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प्रज्ञान के अलावा ये रोवर भी रखेंगे चांद पर कदम, मंगल को जानने में ये रहे मददगार

Fri, 06 Sep 2019 04:19 PM IST
Harendra Chaudhary ऑटो डेस्क, अमर उजाला
ऑटो डेस्क, अमर उजाला Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 06 Sep 2019 04:19 PM IST
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chandrayaan 2: know about the other countries Mars and Lunar Rovers programs include Pragyan
Rovers of Moon and Mars - फोटो : सांकेतिक फोटो

सात सितंबर को चंद्रयान-2 चांद की सतह पर कदम रखने जा रहा है। ऑर्बिटर, विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर, ये इस मिशन के अहम हिस्से हैं। वहीं विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर ये दोनों ही चांद की धरती पर कदम रखेंगे। लेकिन और भी रोवर हैं, जो चांद या मंगल की धरती पर कदम रख चुके हैं या रखने वाले हैं। जानते हैं इन इन रोवर्स के बारे में....


 

बेरेशीट

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Beresheet - फोटो : Israel Aerospace Industries

इजराइल एरोस्पेस इंडस्ट्रीज और स्पेस आईएल ने मिल कर इस साल दुनिया का पहला निजी चांद अभियान लॉन्च किया था। जिसे अमेरिकी कारोबारी एलन मस्क की कंपनी स्पेस एक्स के फॉल्कन-9 रॉकेट से रवाना किया गया था। लेकिन अप्रैल में चांद की सतह से 10 किमी दूर लैंडिंग करते वक्त यह दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इसमें एक खास तरह की लैंडिंग तकनीक हॉपिंग का इस्तेमाल होना था, लेकिन उससे पहले ही यह मिशन असफल हो गया। इसमें एक खास टाइम कैप्सूल भी था।
 

प्रज्ञान

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Vikram Lander and Pragyan Rover - Chandrayaan-2 - फोटो : AmarUjala

यह सात सितंबर को देर रात चांद की सतह पर लैंड करेगा। लैंडिंग के चार घंटे बाद 27 किलो वजह वाला प्रज्ञान रोवर विक्रम लैंडर से बाहर निकलेगा। ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस प्रज्ञान रोवर में छह रोबोटिक पहिये हैं। यह करीब 500 मीटर तक सफर कर सकता है। यह एक सेंटीमीटर चलने में एक सेकेंड का वक्त लेगा। इसमें रॉकर बोगी स्सपेंशन सिस्टम लगा होगा और प्रत्येक पहिये में ब्रशलेस डीसी इलेक्ट्रिक मोटर लगी होगी। वहीं इसकी लंबाई 3 फीट, चौड़ाई 2.5 फीट और ऊंचाई 2.8 फीट होगी। काम करने के लिए प्रज्ञान सोलर ऊर्जा का इस्तेमाल करेगा। यह सिर्फ लैंडर विक्रम से संपर्क स्थापित कर सकता है। यह सतह में मौजूद पानी या बाकी तत्वों का बारीकी से परीक्षण करेगा।
 

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मार्स 2020

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Mars 2020 - फोटो : NASA

नासा अगले साल जुलाई 2020 में अपना मंगल पर मार्स 2020 के नाम से रोवर मिशन शुरू करने वाला है। इसके रोवर की खासियत होगी कि इसमें न केवल ड्रिल करने की क्षमता होगी, बल्कि यह सैंपल्स भी एकत्र कर सकेगा। इसके अलावा ग्रह की सतह के साथ इतिहास की भी जानकारी हासिल करेगा। इसके सैंपल्स मंगल पर सुरक्षित रहेंगे और इनका इस्तेमाल भविष्य के रोवर्स के लिए किया जाएगा।
 

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रोसालिंड फ्रैंकलिन

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Rosalind Franklin - फोटो : European Space Agency

प्रसिद्ध ब्रिटिश वैज्ञानिक के नाम पर रखा गए इस मार्स रोवर मिशन को यूरोपियन स्पेस एजेंसी और रॉसकॉसमॉस अगले साल जुलाई 2020 में छोड़ेगा। इसे रशियन स्टेट कॉर्पोरेशन के सहयोग से छोड़ा जाएगा। इसकी खासियत होगी कि यह मंगल की जमीन में 2 मीटर तक छेद कर सकता है और मिट्टी में जीवन की संभावनाएं खोजेगा। इस रोवर की सुरक्षा के लिए खास वाहन भी आगे चलेगा, जो इसके लिए सही सतह तलाशेगा।          
 

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