दुनियाभर में ऐसी कई जगहें हैं, जो अजब-गजब रहस्यों से भरी हुई हैं। कुछ जगह तो ऐसे हैं, जिनके बारे में किसी को कुछ भी नहीं पता है। आज हम आपको एक ऐसी ही रहस्यमय घाटी के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे आजतक कोई भी नहीं ढूंढ पाया है। हालांकि, ऐसा माना जाता है कि ये घाटी अरुणाचल प्रदेश और तिब्बत के बीच में ही कहीं पर स्थित है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
दरअसल, इस घाटी को 'शांगरी-ला घाटी' के नाम से जाना जाता है। शांगरी-ला को वायुमंडल के चौथे आयाम यानी समय से प्रभावित जगहों में से एक माना जाता है। ऐसी जगहों पर समय थम सा जाता है और लोग जब तक चाहें तब तब जीवित रह सकते हैं।
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शांगरी-ला घाटी का जिक्र अरुण शर्मा ने अपनी किताब 'तिब्बत की वह रहस्यमय घाटी' में भी किया है। अरुण शर्मा कहते हैं कि युत्सुंग नाम के एक लामा ने उन्हें बताया कि शांगरी-ला घाटी में काल का प्रभाव नगण्य है और वहां मन, प्राण और विचार की शक्ति एक विशेष सीमा तक बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि अगर कोई वस्तु या इंसान वहां अनजाने में भी चला जाए, तो वह वापस दुनिया में कभी नहीं आ पाता है।
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हालांकि, युत्सुंग खुद इस रहस्यमय घाटी में जा चुके हैं। उनका दावा है कि वहां ना तो सूर्य का प्रकाश था और ना ही चंद्रमा। चारों तरफ एक रहस्यमय प्रकाश फैला हुआ था। इस घाटी का जिक्र तिब्बती भाषा की किताब 'काल विज्ञान' में भी मिलता है। यह किताब आज भी तिब्बत के तवांग मठ के पुस्तकालय में रखी हुई है।
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दुनियाभर के कई लोग 'शांगरी-ला घाटी' का पता लगाने की नाकाम कोशिश कर चुके हैं। कहते हैं कि इनमें से तो कई हमेशा-हमेशा के लिए गायब भी हो गए। ऐसा भी कहा जाता है कि चीन की सेना ने इस घाटी को ढूंढने की बहुत कोशिश की, लेकिन वो इस जगह का पता नहीं लगा सके।