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'मेरा शरीर पत्थर जैसा होने लगा है, मुझे बहुत दर्द होता है'

Mon, 25 Sep 2017 11:36 AM IST
टोबी वेड
टोबी वेड Updated Mon, 25 Sep 2017 11:36 AM IST
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JAY VIRDEE suffering from SCLERODERMA with lots of pain
'मेरी बाज़ुओं में उठता दर्द हर वक्त मुझे याद दिलाता है कि मेरा शरीर जल्दी ही पत्थर जैसा होने वाला है।' यह कहना है 37 साल की जेय वर्डी का। कुछ साल पहले वो एक स्कूल में शिक्षिका थीं लेकिन एक दुर्लभ बीमारी ने उनकी जिंदगी पूरी तरह से बदल कर रख दी। जेय वर्डी ऐसी लाइलाज बीमारी से पीड़ित हैं जिसमें उनका शरीर धीरे-धीरे कठोर पत्थर जैसा होता जा रहा है। इस बीमारी का नाम है 'स्क्लेरोडर्मा'।


स्क्लेरोडर्मा की वजह से जेय वर्डी की त्वचा और जोड़ों में कठोरता आने लगी है। उनके फेफड़ों पर भी इसका असर पड़ रहा है और डॉक्टरों का कहना है कि अभी उनकी हालत और ज्यादा खराब हो सकती है। मुश्किलों भरा जीवन वर्डी को नहीं पता कि आने वाला वक्त उनके लिए कितना मुश्किल भरा हो सकता है। शायद इस बीमारी की वजह से वो नजदीक की दुकान तक भी न जा सकें या आराम से सांस भी न ले पाएं।

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'मेरा शरीर पत्थर जैसा होने लगा है, मुझे बहुत दर्द होता है'

JAY VIRDEE suffering from SCLERODERMA with lots of pain

बाहर से सामान्य सा दिखने वाला वर्डी का शरीर भीतर ही भीतर कई दिक्कतों से जूझ रहा है। कपड़ों के अंदर वो जो महसूस कर रही हैं उसे बाहर किसी को नहीं बता सकतीं। अपनी बीमारी की वजह से वर्डी के कई सपने अधूरे रह गए हैं। शादी करना और मां बनना उनके इन्हीं सपनों का एक हिस्सा था लेकिन फिलहाल सब धुंधला सा हो गया है। वर्डी कहती हैं, 'मुझे लगता है कि एक दिन मेरा पूरा शरीर पत्थर बन जाएगा। मैं मुस्कुरा भी नहीं पाउंगी। मैं किसी पत्थर की मूरत सी बनकर रह जाउंगी, लेकिन वर्डी की जिंदगी हमेशा से ऐसी नहीं थी।

साल 2010 में वो एक माध्यमिक स्कूल में आईटी की अध्यापिका थीं। उन्हें छुट्टियों में घूमना बहुत पसंद था। ऐसी ही एक छुट्टियों में वो ग्रीक आइलैंड घूमने गईं थी जब पहली बार उनकी दोस्त कैरोलीन ने उनकी त्वचा में कुछ बदलाव देखा। शुरुआत में वर्डी ने अपनी त्वचा में आ रहे इन बदलावों को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया। उन्हें नहीं पता था कि एक दिन यह मामूली सी लगने वाली समस्या इतनी गंभीर बीमारी बनकर उभरेगी।

'मेरा शरीर पत्थर जैसा होने लगा है, मुझे बहुत दर्द होता है'

JAY VIRDEE suffering from SCLERODERMA with lots of pain

वर्डी को अपनी बीमारी पता लगने में तीन साल लग गए। इस बीच उन्होंने बहुत से टेस्ट करवाए। कई डॉक्टरों से सलाह ली। वर्डी के लिए जिंदगी हर दिन मुश्किल होने लगी। उनके लिए पेन उठाना, टाइपिंग करना किसी चुनौती जैसा हो गया। वर्डी बताती हैं, 'लगभग 18 महीनों तक डॉक्टरों से सलाह लेने के बाद, मुझे यह झटका लगा। मुझे याद है मैं उस वक्त कार चला रही थी और अचानक ही मैं रोने लगी, मैंने अपने डॉक्टर से मुलाकात की और उनसे स्पष्ट रूप से पूछा कि मुझे क्या बीमारी हो गई है।'

