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EV Policy: दिल्ली में 2028 से पेट्रोल बाइक-स्कूटर पर बैन! क्या है दोपहिया श्रेणी के सामने सबसे बड़ी चुनौती

Mon, 13 Jul 2026 05:45 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Mon, 13 Jul 2026 05:45 PM IST
सार

दिल्ली सरकार की नई इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को तेजी से बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। हालांकि, क्रिसिल रेटिंग्स का मानना है कि इस नीति की सबसे बड़ी चुनौती दोपहिया वाहन होंगे। क्योंकि इस श्रेणी में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी अभी भी काफी सीमित है। जानें इलेक्ट्रिक दोपहिया को लेकर क्या है यह चिंता। 

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Delhi EV Policy: Two-Wheelers Face Biggest Challenge as ICE Ban Looms by 2028, Says Crisil Ratings
Delhi EV Policy - फोटो : Amar Ujala

दिल्ली सरकार ने राज्यों के स्तर पर देश का सबसे महत्वाकांक्षी इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) अभियान शुरू किया है। इस नीति का मुख्य मकसद रजिस्ट्रेशन नियमों, वित्तीय प्रोत्साहनों और हाइब्रिड के मुकाबले शुद्ध इलेक्ट्रिक वाहनों (प्योर ईवी) को प्राथमिकता देकर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को रफ्तार देना है। 

लेकिन, रेटिंग एजेंसी क्रिसिल रेटिंग्स के मुताबिक, इस नीति के तहत अप्रैल 2028 से पारंपरिक ईंधन (पेट्रोल) वाले दोपहिया वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर पूरी तरह बैन लगाने का फैसला टू-व्हीलर इंडस्ट्री के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती लेकर आया है। 

Delhi EV Policy: Two-Wheelers Face Biggest Challenge as ICE Ban Looms by 2028, Says Crisil Ratings
Delhi EV Policy 2.0 - फोटो : Adobe Stock

टू-व्हीलर सेगमेंट के लिए दिल्ली ईवी नीति सबसे बड़ी चुनौती क्यों है?

क्रिसिल रेटिंग्स की डायरेक्टर पूनम उपाध्याय के अनुसार, 'अप्रैल 2028 से केवल ईवी रजिस्ट्रेशन' का यह नियम उद्योग को इलेक्ट्रिक उत्पादों, क्षमता और डिस्ट्रीब्यूशन में निवेश तेज करने का एक साफ रास्ता तो देता है, लेकिन व्यावहारिक धरातल पर चुनौतियां बड़ी हैं:

  • ईवी की बेहद कम हिस्सेदारी:
    वित्त वर्ष 2026 (FY26) में दिल्ली में टू-व्हीलर्स का कुल रजिस्ट्रेशन लगभग 25 प्रतिशत बढ़कर 5.7 लाख यूनिट्स तक पहुंच गया। लेकिन इसमें इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी महज 7.3 प्रतिशत ही रही। इतने कम स्तर से 2028 तक 100 प्रतिशत पर पहुंचना एक बड़ा काम है।

  • घटती वित्तीय मदद और कीमतों का दबाव:
    नीति के तहत पहले साल हर वाहन पर 30,000 रुपये तक का इंसेंटिव मिलेगा, जो अगले दो वर्षों में धीरे-धीरे कम होता जाएगा। हालांकि नीति में कबाड़ (स्क्रैपेज) लाभ और टैक्स छूट भी शामिल हैं, लेकिन जैसे-जैसे सरकारी वित्तीय सहायता कम होगी, ईवी की बिक्री को बनाए रखने के लिए गाड़ियों की कीमतें और लागत और बचत का गणित सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाएंगे।

  • अल्पकालिक रूप से प्रासंगिक रहेंगे पेट्रोल इंजन:
    पूनम उपाध्याय का मानना है कि इस नीति के कारण टू-व्हीलर बाजार का भविष्य पूरी तरह से इलेक्ट्रिक की तैयारी से जुड़ जाएगा, लेकिन निकट भविष्य में इंटरनल कंबशन इंजन (ICE) यानी पेट्रोल मॉडल अपनी प्रासंगिकता बनाए रखेंगे।

Delhi EV Policy: Two-Wheelers Face Biggest Challenge as ICE Ban Looms by 2028, Says Crisil Ratings
Electric Car - फोटो : FREEPIK

निजी कारों और चार-पहिया वाहनों पर इस नीति का क्या असर होगा?

चार पहिया सेगमेंट की कहानी टू-व्हीलर से बिल्कुल अलग है। यहां सरकार ने ज्यादा लचीला रुख अपनाया है:

  • निजी कारों पर कोई अनिवार्य बैन नहीं:
    टू-व्हीलर्स के उलट, निजी कारों के लिए केवल ईवी रजिस्ट्रेशन कराने की कोई कानूनी बाध्यता या अनिवार्यता नहीं रखी गई है। यहां सरकार सिर्फ इंसेंटिव के दम पर लोगों को ईवी अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।

  • शानदार मौजूदा परफॉर्मेंस:
    वित्त वर्ष 2026 में दिल्ली में लगभग 2 लाख फोर-व्हीलर्स का रजिस्ट्रेशन हुआ। इसमें से करीब 77,000 इलेक्ट्रिक वाहन थे, यानी 39 प्रतिशत की मजबूत हिस्सेदारी। और लगभग 52,000 हाइब्रिड गाड़ियां थीं।

  • टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस से 100% छूट:
    नीति के तहत दिल्ली में रजिस्टर्ड होने वाली उन सभी ईवी फोर-व्हीलर पैसेंजर गाड़ियों को रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस से 100 प्रतिशत की छूट मिलेगी, जिनकी एक्स-शोरूम कीमत 30 लाख रुपये या उससे कम है।

  • पेट्रोल-डीजल कारों का भविष्य:
    अनिवार्य बैन न होने के कारण मध्यम अवधि में पेट्रोल-डीजल (ICE) गाड़ियां बाजार में बनी रहेंगी। इस सेगमेंट में इलेक्ट्रिफिकेशन की रफ्तार पूरी तरह से गाड़ियों की कीमत, चार्जिंग की सुविधा और नए मॉडल्स की उपलब्धता पर टिकी होगी।

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Delhi EV Policy: Two-Wheelers Face Biggest Challenge as ICE Ban Looms by 2028, Says Crisil Ratings
ई रिक्शा - फोटो : संवाद

तीन पहिया श्रेणी के लिए क्या हैं नियम?

क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार, सभी वाहन श्रेणियों में सबसे पहला और सबसे नजदीकी बदलाव थ्री-व्हीलर सेगमेंट में देखने को मिलेगा:

  • 1 जनवरी 2027 से पूर्ण प्रतिबंध:
    तीन पहिया वाहनों के लिए 'केवल ईवी रजिस्ट्रेशन' का नियम 1 जनवरी 2027 से ही लागू हो जाएगा।

  • पहले से ही मजबूत स्थिति:
    वित्त वर्ष 2026 में दिल्ली में रजिस्टर्ड कुल 55,700 थ्री-व्हीलर्स में से लगभग दो-तिहाई वाहन पहले से ही इलेक्ट्रिक थे।

  • सफलता की शर्तें:
    थ्री-व्हीलर सेगमेंट में इस बदलाव की पूर्ण सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वाहनों की पर्याप्त सप्लाई हो, वाहन खरीदने के लिए लोन की आसान पहुंच हो और शहर में चार्जिंग व बैटरी-स्वैपिंग का मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध हो। 

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