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इलेक्ट्रिक कार मेंटेनेंस: ईवी की रेंज और बैटरी लाइफ रखनी है बरकरार? सर्विसिंग के दौरान कभी न भूलें ये पांच काम
Sun, 20 Sep 2026 12:07 PM IST
जागृति शुक्ला
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जागृति शुक्ला
Updated Sun, 20 Sep 2026 12:07 PM IST
सार
देश में ईवी की मांग तेजी से बढ़ रही है। पारंपरिक पेट्राेल-डीजल कारों की तुलना में ईवी में कम मेंटेनेंस लगता है, लेकिन लापरवाही बरतने पर कार की ड्राइविंग रेंज और बैटरी लाइफ पर सीधा असर पड़ता है। सर्विसिंग करवाते समय किन पांच जरूरी बातों का ध्यान रखकर आप अपनी ईवी की लाइफ और माइलेज बढ़ा सकते हैं? आइए जानते हैं इस लेख में...
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : एआई जनरेटेड
भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की मांग में जबरदस्त इजाफा देखा जा रहा है। हालांकि, आज भी कई ईवी खरीदार ड्राइविंग रेंज को लेकर चिंतित रहते हैं। कंपनियां अब पहले से काफी अधिक रेंज वाले मॉडल बाजार में उतार रही हैं। चूंकि ईवी में इंजन ऑयल, स्पार्क प्लग या पेचीदा गियरबॉक्स जैसे स्पेयर पार्ट्स नहीं होते, इसलिए इनमें मेंटेनेंस बहुत कम लगता है।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : एआई जनरेटेड
1. बैटरी हेल्थ का रखें ध्यान
- ईवी की सर्विसिंग कराते समय सबसे पहले बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम की पूरी जांच करवाना जरूरी है। गाड़ी को आमतौर पर 20 से 80 प्रतिशत के बीच चार्ज रखना बैटरी के लिए सुरक्षित माना जाता है। बार-बार बैटरी को 100 प्रतिशत तक फुल चार्ज करने या 0 प्रतिशत तक डिस्चार्ज होने देने से बैटरी सेल्स पर दबाव पड़ सकता है।
- इसके अलावा फास्ट चार्जिंग का बहुत ज्यादा इस्तेमाल करने से भी बचना चाहिए। फास्ट चार्जिंग से पैदा होने वाली गर्मी बैटरी लाइफ को नुकसान पहुंचा सकती है। सर्विस के समय टेक्नीशियन से बैटरी के ओवरऑल हेल्थ इंडिकेटर और चार्जिंग पोर्ट की सफाई भी जरूर चेक करवाएं।
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- फोटो : एआई जनरेटेड
2. सही टायर प्रेशर और रोटेशन जरूरी
- पेट्रोल-डीजल गाड़ियों के मुकाबले इलेक्ट्रिक कारें भारी होती हैं और इनमें इंस्टेंट टॉर्क मिलता है। इसकी वजह से टायरों पर ज्यादा दबाव रहता है और वे तेजी से घिस सकते हैं।
- अगर टायरों में हवा का प्रेशर कम है तो रोलिंग रेजिस्टेंस बढ़ जाता है। ऐसे में मोटर को गाड़ी चलाने के लिए ज्यादा ताकत लगानी पड़ती है और इसका असर ड्राइविंग रेंज पर पड़ सकता है। इसलिए सर्विसिंग के समय टायर प्रेशर को कंपनी के बताए स्टैंडर्ड के अनुसार जरूर सेट करवाएं।
- इसके साथ ही हर आठ से दस हजार किमी पर टायरों का रोटेशन और व्हील अलाइनमेंट करवाना भी जरूरी है। इससे टायरों की घिसावट एक समान बनी रहने में मदद मिलती है।
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- फोटो : एआई जनरेटेड
3. ब्रेक और फ्लूइड्स की जांच
- इलेक्ट्रिक वाहनों में रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम मिलता है। इसकी वजह से पारंपरिक कारों की तुलना में ब्रेक पैड्स का इस्तेमाल कम होता है। हालांकि, कम इस्तेमाल होने की वजह से कभी-कभी ब्रेक कैलिपर्स और डिस्क में जंग लगने की आशंका बनी रहती है। इसलिए सर्विसिंग के दौरान ब्रेक पैड्स, डिस्क और ब्रेक कैलिपर्स की सफाई और ग्रीसिंग जरूर करवानी चाहिए। इसके अलावा ब्रेक फ्लूइड को भी समय पर बदलवाना चाहिए। समय के साथ ब्रेक फ्लूइड नमी सोख सकता है।
- रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम सही तरीके से काम कर रहा है या नहीं, इसे डायग्नोस्टिक टूल से चेक करवाना भी जरूरी है। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलती है कि ब्रेकिंग के दौरान एनर्जी वापस बैटरी में स्टोर हो रही है।
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- फोटो : एआई जनरेटेड
4. सॉफ्टवेयर अपडेट को न करें नजरअंदाज
- आज की मॉडर्न इलेक्ट्रिक कारें काफी हद तक सॉफ्टवेयर पर निर्भर करती हैं। ऑटोमोबाइल कंपनियां समय-समय पर ओवर-द-एयर यानी OTA या डीलरशिप के जरिए सॉफ्टवेयर अपडेट जारी करती हैं।
- ये अपडेट बैटरी मैनेजमेंट और रेंज एफिशिएंसी को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। इसलिए सर्विसिंग के दौरान हमेशा यह सुनिश्चित करें कि आपकी कार में लेटेस्ट सॉफ्टवेयर वर्जन इंस्टॉल हो।