अक्सर लोग यह जानना चाहते हैं कि दूसरे राज्यों से अगर सेकेंड हैंड कार खरीदी जाए तो उसका डॉक्यूमेंट का क्या प्रोसेस होता है? इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि दिल्ली-एनसीआर में कार थोड़ी कम कीमत पर मिल जाती है। ऐसे में दूसरे राज्यों के लोग भी दिल्ली-एनसीआर से कार लेने का मन बनाते हैं। अगर आप भी किसी दूसरे राज्य से कार खरीदने जा रहे हैं तो कुछ बाते जानने आपके लिए बेहद जरूरी है।
1. सेकेंड हैंड कार खरीदते समय ध्यान रखें कि ऑनरशिप ट्रांसफर बेहद जरूरी है। यह इसलिए जरूरी है क्योंकि अगर इंश्योरेंस के डॉक्यूमेंट आपके या परिवार में किसी के नाम नहीं होंगे तो क्लेम करते समय परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
2. अगर आप कार बेच रहे हैं तो आपको भी ऑनरशिप ट्रांसफर का ध्यान रखना होगा, क्योंकि बाद में अगर कार से कोई एक्सिडेंट का क्रिमिनल गतिविधि होती है तो पुलिस सबसे पहले आपको संपर्क करेगी।
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3. बात करें ऑनरशिप ट्रांसफर की तो मान लीजिए आप यूपी के रहने वाले हैं और दिल्ली से कार खरीद रहे हैं। ऐसे में कार विक्रेता दिल्ली के RTO से एनओसी आपको देगा। यह एनओसी, कार की इनवॉइस और अन्य दस्तावेज आपको अपने RTO में जमा कराने होंगे।
4. आरटीओ में आपको रोड टैक्स भी देना होगा। यह रोड टैक्स कार की वर्तमान कीमत के अनुसार होता है। उदाहरण के तौर पर अगर सेकेंड हैंड कार की कीमत 6.5 लाख रुपए है तो इसके पुन: रजिस्ट्रेशन में 40-45 हजार रुपए लग जाएंगे। ऐसे में हमारी सलाह यही है कि अगर बेहद अच्छी डील मिल रही हो तभी दूसरे राज्य की कार खरीदें।