वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के वजह से पूरी दुनिया के अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा असर पड़ा है। हाल ही में हमारे देश के जीडीपी के जो आंकड़े जारी हुए, उसके मुताबिक भारत की जीडीपी -24 फीसदी के करीब तक लुढ़क गई। कोरोना वायरस के वजह से भारत की अर्थव्यवस्था सबसे बुरी तरह प्रभावित हुई है। ऐसे में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अर्थव्यवस्था पर पड़े इस असर की तुलना 'एक्ट ऑफ गॉड' से की। आइए जानते हैं एक्ट ऑफ गॉड क्या होता है?
आखिर क्या होता है 'एक्ट ऑफ गॉड', जानिए कब और कैसे होता है लागू?
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क्या होता है एक्ट ऑफ गॉड?
वैधानिक तौर पर एक्ट ऑफ गॉड को एक्ट ऑफ गॉड को फोर्स मैज्योर क्लॉज (FMC) के तौर पर समझा जाता है। एक्ट ऑफ गॉड एक ऐसी स्थिति है, जिसमें दोनों तरफ की पार्टियां दायित्व मुक्त हो जाती हैं। क्योंकि यह स्थिति किसी के वश में नहीं होती है। एक्ट ऑफ गॉड एक फ्रेंच टर्म है। इसमें युद्ध जैसी आपातकाल परिस्थितियों के साथ प्राकृतिक आपदाओं को शामिल किया जाता है।
क्या हैं FMC के प्रावधान?
संकट की स्थितियों को ध्यान में रखते हुए ज्यादातर कमर्शियल अनुबंधों में इस क्लॉज को रखा जाता है। इस क्लॉज के लागू होते ही अनुबंध करने वाली दोनों पार्टियां अनुबंध पर आश्रित नहीं रहती, यानी दायित्वों से मुक्त हो जाती हैं। उदाहरण के लिए अगर कोई इंश्योरेंस कंपनीकिसी को इंश्योरेंस दे रही है, तो वह संकट के चलते यानी इस क्लॉज के लागू होते ही इंश्योरेंस की रकम देने से इनकार कर सकती है।
महामारी और एक्ट ऑफ गॉड
सरकारी स्तर पर इस एक्ट के लिए जो नई नीति है, उसमें व्यापारिक प्रतिबंधों, बॉयकॉट और महामारी जैसी स्थितियों को भी सूचीबद्ध किया गया है। इस क्लॉज के अलावा, इंडियन कॉन्ट्रैक्ट एक्ट 1872 भी इस तरह का प्रावधान देता है। हालांकि, इस क्लॉज को लागू करते समय दोनों पार्टियों के बीच बातचीत की गुंजाइश रहती है।
और देशों में क्या हैं इसके मायने?
कोरोना वायरस की शुरूआत वाले देश चीन में इंटरनेशनल ट्रेड प्रमोशन की संस्था ने कारोबारों के लिए FMC लागू करने के लिए कहा। इससे पहले साल 2002 में सार्स के वक्त भी चीन में यह व्यवस्था लागू की गई थी। इस महामारी के वजह से अप्रैल में सिंगापुर ने भी व्यापारों को राहत देने के लिए कोविड 19 एक्ट लागू किया था। वहीं पेरिस की एक कोर्ट ने भी जुलाई में महामारी को FMC के साथ डील करने की बात कही थी।