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Flex Fuel: भारत में आई फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी, क्या हैं इसके फायदे-नुकसान, जानें सब कुछ
Tue, 29 Aug 2023 07:55 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Tue, 29 Aug 2023 07:55 PM IST
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Flex Fuel
- फोटो : Social Media
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पिछले कुछ वर्षों में हम फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी के बारे में काफी कुछ सुन रहे हैं। यह कोई नई तकनीक नहीं है क्योंकि फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की लोकप्रियता 1990 के दशक के मध्य में शुरू हुई थी। हालांकि हाल के दिनों में कई वाहन निर्माताओं ने फ्लेक्स-फ्यूल कारों या मोटरसाइकिलों को पेश करने की अपनी प्रतिबद्धता के बारे में तेजी से बात करना शुरू कर दिया है। भारत में सरकार इस तकनीक पर जोर दे रही है, जिसने वाहन निर्माताओं को इस सेगमेंट पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया है। हरित और स्वच्छ ईंधन और पावरट्रेन समाधानों पर बढ़ते फोकस के साथ, फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक को ज्यादा प्रमुखता मिली है।
Toyota Innova HyCross Flex Fuel MPV
- फोटो : Social Media
टोयोटा इनोवा देश के साथ-साथ दुनिया की पहली कार बन गई है जिसमें फ्लेक्स-फ्यूल इंजन है जो पूरी तरह से इथेनॉल पर चल सकता है। इसने इस हरित और स्वच्छ ईंधन और पावरट्रेन टेक्नोलॉजी के बारे में चर्चा को और तेज कर दिया है। हालांकि, फ्लेक्स-फ्यूल के बारे में कई सवाल हो सकते हैं, लेकिन यहां हम आपको इस बारे में वह सारी जानकारी दे रहे हैं जिसे जानने की जरूरत है।
Flex Fuel
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फ्लेक्स फ्यूल क्या है?
फ्लेक्स फ्यूल जिसे फ्लेक्सिबल ईंधन के रूप में भी जाना जाता है, एक वैकल्पिक ईंधन है जो पेट्रोल और मेथनॉल या इथेनॉल के मिश्रण से बना है। फ्लेक्स-ईंधन वाहन वे होते हैं जो इंटरनल कंब्शन इंजन से लैस होते हैं जिन्हें एक से ज्यादा तरह के ईंधन पर चलने के लिए डिजाइन किया गया है। ये इंजन पेट्रोल या इथेनॉल या मेथनॉल दोनों पर चल सकते हैं।
भारत में फ्लेक्स-फ्यूल इंजन को पेट्रोल और इथेनॉल पर चलने के लिए डिजाइन किया गया है। भारत के अलावा, अमेरिका और ब्राजील अन्य देश हैं जो फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक पर तेजी से ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इंजन और ईंधन प्रणाली में कुछ संशोधनों के अलावा, फ्लेक्स-ईंधन वाहन वस्तुतः सिर्फ पेट्रोल मॉडल के समान हैं।
फ्लेक्स फ्यूल जिसे फ्लेक्सिबल ईंधन के रूप में भी जाना जाता है, एक वैकल्पिक ईंधन है जो पेट्रोल और मेथनॉल या इथेनॉल के मिश्रण से बना है। फ्लेक्स-ईंधन वाहन वे होते हैं जो इंटरनल कंब्शन इंजन से लैस होते हैं जिन्हें एक से ज्यादा तरह के ईंधन पर चलने के लिए डिजाइन किया गया है। ये इंजन पेट्रोल या इथेनॉल या मेथनॉल दोनों पर चल सकते हैं।
भारत में फ्लेक्स-फ्यूल इंजन को पेट्रोल और इथेनॉल पर चलने के लिए डिजाइन किया गया है। भारत के अलावा, अमेरिका और ब्राजील अन्य देश हैं जो फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक पर तेजी से ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इंजन और ईंधन प्रणाली में कुछ संशोधनों के अलावा, फ्लेक्स-ईंधन वाहन वस्तुतः सिर्फ पेट्रोल मॉडल के समान हैं।
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Flex Fuel
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फ्लेक्स-ईंधन के फायदे
फ्लेक्स-फ्यूल के ड्राइवरों, देश और पृथ्वी के लिए भी कई फायदे हैं। ड्राइवरों के लिए, पेट्रोल और इथेनॉल के मिश्रण से बना फ्लेक्स ईंधन, पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में सस्ता आता है। इसका मतलब है कि इथेनॉल के साथ मिश्रित पेट्रोल सस्ता है, जिसकी वजह से वाहन मालिक को अल्पावधि में महत्वपूर्ण बचत होगी।
फ्लेक्स-फ्यूल के ड्राइवरों, देश और पृथ्वी के लिए भी कई फायदे हैं। ड्राइवरों के लिए, पेट्रोल और इथेनॉल के मिश्रण से बना फ्लेक्स ईंधन, पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में सस्ता आता है। इसका मतलब है कि इथेनॉल के साथ मिश्रित पेट्रोल सस्ता है, जिसकी वजह से वाहन मालिक को अल्पावधि में महत्वपूर्ण बचत होगी।
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गन्ने और मक्का से बनता है फ्लेक्स फ्यूल
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भारत जैसे देश के लिए, फ्लेक्स ईंधन के लिए हाई इथेनॉल उत्पादन का मतलब मकई और गन्ना जैसे एलिमेंट्स पर बढ़ता ध्यान है जो इथेनॉल के उत्पादन में इस्तेमाल किए जाते हैं। इससे कच्चे तेल के आयात पर खर्च होने वाले पैसे का एक बड़ा हिस्सा भारतीय किसानों के पास जा सकता है, जिससे उन्हें खुद बढ़ने और देश की अर्थव्यवस्था को बड़े पैमाने पर बढ़ाने में मदद मिलेगी।