New Research: दुनियाभर के वैज्ञानिक बढ़ती उम्र के असर को कम करने की कोशिश में लगे हुए हैं। अब वैज्ञानिकों ने इससे संबंधित एक प्रयोग किया है जो हैरान करने वाला है। वैज्ञानिकों ने एक बूढ़े चूहे को जवान बना दिया। इसके लिए उन्होंने जवान चूहे के मल को बूढ़े चूहे में ट्रांसप्लांट किया। इस रिसर्च के दौरान युवा चूहों से पुराने चूहों में फीकल माइक्रोब्स को ट्रांसप्लांट किया गया जिससे बूढ़े चूहों की आंत, आंख और दिमाग युवा चूहों जैसीं काम करने लगीं।
ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने बूढ़े चूहों को युवा बनाने के लिए मल का इस्तेमाल किया। यह आपको थोड़ा अजीबोगरीब लग रहा होगा, लेकिन यह बिल्कुल सच है। वैज्ञानिकों ने जब चूहों पर यह प्रयोग किया, तो उनमें युवा चूहों जैसे लक्षण दिखने लगे। वैज्ञानिकों ने जब बुजुर्ग चूहों में युवा चूहों के मल को ट्रांसप्लांट किया, तो बूढ़े चूहों में शरीर के लिए फायदेमंद माइक्रोब्स यानी रोगाणु पहुंच गए।
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वैज्ञानिकों ने बूढ़े चूहे को बना दिया जवान
- फोटो : Pixabay
दरअसल यह कोई बुजुर्ग से जवान बनने का तरीका नहीं है। हालांकि जैसे-जैसे इंसान की उम्र बढ़ती जाती है, शरीर कमजोर होता जाता है और आतें भी पहले जैसा काम नहीं करती हैं, लेकिन इससे यह जरूर साफ हुआ है कि अगर आतें मजबूत रहती हैं, तो लंबे समय तक इंसान की शारीरिक क्षमता मजबूत रह सकती है। फिलहाल सिर्फ चूहों पर इसका प्रयोग किया गया है।
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वैज्ञानिकों ने बूढ़े चूहे को बना दिया जवान
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इस रिसर्च को माइक्रोबायोम में प्रकाशित किया गया है। इस शोध में बताया गया है कि इस परिकल्पना का टेस्ट किया गया है कि आंतों के माइक्रोबायोटा में हेर-पेर किया जाता है, तो उम्र से संबंधिति बीमारियों के बढ़ने पर असर होता है। सबसे खास बात यह है कि असर डालने वाली मस्तिष्क और रेटिना पर सूजन आती है।
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वैज्ञानिकों ने बूढ़े चूहे को बना दिया जवान
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जब वैज्ञानिकों ने युवा चूहों के मल के रोगाणुओं को बूढ़े चूहों में ट्रांसप्लांट किया, तो इससे सूजन खत्म होने लगी। इसके बाद यह प्रयोग उलट किया गया यानी बूढ़े चूहों के मल के रोगाणुओं को युवा चूहों में ट्रांसप्लांट किया, तो युवा चूहों में आंत की उम्र ज्यादा और सूजन नजर आने लगी।
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वैज्ञानिकों ने बूढ़े चूहे को बना दिया जवान
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इन लक्षणों में आंत की परत में असर होता हुआ नजर आया। इससे बैक्टीरिया खून में पहुंच सकता है। रेटिनल डिजनरेशन से जुड़े प्रोटीन उच्च स्तर पर पहुंच गए, तो वहीं प्रतिरक्षा कोशिकाएं भी अति-सक्रिय हो गईं। वैज्ञानिक यह समझाना चाहते हैं कि आंत इंसान के सेहत से जुड़ी है। वह मानसिक स्वास्थ हो या शारीरिक।