Moon Mystery: इंसान ने चांद पर पहला कदम 20 जुलाई 1969 को रखा था। अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रॉन्ग चांद पर पहुंचने वाले दुनिया के पहले इंसान थे। 50 साल बीत जाने के बाद भी दुनिया के लिए चांद रहस्य है। भारत का चंद्रयान 3 चांद पर कुछ ही दिनों में पहुंचने वाला है। चांद के रहस्यों को जानने का दुनिया को बेसब्री से इंतजार है। चंद्रमा आज भी विज्ञान के लिए एक बड़ी पहेली है। चंद्रमा के कुछ ऐसे रहस्य हैं जिनसे आज भी पर्दा नहीं उठाया जा सका है।
Moon Mystery: ये हैं चंद्रमा के हैरान करने वाले छह रहस्य, वैज्ञानिक आज तक नहीं उठा पाए पर्दा
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उन्होंने बताया कि अपोलो 11 चांद की चट्टानों से जुटाई गई 50 पाउंड मिट्टी लेकर आया था, जिसके बाद चांद की उत्पत्ति को लेकर शोध किया गया। किसी का कहना है कि चांद पर एक महासागर था, तो कुछ लोगों का कहना है कि पिघले लावा से बनी एक विशाल गेंद है, पृथ्वी की परिक्रमा करती है। दशकों बाद, यह परिकल्पना आई कि चंद्रमा का जन्म धरती से ही हुआ है। लेकिन नूह के मुताबिक, यह परिकल्पना अभी तक आधी-अधूरी है।
कैसे हुई पानी की उत्पत्ति
चांद पर पानी की बात नहीं की जा रही है, बल्कि बर्फ के कई ढेरों के बारे में बात की जा रही है। चांद की सतह के नीचे यह बर्फ की ढेर है। नूह ने कहा कि इस पानी को इकट्ठा कर अंतरिक्ष यान के लिए नई तरह का ईंधन बनाया जा सकता है। नूह पेट्रो के मुताबिक, अभी तक यह रहस्य है कि इतना पानी-बर्फ चंद्रमा पर कैसे पहुंचा? हम निश्चित रूप से इसका पता लगाएंगे।
चांद पर भूकंप
चांद पर आए दिन भूकंप आते रहते हैं। इस भूकंप को मूनक्वेक भी कहते हैं। अपोलो एज के सेसिमोमीटर्स ने सन् 1969 से 1977 तक भूकंप के झटकों को मापा है। डेटा से पता चला है कि चंद्रमा एक एक्टिव बॉडी है जो बासी बेजान चट्टान से काफी दूर है। लेकिन अभी 50 साल पुराने डेटा से इनको जानने की कोशिश की जा रही है। अभी वैज्ञानिक इस बात का पता नहीं लगा पाए हैं कि भूकंप की असली वजह क्या है?
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वैज्ञानिकों ने चांद का एक ही हिस्सा देखा है। इसका सिर्फ एक पक्ष पृथ्वी की तरफ है। सौर मंडल में यह चंद्रमाओं के लिए असामान्य बात नहीं है। लेकिन अभी तक भी साफ नहीं हो पाया है कि यह कब होता है, कौन सी स्थितियां इसकी वजह बनती हैं।
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