इसके बाद वर्डी ने स्कूल छोड़ दिया। उनका करियर, सपने सब कुछ अधर में लटक गए। वर्डी के दोस्तों को विश्वास नहीं हुआ कि उन्हें इस तरह की अजीब बीमारी हो गई है। वर्डी कहती हैं, 'ये बीमारी बाहर से नहीं दिखती। इसे सिर्फ मैं अपने अंदर महसूस कर पाती हूं।' ये बीमारी वर्डी के फेफड़ों तक पहुंच गई है। उन्हें सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है। इसी तरह उनकी स्वर नली (वोकल कॉर्ड) में भी परेशानियां पैदा होने लगी हैं। 

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'मेरा शरीर पत्थर जैसा होने लगा है, मुझे बहुत दर्द होता है'

JAY VIRDEE suffering from SCLERODERMA with lots of pain

वर्डी कहती हैं, 'मैं किसी के साथ रिश्ते में नहीं बंधना चाहतीं। मुझे अपनी बीमारी का पता है, इसलिए किसी से शादी करना फिर बच्चे पैदा करना, यह सब बहुत मुश्किल फैसले हैं। मुझे बच्चों से प्यार है। मैंने लगभग 20 हजार बच्चों को पढ़ाया है लेकिन अफसोस मुझे खुद मां बनने से डर लग रहा है।' लोगों के बीच इस बीमारी को लेकर जागरुकता बहुत ही कम है। ब्रिटेन में इस बीमारी के संबंध में काम करने वाली एकमात्र चैरिटी स्क्लेरोडर्मा एंड रेयनॉड यूके (एसआरयूके) के अनुसार कुछ लोग तो स्क्लेरोडर्मा से पीड़ित लोगों को छूने से भी डरते हैं।

चैरिटी की प्रमुख एमी बेकर बताती हैं, 'हमने एक रिसर्च की जिसमें पता चला कि सिर्फ 1 प्रतिशत लोग स्क्लेरोडर्मा के लक्षणों की पहचान कर पाते हैं। वहीं 24 प्रतिशत लोग इस बीमारी से पीड़ित लोगों को छूने से भी डरते हैं।' वर्डी का इलाज कर रही डॉक्टर रिचर्ड रसैल कहती हैं कि इन्हेलर की मदद से वर्डी सांस तो ले सकती हैं लेकिन इस बीमारी का कोई पुख्ता इलाज उनके पास नहीं है। वर्डी कहती हैं, 'मुझे खिलकर मुस्कुराना पसंद है। मैं अपनी क्लास में जब भी जाती थी तो बच्चों से मुस्कुराते हुए मिलती थी लेकिन अब ये मुश्किल होता जा रहा है। फिर भी मैं कोशिश करती हूं कि जितना हो सके उतना तो मुस्कुरा सकूं।'

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'मेरा शरीर पत्थर जैसा होने लगा है, मुझे बहुत दर्द होता है'

JAY VIRDEE suffering from SCLERODERMA with lots of pain

क्या है स्क्लेरोडर्मा ?
यह एक लाइलाज बीमारी है जिसमें शरीर के स्वस्थ टिश्यू पर असर पड़ता है। इस वजह से त्वचा का हिस्सा कठोर होने लगता है। ये इस बीमारी का पहला लक्षण है। इस बीमारी में बहुत अधिक कोलेजन बनने लगता है जो शरीर के जोड़ों और भीतरी हिस्सों पर असर करता है और उन्हें कमजोर बनाने लगता है। सर्दियों में धीरे-धीरे उंगलियों और पांव के अंगूठे सफेद होने लगते हैं, जो बाद में कठोर हो जाते हैं।

स्क्लेरोडर्मा का एक प्रकार है 'सिस्टमिक स्क्लेरोसिस', इसमें शरीर के भीतरी अंगों विशेषकर फेफड़ों पर असर पड़ता है। इस बीमारी का नाम ग्रीक शब्द स्क्लेरो और डर्मा से मिलकर बना है, जिसका अर्थ होता है कठोर त्वचा। यह बीमारी पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में 4 गुना ज्यादा होती है।

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