इन 5 वजहों से मारूति सुजुकी भारत में है नंबर वन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इमोशन से जुड़ा रिश्ता
हम भारतीय भावनात्मकता को बहुत तवज्जो देते हैं। भारतीय बाजार में आम लोगों की कार बनकर उभरी मारूति सुजुकी एक ऐसा समय था जब कार का मतलब मारूति बन चुकी थी। 1983 में गुड़गांव के मारूति उद्योग प्लांट से जब पहली मारूति 800 निकली थी तो लोगों ने उत्सव मनाया था। उस समय इस कार की कीमत लगभग 66 हजार रुपये थी। पूरे देश के गांव-गांव तक इस कार की रीच पहुंच गई। एक वजह ये भी है जो हमें मारूति से अलग नहीं कर पाता।
किसी भी बाजार में सफलता की सबसे बड़ी गारंटी देता है उसका सेल्स नेटवर्क। अगर आप देश के किसी इंटीरियर से भी गुजर रहे हों और आपके मारुति कार है और वह खराब हो जाती है तो महज कुछ किलोमीटर में ही आपकी कार ठीक करने वाला एक मेकैनिक मिल जाएगा और उसके पुर्जे भी मिल जाएंगे। अब ऐसे में आप बहुत बढ़िया कार बनाते हैं लेकिन उसके खराब होने पर आप फंस जाएं तो अच्छी कार रखकर क्या करेंगे। पहली बार कार खरीदने वाले अधिकतर ग्राहक कुछ नया प्रयोग करने के बजाए आंख बंद करके मारूति का उत्पाद खरीद लेते हैं।
मारुति ने भारत में हमेशा जमाने के साथ कदम ताल मिलाया है। सन् 2009 में मारूति 800 को महानगरों में बेंचना बंद करके कंपनी ने इसकी जगह नई तकनीकि व नए इंजन वाले ऑल्टो पर फोकस रखा और थोड़े-थोड़े समय के अंतर पर अपनी इस कार को भी अपग्रेड किया। अब ऑल्टो 800 बन गई है और जो सिर्फ थोड़े पैसे खर्च करके ज्यादा शक्ति वाली कार चाहता है उसके लिए ऑल्टो के10 उपलब्ध है। एंट्री लेवल कार सेगमेंट में कंपनी की ये दोनों ही कारें काफी अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं।
अगर आपके पास कार खरीदने वालों की लाइन लगी हो और आप डिलीवरी न दे पाओ तो यह भी एक नेगेटिव पहलू होता है। मारूति सुजुकी इस मामले में सबसे आगे है और इस समय कंपनी के 3 मैन्युफैक्चरिंग प्लाांट हैं - गुड़गांव, मानेसर और गुजरात। वर्तमान में गुजरात प्लांट की क्षमता 2.5 लाख यूनिट्स है। गुड़गांव में 7 लाख यूनिट्स व मानेसर में लगभग 8 लाख यूनिट्स का निर्माण (सालाना) किया जाता है। कंपनी गाड़ियों की मांग समय पर पूरा कर लेती है।