक ऐसे शख्स की, जिसने एक ही रात में 7000 लोगों को मरवा दिया

Fri, 30 Apr 2021 09:59 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नवनीत राठौर Updated Fri, 30 Apr 2021 09:59 PM IST
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Know About Tikka Khan Butcher Of Bangladesh Painful Story Of Bangladesh Genocide 1971
टिक्का खान - फोटो : सोशल मीडिया

इतिहास के पन्नों में आपने चंगेज खान, हलाकू और तैमूरलंग जैसे कई खूनी लोगों के बारे में पढ़ा होगा, जिन्होंने हजारों-लाखों लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। आज हम आपको कुछ इसी तरह के एक खूनी शख्स के बारे में बताएंगे, जिसने एक ही रात में सात हजार लोगों का कत्ल करवा दिया था। इस शख्स को दुनिया 'बूचर ऑफ बांग्लादेश' यानी 'बांग्लादेश का कसाई' कहती है। उस रात उसने इतनी बर्बरता की कि उस दौर के लोग आज भी उसका नाम सुनकर ही सिहर उठते हैं।

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टिक्का खान - फोटो : सोशल मीडिया

टिक्का खान नामक यह शख्स पाकिस्तानी सेना का 4-स्टार जनरल था और पाकिस्तान का पहला थल सेनाध्यक्ष भी था। इसका जन्म 10 फरवरी 1915 को रावलपिंडी के पास ही एक गांव में हुआ था। टिक्का खान भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून से पढ़ाई करने के बाद साल 1935 में ब्रिटिश भारतीय सेना में भर्ती हुआ था। उसके बाद 1940 में वह कमीशंड ऑफिसर बन गया। उसने जर्मनी के खिलाफ दूसरे विश्व युद्ध में भी हिस्सा लिया था।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

बता दें कि बंटवारे के बाद टिक्का खान पाकिस्तान चला गया और वहां की सेना में मेजर बन गया। उसने 1965 में भारत-पाक लड़ाई में भी हिस्सा लिया था। टिक्का खान की बर्बरता की कहानी की शुरुआत साल 1969 से होती है, जब याह्या खान पाकिस्तान के राष्ट्रपति बने। ठीक उसी समय पूर्वी पाकिस्तान (जो अब बांग्लादेश है) को अलग देश बनाने की मांग ने जोर पकड़ लिया। इसलिए टिक्का खान को वहां भेजा गया।

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'बांग्लादेश का कसाई' - फोटो : सोशल मीडिया

टिक्का खान ने पूर्वी पाकिस्तान जाते ही सीधे सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी, जिसे 'ऑपरेशन सर्चलाइट' का नाम दिया गया। इस ऑपरेशन के तहत टिक्का खान के आदेश पर पाकिस्तानी सेना ने जो किया, उसे शायद ही इतिहास कभी भुला पाए। पूर्वी पाकिस्तान में हजारों लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया। एक रिपोर्ट के मुताबिक, ढाका में तो एक ही रात में सात हजार लोगों को मार दिया गया। क्या बच्चे, क्या बूढ़े और क्या महिलाएं, किसी को भी नहीं बख्शा गया।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

रॉबर्ट पेन ने बांग्लादेश के इस नरसंहार पर एक किताब लिखी है, जिसमें उन्होंने बताया है कि 1971 के महज नौ महीनों में बांग्लादेश में करीब दो लाख औरतों और लड़कियों के साथ दुष्कर्म हुआ था। इस घटना के बाद ही टाइम मैगजीन ने टिक्का खान को 'बांग्लादेश का कसाई' कहा था।

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