विदेशी कंपनियों में करोड़ों का पैकेज छोड़कर देश में रोजगार सृजन का सपना लेकर लौटे मुजफ्फरपुर के चंदन राज को अब बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। सेमीकंडक्टर चिप्स के निर्माण में जुटे चंदन ने मुजफ्फरपुर में सुरेश चिप्स एंड सेमीकंडक्टर प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की थी। लेकिन खराब सड़क, बिजली और अन्य आधारभूत समस्याएं उनके काम में रुकावट बन रही हैं।
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सुरेश चिप्स एंड सेमीकंडक्टर प्राइवेट लिमिटेड
- फोटो : अमर उजाला
विदेशों से लौटकर शुरू की कंपनी
चंदन राज ने इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन में बीटेक के बाद सैमसंग, इंटेल और नोकिया जैसी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में मलेशिया, इस्राइल और शंघाई में काम किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान से प्रेरित होकर उन्होंने 2020 में मुजफ्फरपुर में अपनी सेमीकंडक्टर चिप्स की कंपनी स्थापित की। यह प्लांट देश में मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में इस्तेमाल होने वाले सेमीकंडक्टर चिप्स के निर्माण पर काम करता है।
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सुरेश चिप्स एंड सेमीकंडक्टर प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक चंदन राज
- फोटो : अमर उजाला
बुनियादी समस्याएं बन रहीं बाधक
चंदन ने बताया कि उनके ऑफिस और प्लांट के आसपास की सड़कें जर्जर स्थिति में हैं। बिजली की स्थिति भी दयनीय है और पिछले तीन साल से वह सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। इस तरह की बुनियादी समस्याओं के कारण उनकी कंपनी में आने वाले विदेशी क्लाइंट भी निराश होकर लौट जाते हैं। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया, इस्राइल, और ताइवान से आए क्लाइंट्स ने खराब इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते कंपनी के साथ काम करने से मना कर दिया।
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डीएम सुब्रत कुमार सेन
- फोटो : अमर उजाला
प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद उम्मीद जगी
चंदन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए अपनी समस्याएं साझा कीं, जो वायरल होने के बाद जिला प्रशासन का ध्यान आकर्षित कर सका। जिला प्रशासन ने मामले को संज्ञान में लेते हुए आश्वासन दिया कि दशहरा के बाद उनके ऑफिस के रास्ते और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा। मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने कहा कि मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत सड़क और नाले का निर्माण कार्य जल्द शुरू होगा।
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सुरेश चिप्स एंड सेमीकंडक्टर प्राइवेट लिमिटेड में काम करते कर्मचारी
- फोटो : अमर उजाला
रोजगार सृजन के प्रयासों में मिल रही चुनौतियां
चंदन का कहना है कि उन्होंने देश लौटकर बिहार में रोजगार के अवसर पैदा करने का सपना देखा था, लेकिन खराब आधारभूत संरचना के चलते उनका यह सपना अधूरा रह रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद उनकी समस्याओं का समाधान होगा। इससे उनकी कंपनी बेहतर तरीके से कार्य कर सकेगी और बिहार में रोजगार सृजन को बल मिलेगा।